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बॉयज-गल्र्स हॉस्टल के टॉयलेट चोक, गेस्ट हाउस में करनी पड़ी वैकल्पिक व्यवस्था

-छह महीने पहले पीडब्ल्यूडी विभाग ने टॉयलेट की कराई थी मरम्मत, घटिया काम की खुली पोल

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सागर

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Aakash Tiwari

Jun 30, 2019

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बॉयज-गल्र्स हॉस्टल के टॉयलेट चोक, गेस्ट हाउस में करनी पड़ी वैकल्पिक व्यवस्था

सागर. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में शनिवार को बड़ी संख्या में बॉयज और गल्र्स हॉस्टल में रहने वाले छात्रों ने डीन कार्यालय का घेराव किया। छात्रों की नाराजगी इस बात को लेकर थी कि वह हॉस्टल में रहने का किराया देते हैं, लेकिन उन्हें सुविधाएं उस दर्जे की नहीं मिल रही है। छात्रों का कहना था कि हॉस्टल के सभी टॉयलेट चोक पड़े हुए हैं। एेसे में उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। बता दें कि गल्र्स और बॉयज मिलाकर दोनों हॉस्टल में करीब ५०० विद्यार्थी रह रहे हैं। इसी बीच डीन डॉ. जीएस पटेल भी मेडिकल छात्रों के बीच पहुंच गए, जहां उन्होंने उनकी समस्याएं सुनी।
उन्होंने कहा कि पीब्ल्यूडी विभाग ने कुछ महीने पहले ही टॉयलेट की मरम्मत कराई थी। इतनी जल्दी उनकी हालत खराब नहीं हो सकती। इस पर छात्रों ने उनसे खुद निरीक्षण कर इसकी सच्चाई देने की बात कही। छात्रों की मांग पर डीन स्टाफ के साथ दोनों हॉस्टलों का निरीक्षण किया, जहां उन्हें वास्तव में स्थिति बेहद खराब मिली। टॉयलेट के अंदर गंदा पानी भरा पाया। नल टूटे मिले। वहीं, बिजली व्यवस्था भी चौपट पड़ी पाई।

-गेस्ट हाउस खुलवाकर की वैकल्पिक व्यवस्था
निरीक्षण के दौरान डीन ने छात्रों की समस्याओं को वाजिब माना और जब तक हॉस्टल के टॉयलेट रिपेयर नहीं हो जाते तब के लिए गेस्ट हॉउस में मेडिकल छात्रों के नहाने और निस्तार की व्यवस्था की है। बता दें कि लाखों रुपए की लागत से छह महीने पहले पीडब्ल्यूडी विभाग ने हॉस्टल के टॉयलेट और डे्रनेज की मरम्मत कराई थी, लेकिन जल्द ही उनकी स्थिति खराब हो चुकी है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ठेकेदारों ने किस गुणवत्ता के साथ काम किया था।

-मैनटेनेंस का जिम्मा, फिर भी मरम्मत करने से इंकार
बीएमसी ने पूरे भवन का जिम्मा पीडब्ल्यूडी को दिया है। विभाग को ही साल भर भवन के अंदर होने वाली टूट फूट को सुधारने की जिम्मेदारी है। इस मामले में जब डीन ने विभाग के अधिकारियों को फोन कर टॉयलेट की मरम्मत करने को कहा तो अधिकारी ने यह काम करने से मना कर दिया। बता दें कि पीडब्ल्यूडी विभाग ने २ करोड़ ४ लाख रुपए में बीएमसी में रिनोवेशन का काम किया है। काम का ब्यौरा भी सौंप दिया है, लेकिन देखा जाए तो बीएमसी में कही पर भी मैनटेनेंस का काम नहीं दिखाई दिया है। नए टॉयलेट से लेकर टॉयलेट के रिपेयर के काम किए गए, लेकिन वह भी जर्जर हालत में पहुंचने लगे हैं।

छात्र अपनी समस्या लेकर आए थे। मैं खुद उनके साथ हॉस्टल गया था, जहां पर टॉयलेट की स्थिति काफी खराब मिली है। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को रिपेयर करने कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया है। अभी वैकल्पिक व्यवस्था के लिए गेस्ट हाउस खोला गया है।
डॉ. जीएस पटेल, डीन बीएमसी