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बड़े बाजार के समोसे और मिठाइयां खाने सुबह से पहुंचते हैं हजारों लोग, दीपावली के त्योहार पर बढ़ जाएगी स्वादिष्ट मिठाइयों की डिमांड

मिनी वृंदावन कहे जाने वाला बड़ा बाजार राधा-कृष्ण मंदिरों के साथ यहां वर्षों पुरानी दुकानों के लिए मशहूर है। यहां के खाने-पीने के कई व्यंजन देशभर में प्रसिद्ध है। इसके साथ कपड़ा, कॉस्मेटिक, सराफा आदि की सैकड़ों दुकानें इस क्षेत्र में हैं। यह बाजार 250 वर्षों से अधिक पुराना है।

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सागर

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Reshu Jain

Oct 21, 2024

bada bazar

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मिनी वृंदावन कहा जाने वाला बड़ा बाजार खाने के लिए भी है मशहूर, 250 वर्ष पुराना है यह बाजार

सागर. मिनी वृंदावन कहे जाने वाला बड़ा बाजार राधा-कृष्ण मंदिरों के साथ यहां वर्षों पुरानी दुकानों के लिए मशहूर है। यहां के खाने-पीने के कई व्यंजन देशभर में प्रसिद्ध है। इसके साथ कपड़ा, कॉस्मेटिक, सराफा आदि की सैकड़ों दुकानें इस क्षेत्र में हैं। यह बाजार 250 वर्षों से अधिक पुराना है। बड़े बाजार की सकरी गलियों में हजारों ग्राहक रोजाना खरीदी करने के लिए पहुंचते हैं। इस बाजार से ग्राहकों का नाता गहरा है। शुद्ध खाने की चीजों के लिए लोग बड़ा बाजार का रुख करते हैं। दीपावली के त्योहार पर यहां करोड़ो रुपए का कारोबार होगा। सबसे ज्यादा भीड़ यहां की मिठाई दुकानों और सराफा बाजार में रहेगी।

भगवान को लगता है लड्डू और मिठाई का भोग

बड़ा बाजार की मिठाइयों की दुकानों पर केसर पेड़ा, मगज के लड्डू मावा बर्फी, चिरोंजी बर्फी और जलेबी प्रसिद्ध हैं। यहां स्थित मंदिरों में इन्हीं दुकानों की मिठाइयों का भोग भक्त मंदिरों में लगाते हैं। प्राचीन मंदिरों के साथ ये दुकानें भी यहां वर्षों पुरानी हैं। खास बाद यह है कि इन दुकानों के व्यापारी आज भी वही स्वाद अपने ग्राहकों के लिए खिला रहे हैं। शुद्धता की वजह से मंदिरों में इन मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। यहां देव राघव जी मंदिर के पुजारी निताई दास ने बताया कि बड़े बाजार की मिठाइयों शुद्धता रहती है। यहां नकली मावा का इस्तेमाल नहीं होता है। यही वजह है कि भगवान को भी यहां की मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।

प्रसिद्ध हैं यहां के समोसे

बड़ा बाजार में वर्षों पुरानी दुकान लंगड़ा महाराज की दुकान पर समोसे खिलाए जा रहे हैं। दुकान संचालक नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि पहले दही बड़ा वाले महाराज से दुकान चलती थी, अब लंगड़ा महाराज के नाम से दुकान प्रसिद्ध हैं। उन्होंने बताया कि पूरे शहर के लोग बड़ा बाजार में हमारी दुकान पर समोसे खाने के लिए आते हैं। उन्होंने बताया कि सुबह 8 बजे से 11 बजे तक ही दुकान पर समोसे मिलते हैं। 3 घंटों में करीब 500 से ज्यादा समोसे की बिक्री हो जाती है। उन्होंने बताया कि समोसे का मसाला सुबह की तैयार करते हैं। सफाई और शुद्धता की वजह से लोग समोसा खाना ज्यादा पसंद करते हैं। पूरे शहर से लोग बड़ा बाजार में समोसे खाने के लिए पहुंचते हैं।

बड़ा बाजार में मेरी दुकान 60 वर्ष पुरानी है। यहां ग्राहक मुझे छोटे वृंदावन के नाम से बुलाते हैं। हमारी स्टेशनरी की दुकान है। इसके अलावा विशेष पर्व और त्योहार की वस्तुएं मिलती हैं। यहां ग्राहकों के विश्वास के चलते दुकानें चलती हैं।

विनय जैन, स्टेशनरी व्यापारी

हमारी दुकानों पर सोने-चांदी की शुद्ध आभूषण बेंचें जाते हैं। खास बात यह है पारंपरिक आभूषण लेने के लिए वर्षों से ग्राहक यहां आ रहे हैं। यहां ग्राहक और व्यापारियों का विशेष रिश्ता से जुड़ गया है।

शुभम सोनी, सराफा व्यापारी

बड़ा बाजार में खाने का स्वाद का अलग मजा है। ऐसा स्वाद कहीं और नहीं मिलता। वर्षों से इन्हीं दुकानों पर हम समोसे, चाट, फुल्की आदि खा रहे हैं। यहां कई दुकानों पर लगातार तीसरी पिड़ी भी लगातार वही काम करती नजर आएगी।

गौतम रैकवार, ग्राहक