
Teachers day 2018 : पुलिस इंस्पेक्टर बनने के बाद भी नहीं छूटी पढ़ाने की ललक, कर रहे ऐसा काम, रह चुके है शिक्षक
दमोह. वर्तमान दौर में निराशा व्यक्तित्व को तोड़ रही है, लेकिन हम आपको ऐसी शख्सियत के जीवन को यहां रख रहे हैं, जिसने अपने छात्र जीवन से लेकर कॅरियर तक हौसला नहीं छोड़ा और अपनी उड़ान जारी रखी। जिसमें उसे आशातीत सफलता भी मिली।
दमोह जिले के कुम्हारी थाना प्रभारी बखत सींग ठाकुर भानुप्रताप के जीवन में होश संभालने से वर्तमान तक कई उतार चढ़ाव आए, लेकिन इनकी परवाह किए बगैर चरेवैति-चरेवैति के सिद्धांत पर अमल करते हुए पुलिस जैसी नौकरी में भी लोगों का भला कर रहे हैं, विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने के लिए मार्गदर्शक बनने अपना कीमती समय निकाल रहे हैं। यही वजह है लोग इनके अंदर के शिक्षक को अब भी सलाम करते है।
पन्ना जिले के मड़वा गांव में 1 जनवरी 1981 को जन्मे बखत सींग की प्राइमरी शिक्षा मड़वा में, हायर सेकंडरी चंद्रनगर, कॉलेज शिक्षा छतरपुर में की। इसके अलावा एमएससी, एसडब्लू, पीजीडीसीए कोपा, पीएमआरवाए की अतिरिक्त डिग्री हासिल कीं। 200१ से छतरपुर जिले बेडरी गंज स्कूल में शिक्षक के रूप में पदस्थ हुए तीन साल की सेवा से त्यागपत्र देकर चंद्रनगर के शिवराजपुर गांव में सरपंच पद का चुनाव लड़ा और 2004 से 2009 तक सरपंच रहते हुए, इस पद से त्याग पत्र दे दिया। इसके बाद पुन: हाइस्कूल मड़ला पन्ना में 2009 से 2012 तक लैब टेक्निशियन के पद पर पदस्थ रहे।
इस दौरान विद्यार्थियों को नि:शुल्क कोचिंग पढ़ाकर कई विद्यार्थियों को कॉम्प्टीशन एक्जाम में निकलवाते रहे। शिक्षक रहते ही पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती की परीक्षा दी। जिसमें सफल हुए शिक्षक पद से त्याग पत्र देकर 1 जून 2013 को पुलिस विभाग ज्वाइन किया। इनकी पहली पोस्टिंग सागर जिले के सुरखी थाना की पुलिस चौकी राजा बिलहरा में हुई। वर्तमान में कुम्हारी थाना प्रभारी के रूप में बखूबी श्रेष्ठ पुलिसिंग के उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। बखत सींग जब सरपंच थे तब उन्होंने 2006 भोपाल की महापंचायत में सम्मानित किया गया। अब पुलिस विभाग में हैं तो सामुदायिक पुलिसिंग एवार्ड 2016 को सम्मानित हो चुके हैं।
पुलिस विभाग में रहते हुए सादा भोजन पसंद करने वाले बखत को किताबों से अब भी लगाव है और बच्चों को मुफ्त में पढ़ाना उनका शौक है। वह अपने जीवन का प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद को मानते हैं। जीवन में अच्छे दिन के साथ दुखद दिन तब आए जब 6 नवंबर 2016 को कार दुर्घटना में छोटी बेटी की मौत हो गई। इसी माह दूसरा बज्रपात्र 18 नवंबर 2016 को ही मां की मौत हो गई। एक ही माह में मां और बेटी को खो देने के बाद जैसे-तैसे कर्तव्य पथ पर आकर सहज और सर्तक रहकर काम कर रहे थे, कि छोटा भाई आरएफ में छत्तीसगढ़ के रायपुर में पदस्थ था उसकी भी एक एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। इतने दुख झेलने के बाद भी हमेशा कर्तव्यपथ पर मुस्कुराहट के साथ लोगों का भला करने वाले ऐसे जिंदा दिल इंसान कम मिलते हैं। ऐसी शख्सियत के लिए पत्रिका परिवार सेल्यूट करती है।
Published on:
04 Sept 2018 05:26 pm
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