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video : जेएनपीए के संग्रहालय में रखी है गब्बर सिंह की मूंछ, पुतली बाई की ड्रेस और चालीराजा की अनूठी साइकल

प्रथम प्रधानमंत्री पं.नेहरु के पद और अंगुल चिन्ह भी हैं यहां, अन्य पुलिस प्रशिक्षण संस्थाओं में सबसे समृद्ध है जेएनपीए

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सागर

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Sanjay Sharma

May 22, 2019

jawaharlal nehru police academy sagar

jawaharlal nehru police academy sagar

सागर. चंबल के बीहड़ों में भय का पर्याय बने डाकू गब्बर सिंह की मूंछें, महिला डकैत पुतली बाई के जेवर, चोटी के बाल और शराब पीने वाला चांदी का प्याला ही नहीं शातिर डकैत चाली राजा की पेट्रोल से चलने वाली अपने जमाने की सबसे आधुनिक साइकिल और पुलिस द्वारा विभिन्न अभियानों के दौरान जब्त किए गए हथियार व अन्य सामान भी यादगार के तौर पर जेएनपीए के संग्रहालय में सजाया गया है। जिनके नाम पर पुलिस अकादमी संचालित है उन पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु के अंगुल और पदचिन्ह भी संगहालय की शोभा बढ़ा रहे हैं। आजादी के पहले ही यहां रियासतों के पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने वाला जेएनपीए (जवाहरलाल नेहरु पुलिस अकादमी) अपने प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की बेहतरी के लिए प्रदेश ही नहीं पूरे देश में भी पहचाना जाता है। दांगी राजा ऊदनशाह के किले में 1906 में सैन्य प्रशिक्षण की शुरूआत हुई और अब तक यहां करीब 700 डीएसपी व 8736 पुलिसकर्मी तैयार हुए हैं जो अब पुलिस महकमे में शामिल होकर कानून व्यवस्था संभाल रहे हैं।

गब्बर सिंह, चाली राजा और पुतलीबाई से भी जुड़ी यादें -

फिल्म शोले में जिस डाकू गब्बर ङ्क्षसह का किरदार मशहूर कलाकार अमजद खान ने निभाया था उस डाकू गब्बर ङ्क्षसह की यादें भी संग्रहालय में कैद हैं। डकैतों के विरुद्ध चले पुलिस अभियान की सफलता की यादगार के रूप में चंबल के बीहड़ों में आतंक का पर्याय बने गब्बर ङ्क्षसह की मूछें, स्टेनगन, ग्रेनैड व अन्य हथियार व उसके उपयोग का सामने भी संग्रहालय की दीर्घा में सुरक्षित हैं। डाकू गब्बर सिंह को प्रदेश के तत्कालीन पुलिस प्रमुख केएफ रुस्तम जी के निर्देशन में मुरैना के पास मार गिराया गया था। संग्रहालय में महिला डकैत पुतलीबाइ के सोने के जेवर, हथियार, उसकी जाने वाली शराब की बोतल और पीने वाला प्याला ही नहीं महिला दस्यू की चोटी के बाल भी रखे गए हैं। जबकि कुख्यात डाकू चाली राजा की पेट्रोल इंजन वाली अनूठी साइकिल अब भी लोगों के कौतुहल का विषय रहती है।

सजे हैं पं.नेहरु के पद और अंगुलचिन्ह -

देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं.जवाहरलाल नेहरु के सागर दौरे के अवसर पर व अकादमी (तब की पुलिस प्रशिक्षण कॉलेज) पहुंचे थे। अकादमी का नामकरण भी तब ही जवाहरलाल नेहरु के नाम पर किया गया। पं.नेहरु की यादें भी यहां सजी हैं। संग्रहालय की दीर्घा में पं. नेहरु के प्लास्टर ऑफ पेरिस पर लिए गए पद चिन्ह जबकि कैनवास पर लिए गए अंगुल चिन्ह भी रखे गए हैं। यहां पं.नेहरु के दौरे से जुड़े चित्रों को भी सजाया गया है।

प्रदेश का पहला और देश में भी नामचीन है जेएनपीए -

जवाहर लाल नेहरु पुलिस अकादमी प्रदेश का सबसे पहला पुलिस प्रशिक्षण संस्थान है। इसकी स्थापना 1906 में स्टेट-रियासतों के दौर में हुई थी। दांगी राजा ऊदनशाह के किले में संचालित इस प्रशिक्षण स्कूल में तब प्रदेश के अलावा यूपी, हैदराबाद, उड़ीसा, बिहार की विभिन्न रियासतों से भेजे गए सुरक्षाकर्मियों को प्रशिक्षित किया जाता था। यही वजह है कि देश-प्रदेश के आजाद होने से भी करीब 40 साल पहले से चल रहे इस प्रशिक्षण केंद्र का नाम न केवल देश में सबसे आगे है बल्कि यह प्रदेश का बड़ा संस्थान है।

प्रदेश में अब भी सबसे समृद्ध पुलिस अकादमी -

जेएनपीए निदेशक एडीजी जी.जर्नादन के अनुसार सागर स्थित जेएनपीए का इतिहास आजादी से भी पुराना और समृद्धशाली है। राजधानी भोपाल के पास भौंरी में नई पुलिस अकादमी जिसमें आधुनिक संसाधन उपलब्ध है शुरू कर दी गई है पर जेएनपीए अब भी बेमिसाल है। यहां डीएसपी रैंक के अधिकारियों को स्पेशल इन्वेस्टीगेशन, स्ट्रैस मैनेजमेंट, मानव अधिकार, साइबर क्राइम, थाना प्रबंधन, विधि और भीड़ नियंत्रण संबंधी पाठ्यक्रम पढ़ाए जाते हैं। यहां पुलिस के अलावा, परिवहन, वन विभाग, आबकारी विभाग और एपीइबी के सुरक्षाकर्मियों को भी प्रशिक्षित किया जाता है। इसलिए इसका अपना महत्व है।