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इश्क में हम तुम्हें क्या बताएं जैसी गजल देने वाले शायर अखलाक आज भी लोगों के जहन में

उर्दू अदब और शायरी में विशेष स्थान रखने वाले अखलाक सागरी

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What should we tell you in love, like the poet who gave a ghazal, is s

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सागर. इश्क में हम तुम्हें क्या बताएं किस कदर चोट खाए हुए हैं जैसी मशहूर गजल से देश और दुनिया में सागर का नाम रोशन करने वाले शायर अखलाक सागरी के शेर आज भी लोगों के जहन में मौजूद हैं। सागरी का एक वर्ष पूर्व 22 दिसंबर को इंतकाल हो गया था।
उर्दू अदब और शायरी में विशेष स्थान रखने वाले अखलाक सागरी लिखी और पढ़ी गजलें और गीतों से वे आज भी हमारे बीच हैं। सागरी अपने परिवार में तीसरी पीढ़ी के शायर थे। बचपन से ही उन्हें उर्दू और फारसी की शिक्षा मिली। उन्होंने 13 साल की उम्र में पहली बार गजल की कुछ पंक्तियां लिखीं और खुश होकर अपने पिता को दिखाईं तो पिताजी ने उनसे कहा था, बेटा अखलाक गजल लिखी नहीं पढ़ी जाती है। फिर गजल पढऩे में ऐसा मन लगा कि उन्होंने इसे ही अपना भविष्य चुन लिया और एक के बाद एक गजलें पढ़ते गए।

अखलाक ने इश्क में हम तुम्हें क्या बताएं किस कदर चोट खाए हुए हैं, गजल ने देश और दुनिया में एक अलग ही मुकाम हासिल किया है। उनकी गजल देख लैला तेरा मजनू का कलेजा और आंखों से तो काम हुआ है जैसी गजलों को भी लोगों ने खूब पसंद किया। खास बात यह है कि सागरी साहब ने तीन बार लाल किले पर आयोजित होने वाले मुशायरे में अपनी गजलें पढ़ी यह बड़ी उपलब्धी है। सागर में एक अप्रेल को आयोजित होने वाले मूर्ख सम्मेलन की शुरुआत करने में उनका भी योगदान रहा है। अखलाक के पुत्र अयाज सागरी ने बताया कि अखलाक अकादमी के जरिए शहर का नाम रोशन करने के लिए कई और शायर तैयार कर रहे थे। अखलाक का नाम तीन बार पद्मभूषण पुरस्कार के लिए नाम भेजा गया था लेकिन किन्हीं कारणों के चलते नहीं मिल पाया था। 1993 में फिल्म आ जा मेरी जान और बेबफ सनम एलबम के गीत के लिए अखलाक सागरी को कोर्ट जाना पड़ा था।

सागर आकाशवाणी पर विशेष कार्यक्रम आज रात 8 बजे

सागरी साहब की पहली पुण्यतिथि पर 22 दिसंबर को रात 8 बजे सागर आकाशवाणी केंद्र से शायर जनाब अखलाख सागरी जी पर केन्दित कार्यक्रम इशक में हम तुम्हें क्या बताएं प्रसारित किया जा रहा है। कार्यक्रम में अखलाख जी का कलाम जाने माने गायकों की आवाज में शामिल हैं