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बीना में चार समितियों पर गेहूं की खरीदी हुई पूरी, एक लाख क्विंटल के ऊपर हुई खरीदी

पंजीयन के अनुसार आधे किसानों ने भी नहीं बेचा गेहूं, 28 मई तक होनी है खरीदी, तीन समितियों पर बारदाने की कमी से हुई देरी
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सागर

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sachendra tiwari

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Updated: 27 May 2026, 12:36 PM IST

Wheat procurement completed at four committees, over one lakh quintals purchased

गेहूं की तौल करते हुए। फोटो-पत्रिका

बीना. ब्लॉक में सात समर्थन मूल्य गेहूं खरीदी के लिए सात केन्द्र बनाए गए थे, जिसमें चार पर खरीदी पूरी हो चुकी है, लेकिन तीन पर अभी भी किसान शेष रह गए हैं। 28 मई तक खरीदी चलेगी, जिसमें स्लॉट बुकिंग करने वाले शेष किसान उपज बेच पाएंगे। पंजीयन के अनुसार आधे किसानों ने भी गेहूं नहीं बेचा और खरीदी एक लाख क्विंटल के ऊपर हो गई है।

जानकारी के अनुसार 24 मई की शाम तक 1558 किसान गेहूं बेच चुके हैं, जिसमें 1 लाख 23 हजार 196 क्विंटल खरीदी हुई है, जिसमें चार केन्द्र किर्रावदा, रामपुर, बिलाखना और बीना इटावा समिति में स्लॉट बुक वाले सभी किसान उपज बेच चुके हैं। पुरैना, मंडीबामोरा और भानगढ़ में अभी करीब 100 किसान शेष रह गए हैं, लेकिन बारदाना और हम्मालों की भी समस्या से यहां तौल प्रभावित हो रही है। जिन किसानों के स्लॉट बुक हैं, उनकी खरीदी 28 मई तक की जाएगी। सभी केन्द्रों पर खरीदी होने के बाद आंकड़ा सवा लाख क्विंटल तक पहुंच जाएगा।

4162 हुए थे कुल पंजीयन

गेहूं बेचने के लिए इस वर्ष 4162 किसानों ने पंजीयन कराए थे, लेकिन 24 मई तक 1558 किसानों ने ही गेहूं बेचा है। 28 मई तक यह आंकड़ा करीब 100 और बढ़ेगा। पंजीयन के अनुसार इस वर्ष आधे किसान भी गेहूं नहीं बेचेंगे। यदि आधे किसान भी गेहूं बेचते हुए खरीदी का डेढ़ लाख क्विंटल पर पहुंच जाता।

नए किसानों के स्लॉट नहीं हुए बुक

गेहूं के स्लॉट बुक करने की तारीख 28 की गई है, लेकिन यह उन किसानों के लिए है, जिनके पहले से स्लॉट बुक थे और किसी कारणवश तौल नहीं हो पाई थी। ऐसे किसानों को ही इसका लाभ मिला है, नए किसान स्लॉट बुक नहीं कर पाए हैं।

434 किसानों ने बेचा चना

समर्थन मूल्य पर चना बेचने के लिए 2063 किसानों ने पंजीयन कराए थे, लेकिन बाजार में चना के दाम बढऩे से सिर्फ 434 किसानों ने ही उपज बेची। 12637 क्विंटल चना खरीदी हुई है। वहीं 2882 किसानों ने 80 हजार 164 क्विंटल मसूर बेची है। क्योंकि मसूर के दाम बाजार में कम हैं और अधिक से अधिक किसान केन्द्रों पर मसूर बेचने पहुंचे थे।