
yamuna nadi
सहारनपुर।
सहारनपुर में भी बाढ़ का खतरा मडंरा रहा है। इस बार खतरा यमुना हथनी कुंड बैराज के पास यमुना नदी के बाएं बन्ध के क्षतिग्रस्त होने से गहरा रहा है। यह अलग बात है कि वर्तमान में पानी कम हाेने के वजह से हालात सामान्य हैं लेकिन इस आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता कि यदि दाेबारा से यमुना में 6 लाख क्यूसेक पानी आ गया आैर इस क्षतिग्रस्त बन्ध की मरम्मत नहीं हुई ताे यह टूट सकता है। एेसा हुआ ताे सहारनपुर में बाढ़ आ सकती है। दरअसल, 28 जुलाई काे पहाड़ी क्षेत्र में हुई लगातार बरसात के बाद हथनीकुण्ड से यमुना नदी में 6 लाख क्यूसेक पानी आ गया था। यह पानी पिछले पांच वर्षाें से सबसे अधिक था। यह पानी खतरे के निशान से ऊपर था और इससे बाढ़ जैसे हालात सहारनपुर के नुकुड़ और सरसावा क्षेत्र में बन गए थे। बाढ़ के पानी में दाे से अधिक लोगों की बह जाने से मौत हो गई थी जबकि 50 से अधिक लोगों को रेस्क्यू ऑपरेशन करके सुरक्षित स्थानाें पर पहुंचा दिया गया था। बाढ़ के पानी का जलस्तर घटने के बाद जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली थी और लोगों ने भी लगा कि आफत टल गई लेकिन इस पानी के उतर जाने के बाद जो तस्वीर सामने आई है उसने सभी को चौंका कर रख दिया है। दरअसल 6 लाख क्यूसेक जाे पानी यमुना नदी में आया था उसने हथनी कुंड बैराज के बाएं बन्ध की सुरक्षात्मक सरंचना यानी स्पर और स्टड को क्षतिग्रस्त कर दिया और इसको काफी नुकसान पहुंचा दिया। अब यह आशंका जताई जा रही है कि यदि इस बन्ध की जल्द मरम्मत नहीं की गई ताे यह पानी काे बर्दाश्त नहीं कर पाएगा। एेसे में अगर एक बार फिर से पहाड़ों में बरसात हुई तो बन्ध और क्षतिग्रस्त हाेगा आैर टूट भी सकता है। यदि बन्ध टूटा ताे यमुना का सारा पानी सहारनपुर में घुस जाएगा और ऐसे में सहारनपुर में बाढ़ जैसे हालात हो जाएंगे जिससे काफी जान माल का नुकसान भी हो सकता है।
2.65 किलोमीटर लंबा है यह बन्ध
हथनी कुंड बैराज पर दो बन्ध हैं। इनमें से एक बाएं आैर दूसरा दाएं है। इन्हे एलपी यानि लेफ्ट बन्ध और आरपी यानि राईट बन्ध कहा जाता है। लेफ्ट प्रोटेक्शन बन्ध का देखरेख उत्तर प्रदेश सिचाईं विभाग द्वारा और राइट बन्ध की देखरेख हरियाणा सिंचाई विभाग द्वारा किया जाता है। अब सीधे शब्दों में इस प्रक्रिया को इस तरह समझा जा सकता है कि अगर लेफ्ट प्रोटेक्शन बंधा टूट जाए तो पानी यमुना नदी में प्रवाहित ना होकर सीधे सहारनपुर के घाड़ क्षेत्र वाले इलाकों में पहुंच जाएगा ऐसे में आप सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि अगर सहारनपुर के घाड़ क्षेत्र में 600000 क्यूसेक पानी लगातार 1 दिन चल जाए तो पूरा सहारनपुर जलमग्न हो सकता है और यहां बाढ़ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।
मिट्टी का है पूरा बंधा
करीब 2.65 किलोमीटर का यह बंध मिट्टी का है। मिट्टी भराव से इसको बनाया जाता है और पानी की तीव्र धारा इस मिट्टी की ढांग को बहा ना दे इसके लिए पत्थर और कंक्रीट ब्लॉक का एक ढांचा किनारों पर बनाया जाता है, जिसको स्टड व स्पर कहते हैं। यह मजबूत ताे हाेता है लेकिन जब 6 लाख क्यूसेक पानी आया तो यह ढांचा क्षतिग्रस्त होकर टूट गया है और उसकी तस्वीरें आप देख सकते हैं।
क्या कहते हैं अफसर
इस संदर्भ में जब सिंचाई विभाग के अफसरों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस बारे में शासन को और उच्च अधिकारियाें काे सूचित कर दिया गया है। एलपी बन्ध के मरम्मत के लिए कार्ययाेजना तैयार कर ली गई है। इस बंध की देखरेख में लगे सिंचाई विभाग के एसडीआे संजीव वर्मा ने भी पानी से बंध काे भारी नुकसान पहुंचने की पुष्टी की है।
Updated on:
18 Aug 2018 10:52 pm
Published on:
18 Aug 2018 05:38 pm
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