1 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

इसी महाराणा प्रताप भवन को लेकर बार-बार बिगड़ते हैं सहारनपुर में हालात

दो वर्षों से महाराणा प्रताप भवन में नहीं मनाई जा पा रही है जयंती
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

सहारनपुर

•

image

Iftekhar Ahmed

•

Updated: 10 May 2018, 7:45 PM IST

saharanpur

सहारनपुर. सहारनपुर एक बार फिर से जातीय हिंसा की आग में जलते जलते बचा है। पिछले वर्ष महाराणा प्रताप जयंती को लेकर हुए विवाद के बाद सहारनपुर में जातीय हिंसा की चिंगारी भड़क उठी थी। इस आग में पूरा सहारनपुर जल उठा था। शब्बीरपुर से लेकर रामनगर तक सहारनपुर जातीय हिंसा की आग में जल उठा था। एक बार फिर सहारनपुर में जातीय हिंसा की चिंगारी को भड़काने की कोशिश की गई और इस बार भी 9 मई को ही महाराणा प्रताप जयंती को लेकर यह मामला उठाया गया। दरअसल, ये सारा विवाद मणिपुर रोड स्थित महाराणा प्रताप भवन को लेकर है। यहां पिछले वर्ष 9 मई को इस भवन में आग लगा दी गई थी। दरअसल महाराणा प्रताप भवन से कुछ कदमों की दूरी पर ही रामनगर गांव है। यह गांव भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष कमल सिंह वालिया का है। सहारनपुर में दलित और क्षत्रिय समाज के बीच पैदा हुई भाई का कारण समझने के लिए हमें और थोड़ा पीछे जाना होगा। हम आपको गागलहेडी थाना क्षेत्र के गांव घड़कोली में लिए चलते हैं। यहां गांव में एक दलित युवकों की ओर से द ग्रेट चमार का बोर्ड लगाया गया और आरोप है कि इस बोर्ड को गांव के क्षत्रिय समाज के लोगों ने बर्दाश्त नहीं किया। इस बोर्ड पर कालिख पोत दी गई। सहारनपुर में भड़की जातीय हिंसा की चिंगारी इसी गंगोली गांव से उठी थी । इसके बाद यहां माहौल बेहद गर्म आ गया था। इसी गांव में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को भी नुकसान पहुंचाया गया था। उस समय दलित समाज के लोगों ने क्षत्रिय समाज के लोगों पर यह आरोप लगाया था कि उन्होंने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया है। इसके बाद वहां दोनों पक्षों में झगड़ा हो गया था। यहीं से यह आग भड़की ,जो बाद में शब्बीरपुर रामनगर और पूरे सहारनपुर में फैल गई।

भीम आर्मी भी घर कोहली की घटना के बाद ही प्रकाश में आई थी और तब से पहले इस संगठन को ज्यादा लोग नहीं जानते थे। इस बार भी विवाद महाराणा प्रताप जयंती को लेकर हुआ। भीम आर्मी के पदाधिकारी मालीपुर रोड स्थित महाराणा प्रताप भवन में महाराणा प्रताप जयंती की अनुमति दिए जाने का विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि अगर वहां महाराणा प्रताप जयंती मनाई जाने की अनुमति दी जाती है तो किसी भी तरह की अप्रिय घटना हो सकती है। दोपहर 12:00 बजे तक सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था भारी पुलिस बल तैनात था और महाराणा प्रताप भवन के अंदर महाराणा प्रताप जयंती मनाई जा रही थी इसी दौरान अचानक संदिग्ध हालातों में रामनगर गांव में भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष कमल वालिया के छोटे भाई संजीव वालिया को गोली लग जाती है और अस्पताल ले जाते हुए इसकी मौत हो जाती है। इस घटना के बाद भीम आर्मी का गुस्सा फूट पड़ता है और बड़ी संख्या में दलित समाज के लोग जिला अस्पताल पर इकट्ठा हो जाते हैं। जब पुलिस इनसे सब लेकर मोर्चरी में रखने की कोशिश करती है तो पुलिस पर इनका गुस्सा फूट पड़ता है और यह लोग सीधा आरोप लगाते हैं कि इतना पुलिस बल होने के बावजूद सचिन को गोली मार दी गई।

बड़ा खुलासाः फूलन देवी की हत्या का आरोपी शेर सिंह नहीं है भीम आर्मी नेता के भाई की मौत का जिम्मेदार

यहां दलित समाज के युवकों और पुलिस के बीच हाथापाई भी होती है और इसके बाद घंटों चले हंगामे और हाई वोल्टेज ड्रामे के बीच जब भीम आर्मी के पदाधिकारियों की ओर से एक ज्ञापन जिला प्रशासन को दिया जाता है तो उसमें 5000000 रुपए की आर्थिक सहायता एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी और आरोपियों की गिरफ्तारी के अलावा सहारनपुर के मलिकपुर रोड स्थित महाराणा प्रताप भवन में महाराणा प्रताप जयंती आगे से कभी भी ना मनाए जाने की डिमांड भी रखी जाती है और इस डिमांड को मुख्य रूप से उठाया जाता है यानी साफ है कि कहीं ना कहीं विवाद महाराणा प्रताप भवन और महाराणा प्रताप जयंती को लेकर है और दलित समाज यह नहीं चाहता कि मालीपुर रोड स्थित महाराणा प्रताप भवन में महाराणा प्रताप की जयंती मनाई जाने के लिए अनुमति दी जाए उधर क्षत्रिय समाज का भी साफ कहना है कि महाराणा प्रताप उनके पूर्वज हैं और उनके जयंती को हर हाल में मनाएंगे और क्षत्रिय समाज ने इस मामले को लेकर राजनीति भी करवा दी थी और जब क्षत्रिय समाज के लोगों को ऐसा लगने लगा था कि अब उन्हें महाराणा प्रताप जयंती मनाई जाने के लिए अनुमति नहीं मिलेगी तो उन्होंने साफ ऐलान कर दिया था कि अगर जयंती मनाई जाने की अनुमति नहीं मिली तो कैराना उप चुनाव का बहिष्कार कर दिया जाएगा।