
सहारनपुर/शिवमणि त्यागी. मुरारी बापू ने श्मशान में विवाह संस्कार कराए जाने की जो बात कही है, वह बेहद गलत है। सनातन धर्म में 16 संस्कार हैं आैर विवाह पांचवा संस्कार है। श्मशान में 16वा संस्कार हाेता है। एेसे में पांचवे संस्कार काे 16वें संस्कार के स्थान पर नहीं किया जा सकता। मुरारी बापू सत्ता आैर शक्ति के मद में हैं। उन्हाेंने जाे संवाद किया है वह बेहद निंदनीय है। उन्हें अपने इस संवाद के लिए माफी मांगनी चाहिए। यह बात बनारस से सहारनपुर पहुंचे राजगुरू मठ बनारस के दंडी स्वामी अनंतानन्द सरस्वती ने कही।
उन्हाेंने कहा कि अगर मुरारी बापू यह मान रहे हैं कि भारत गुरुओं का देश है और गुरु जो कहेंगे वही माना जाएगा तो मुरारी बापू को यह जान लेना चाहिए की महाभारत में गुरुओं ने ही अभद्रता की। पांडवों के विपक्ष में खड़ा हो गए। उन गुरुओं को क्या प्राप्त हुआ। यह सभी को पता है। बोले कि हम यह नहीं कहना चाहते कि कोई कानून को हाथ ले लें, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में संबंधों को विच्छेद किया जा सकता है और बहिष्कृत करना एक उत्तम व्यवहार हो सकता है। अगर किसी के व्यवहार हमें दुख पहुंचता है और हमें लगता है कि वह गलत कर रहे हैं और हम प्रतिशोध नहीं कर सकते तो मौन हो जाएं और वहां से हट जाएं, बहिष्कृत कर दें।
दरअसल, भारतीय समाज में चरित्र का बेहद महत्व है। एेसे में युवाआें के व्यक्तित्व काे चरित्रवान बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय त्यागी युवा संघ की आेर से लाेकबंधु राजनारायण की जन शताब्दी मनाई जा रही है। इसी क्रम में चल रही संदेश यात्रा के दाैरान स्वामी अनंतानंद सरस्वती हरिद्वार से संवाद आैर गाेष्ठियाें का आयाेजन करते हुए वापस लाैटते समय सहारनपुर पहुंचे थे। यहां प्रदुमन नगर में दंडी स्वामी बिजेंद्र त्यागी के आवास पर युवाआें से संवाद कर रहे थे। इसी दाैरान पत्रकाराें से वार्ता करते हुए उन्हाेंने मुरारी बापू पर यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि मुरारी बापू वर्तमान में सत्ता और शक्ति के मध में हैं और वह ऐसे में सनातन धर्म को अपने अनुसार चलाना चाहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता। बाेले कि उनके दादा जी बहुत बड़े संत थे। उन्हें अपने दादाजी का भी ध्यान रखना चाहिए और यह समझना चाहिए कि वह बेहद विद्वान परिवार जुड़े हैं।
उन्हें अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए और अगर वह अपनी गलती नहीं स्वीकार करेंगे तो सनातन धर्म बहुत बड़ा धर्म है। इतिहास गवाह है कुछ लोगों ने खुद को भगवान नाम दे दिया। अपने नाम से रामायण चलवा दी कुछ लोगों ने अपने आप को परम ब्रम्ह कह दिया, लेकिन आप देख सकते हैं कि आज वह सभी लोग एकांतवास में हैं।
युवाआें काे संदेश देते हुए उन्हाेंने कहा कि भारतीय समाज में चरित्र की बहुत महत्वता है। बाेले कि लोकबंधु राजनारायण जी ब्राह्मण दर्शन के साक्षात प्रतिमूर्ति थे। ब्राह्मण को कैसा होना चाहिए, ब्राह्मण की शुचिता का क्या तात्पर्य है। उन्होंने उसे जिया और आज समाज के संततत्व की जो परिभाषा है, उसे भी राज नारायण जी ने बहुत बखूबी अपने समय में निर्भयता के साथ समाज के सम्मुख चरित्र के माध्यम से रखा। उन्होंने कहा कि राजनारायण का चरित्र ऐसा था कि राजनीति में रहते हुए भी उन्होंने सुचिता को बनाए रखा। वर्तमान समय में समाज काे यह साेचना चाहिए आैर प्रयास करना चाहिए कि कैसे युवाओं के बीच वह विचारधारा पहुंचे। युवाओं को लोकबंधु राजनारायण के चरित्र से सीख लेनी चाहिए और अपने जीवन में उनके चरित्र को उतारना चाहिए। इस मौके पर बिजेंदर त्यागी, राष्ट्रीय त्यागी युवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष त्यागी संगठन मंत्री संदीप त्यागी नारनागपुर, प्रदेश प्रवक्ता मनोज त्यागी, मनीष त्यागी रवि त्यागी निखिल त्यागी अखिल त्याग, राहुल त्यागी सुनील त्यागी, सहदेव त्यागी आदि मौजूद रहे।
Published on:
09 Dec 2017 04:15 pm
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