
शहीद-ए-आजम भगत सिंह की इंटरनेट से ली गई फोटो
आज हम सब आजाद भारत ( Independence Bharat ) में सांस ले रहे हैं लेकिन यह आजादी यूं ही नहीं मिली। इस आजादी ( Independence Day ) के लिए हजारों-लाखों भारतवासियों को अपनी जान गंवानी पड़ी और बहरी अंग्रेजी हुकूमत के कानों तक अपनी आजादी की दीवानगी की बात पहुंचाने के लिए बम तक फोड़ने पड़े। अंग्रेजी असेंबली में जो बम फोड़ा गया था वो सहारनपुर में बना था। बहुत कम लोग जानते हैं कि शहीद-ए-आजम भगत सिंह ने सहारनपुर में बम फैक्ट्री लगाई थी। शहीद-ए-आज़म आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे तो वो सहारनपुर से पंजाब चले गए थे। इस दौरान उनके साथी शिव वर्मा, गया प्रसाद और जयदेव कपूर ने अपने चौथे साथी ठाकुर मुकुंद सिंह के साथ मिलकर सहारनपुर के पुरानी मंडी के मोहल्ला चौक में एक बम फैक्ट्री लगाई थी। इस बम फैक्ट्री को दो मंजिला मकान में चलाया जा रहा था। मकान के निचले हिस्से में दवाखाना था और ऊपर बम बनाए जाते थे।
मोहल्ला चौक फरोशान में चल रही इस बम फैक्ट्री के बारे में किसी भारतीय ने ही अंग्रेजी हुकूमत को खबर कर दी थी। इस सूचना पर जब अंग्रेजी पुलिस ने रात के समय छापा मारा तो उस समय क्रांतिकारी डॉक्टर गया प्रसाद और शिव वर्मा फैक्ट्री के अंदर ही मौजूद थे। पुलिस ने इन्हे पकड़ लिया लेकिन बाहर नहीं आई। ऐसा दिखाया गया जैसे कुछ भी ना हुआ हो और पुलिस की एक टुकड़ी ने इसी मकान के अंदर कैंप किया। 24 घंटे तक कोई हलचल नहीं हुआ तो कैंप खत्म करने पर विचार हुआ लेकिन अंग्रेजी अफसर ने एक रात और चुप-चाप वहीं रुकने का फरमान सुना दिया। इसके बाद रात में जयदेव कपूर वहां पहुंचे तो उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया।
यह घटना 1930 की है। बाद में पुलिस ने इनके चौथे साथी ठाकुर मुकुंद सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया था। यह सभी क्रांतिकारी शहीद-ए-आजम भगत सिंह के साथी थे। बताया जाता है कि भगत सिंह ने इस फैक्ट्री को बनाने का नीव रखी थी और फिर आंदोलन को बढ़ाने के लिए पंजाब चले गए थे। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ वीरेंद्र आजम बताते हैं कि शहीद-ए-आजम भगत सिंह का सहारनपुर से गहरा नाता है। उनका परिवार आज भी यहां प्रद्युमन नगर में रहता है। उनके भतीजे यहां रहते हैं। शहीद ए आजम भगत सिंह ने सहारनपुर के फुलवारी आश्रम में रहकर भी काफी समय बिताया था। उस समय अंग्रेजी हुकूमत उन्हें तलाश रही थी। वीरेंद्र आजम बताते हैं कि उस समय क्रांतिकारी जो बम बनाते थे वो बम किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि अंग्रेजी हुकूमत के बहरों कानों तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए बनाए जाते थे।
Updated on:
15 Aug 2024 10:20 pm
Published on:
15 Aug 2024 09:32 pm

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