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ब्रेकिंगः यूपी के इस जिले में लिया ”जलपरि” ने जन्म, डॉक्टर भी हैरान

डॉक्टराें के मुताबिक भारत में यह दूसरा मामला

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सहारनपुर। शिवमणि त्यागी

नकुड़ क्षेत्र के गांव की एक महिला ने जिला अस्पताल में जलपरि जैसे बच्चे काे जन्म दिया। पहली बार इस बच्चे काे देखकर चिकित्सक भी हैरान रह गए। यह खबर जैसे ही महिला अस्पताल में फैली ताे हर काेई इस बच्चे की एक झलक देखने के लिए ललायित हाे गया लेकिन जन्म हाेने के कुछ ही देर बाद इस बच्चे ने दम ताेड़ दिया। बच्चे की माैत के बाद से मां सदमें है। विशेषज्ञाें के मुताबिक भारत में यह दूसरा मामला है इससे पहले हैदराबाद में एेसे बच्चे ने जन्म लिया था।

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नॉर्मल डिलीवरी से हुआ जन्म

नकुड़ थाना क्षेत्र के गांव खारीबांस का एक परिवार प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला काे लेकर जिला महिला अस्पताल पहुंचा। यहां चिकित्सकाें ने महिला की हालत काे देखते हुए अॉपरेशन किए जाने की बात कही लेकिन इसी दाैरान जिला महिला अस्पताल की वरिष्ठ महिला चिकित्सक ममता साेठी ने इस केस काे अपने हाथ में लेते हुए नॉर्मल डिलीवरी करने की बात कही। डा. ममता साेढी के ही मुताबिक महिला ने एक एेसे बच्चे काे जन्म दिया जिसके दाेनाें पैर आपस में जुड़े हुए थे आैर इनका नीचे से पैराें का आकार मछली की पूछ जैसा बना हुआ था। यह बच्चा जन्म लेने के बाद अधिक समय तक जिंदा नहीं रह सका आैर इसने दम ताेड़ दिया।

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भारत में यह दूसरा मामला

जिला अस्पताल के चिकित्सकाें के मुताबिक भारत में यह अभी दूसरा मामला है। इससे पहले हैदराबाद में एक एेसे बच्चे का जन्म हुआ था। हैदराबाद के बाद कभी इस तरह के बच्चे के जन्म लिए जाने की बात सामने आई है। अब सहारनपुर में के महिला अस्पताल में इस बच्चे ने जन्म लिया आैर जन्म लेने के कुछ ही देर बाद इसकी माैत हाे गई।

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मरमेड बेबी कहलाते हैं एेसे बच्चे

इस तरह के बच्चाें काे मरमेड बेबी भी कहा जाता है। एेसे बच्चे ज्यादा समय तक जिंदा नहीं रह पाते। इसका एक कारण यह हाेता है कि इन बच्चाें काे शारीर का पूरा विकास नहीं हाे पाता आैर इनके शरीर में पूरे अंग भी नहीं हाेते। विशेषज्ञाें के मुताबिक एेसे बच्चाें में कई बार लीवर, हार्ट, किडनी जैसे जीवन के लिए जरूरी वाले अंग भी पूरी तरह से विकसित नहीं हाे पाते। अगर हम महिला अस्पताल में जन्मे इस बच्चे की बात करें ताे चिकित्सकाें के मुताबिक इस बच्चे के लैट्रीन का रास्ता नहीं था आैर इसके दाेनाें पैर किसी मछली की तरह ही जुड़े हुए थे। एेसे में जब तक इस बच्चे काे गर्भ में आहार नाल से स्वांस आैर भाेजन आदि मिल रहा था तब तक यह गर्भ में जीवित रहा आैर गर्भ से बाहर आने के कुछ ही देर बाद इसकी माैत हाे गई।

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