खबर की खास बातें सिर्फ अधिकारी ही नहीं बल्कि पर्यावरण प्रहरी भी हैं संजय कुमार महज एक घंटे में बनवाया पाैधाराेपण का विश्व रिकार्ड दक्षिणी ध्रुव जाने पहली महिला हैं संजय कुमार की पत्नी अर्पणा
सहारनपुर। वाे अधिकारी भी हैं और पर्यावरण प्रहरी भी। वाे खाेजकर्ता भी हैं और वाइल्ड लाइफ फाेटाेग्राफर भी। वाे प्रकृति काे जिस नजरिए से देखते हैं उसी नजरिए से दुनिया के सामने लाने का प्रयास भी करते हैं। अगर उनकी बाताें काे सुना जाए ताे प्रकृति काे समझा जा सकता है, अगर उनकी बाताें पर अमल कर लिया जाए ताे प्रकृति काे बचाया जा सकता है।
हम बात कर रहे हैं सहारनपुर कमिश्नर संजय कुमार की। वर्ष 2002 बैच के IAS अफसर संजय कुमार का जन्म बिहार राज्य में हुआ। अभी तक संजय कुमार लखनऊ, जाैनपुर, बलरामपुर, सुल्तानपुर, लखनऊ, अमराेहा, सीतापुर, गाैरखपुर, मुरादाबाद, लखनऊ, बरेली, साेनभद्र, प्रयागराज में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
हाल ही में उनके प्रयासाें से सहारनपुर ने पाैधाराेपण में इतिहास रचा है। यहां हिंडन नदीं के किनारे एक ही दिन में 54 हजार पाैधे लगाए गए, जाे एक यह विश्व रिकार्ड है। अब सहारनपुर का नाम इसी रिकार्ड से गिनीज बुक में दर्ज हाेगा। कमिश्नर सहारनपुर अब हिंडन नदीं काे सरंक्षित करने के लिए इस नदीं के दाेनाें ओर पाैधारोपण कराने की याेजना बना रहे हैं। हिंडन नदीं करीब 125 किलाेमीटर सहारनपुर मंडल से गुजरती है और अब इस 125 किलाेमीटर में हिंडन के दाेनाें किनारों पर पाैधाराेपण किया जाएगा।
वाइल्ड लाइफ फाेटाेग्राफरी का है शाैंक
सहारनपुर कमिश्रनर संजय सिंह काे वाइल्ड लाइफ फाेटाेग्राफरी का शाैंक है। अपने इस शाैंक काे उन्हाेंने प्रकृति के प्रेम करने का जरिया बनाया है। आपकाे यह जानकर हैरानी हाेगी कि संजय कुमार प्रकृति या वन्य जीवाें का एक प्राकृतिक फाेटाे लेने के लिए घंटाे-घंटाें एक ही पॉजिशन में रह सकते हैं। उन्हाेंने वाइल्ड लाइफ फाेटाेग्राफी में कई आयाम स्थापित किए हैं। उनकी जहां भी पाेस्टिंग हाेती है वहीं लाेग प्रकृति काे समझने लगते हैं और उस जिले में उस मंडल में पर्यावरण काे बचाने के प्रयास तेज हाे जाते हैं, प्रकृति के लिए जागरूकता प्राेग्राम हाेने लगते हैं।
पर्यावरण मित्र सीड फ्लैग लेकर आए कमिश्नर
सहारनपुर मंडलायुक्त संजय कुमार ने इस स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त काे सभी स्कूलाें सरकारी दफ्तराें और सार्वजनिक स्थानाें पर सीड फ्लैग ( बीज वाले झंडे) वितरण कराया। इस फ्लैग झंडे की खास बात यह है कि यह पर्यावरण का मित्र है। इस्तेमाल करने के बाद इस झंडे (Flag) काे क्यारी या खेत में डालने से तुलसी और गेंदे (फूल वाला पाैधा) का पाैधा उगता है। इस फ्लैग का कागज भी इस तरह से बनाया गया कि यह मिट्टी के संपर्क में आते ही गल जाता है नष्ट हाे जाता है।
प्रकृति के प्रति स्नेह, प्रकृति काे बचाए रखने की इच्छा और पर्यावरण से प्रेम करने का इससे अच्छा उदाहरण नहीं मिल सकता है। महज एक घंटे में पाैधाराेपण का विश्व रिकार्ड और सीड फ्लैग का इस्तेमाल हमे यह सीख देता है कि अगर मन में थाेड़ी सी भी इच्छा हाे ताे उसे शक्ति दी जा सकती है और इच्छा शक्ति हमे प्रकृति काे समझने उसे प्यार करने और उसका सरंक्षण करना सिखाती है।
यह भी जनिए
संजय कुमार की पत्नी आईपीएस अर्पणा कुमार दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाली पहली आईपीएस महिला अधिकारी हैं। उन्हाेंने बर्फ पर करीब 111 मील का दुर्गम सफर 35 किलाेग्राम बर्फ के साथ पूरा किया है। अपर्णा कुमार विश्व के छह महाद्वीपाें के शीर्ष पर स्थित छह पर्वत चाेटियाें काे फतेह कर चुकी हैं। वर्तमान में वह भारत-तिब्बत सीमा पर (आईटीबीपी) के डीआईजी पद पर तैनात हैं।
क्या कहते हैं संजय कुमार
कमिश्रनर संजय कुमार का कहना है कि युवा पीढ़ी काे प्रकृति काे समझना चाहिए। उन्हाेंने सभी से आह्वान किया कि अपने राेजमर्रा के कार्याें काे पूरा करते हुए 24 घंटे में एक घंटा हर व्यक्ति महिला और पुरुष काे मंथन के लिए निकालना चाहिए। साेचने के लिए निकालना चाहिए। साेचने से ही साेच विकसित हाेती है और जब हम प्रकृति के बारे में या किसी भी अच्छे कार्य के बारे में साेचंगे ताे हम अच्छे कार्य भी जरूर करेंगे। उन्हाेंने आह्वान किया है कि सभी काे हर वर्ष के अपने परिवार के सदस्याें के नाम एक-एक पाैधा जरूर लगाना चाहिए।