वर्ष 2011 में Saharanpur की धोलाकुंआ चेकपोस्ट पर तैनात सिपाही बलबीर सिंह martyr constable पर कग्गा गैंग ने आधुनिक हथियारों से हमला बोल दिया था। उस दौरान यूपी पुलिस UP Police की राइफल से गोली ही नहीं चल पाई थी।
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था ठीक उसी समय सहारनपुर पुलिस लाइन में महौल गमगीन हो गया। दरअसल यहां वर्ष 2011 में शहीद हुए सिपाही बलबीर सिंह martyr constable Balbir Singh of UP Police को श्रद्धासुमन अर्पित किए जा रहे थे। इसी दौरान पुरानी बातें याद करके बलबीर सिंह की पत्नी और बेटी की आखें भर आई। ये पल बेहद मार्मिक थे।
इन पलों को कैमरे में रिकार्ड करना हमारे लिए भी मुश्किल भरा था लेकिन अगर ऐसा नहीं करते तो आप तक हम ये संवेदनाएं शायद ठीक ढंग से नहीं पहुंचा पाते। इसलिए हमने ऐसे हालातों में भी अपने कैमरे को चालू रखा और वो सभी पल रिकार्ड कर लिए जब बलबीर सिंह का परिवार 14 अगस्त 2011 की रात को याद करके रो-पड़ा। बलबीर सिंह के बेटे ने बताया कि उस रात उनके पिता धोलाकुंआ चेकपोस्ट पर तैनात थे। यहां खनन की रॉयल्टी जमा होती थी। उस समय कग्गा गैंग सहारनपुर में सक्रिय था। कग्गा गैंग ने रात में उनके पिता और अन्य पुलिसकर्मियों पर हमला बोल दिया।
ड्यूटी पर तैनात बलबीर सिंह और उनके साथियों के पास पुलिस की 'थ्रीनोटथ्री' राइफल थी। बताया जाता है कि ये राइफल चल ही नहीं पाई। राइफल नहीं चलने की वजह से साथी पुलिसकर्मी बलबीर सिंह को बैकअप नहीं दे पाए। आमने-सामने की भिड़ंत में बलबीर सिंह को तीन गोलियां लगी और वो शहीद हो गए। एक जिम्मेदार मीडिया संस्थान होने के नाते हम भी यूपी पुलिस के उस सिपाही को सैल्यूट करते हैं जिन्होंने अपने प्राण देकर बदमाशों का सामना किया और उन्हे उनके मंसूबों में कामयाब नहीं होने दिया। उस समय बलबीर सिंह ने अपने प्राण देकर बदमाशों की रॉयल्टी की रकम लूटने की मंशा को तो कामयाब नहीं होने दिया लेकिन बदमाश पुलिस की राइफल लूट ले गए थे।
मंगलवार 15 अगस्त को जब पुलिस लाइन में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अलग-अलग क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले पुलिसकर्मियों को सम्मानित कर रहे थे तो अपने प्राण देकर ड्यूटी निभाने वाले शहीद बलबीर सिंह को भी श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। यही वह पल था जब यहां महौल गमगीन हो गया। इन पलों ने यहां मौजूक सभी पुलिसकर्मियों के ह्दय को झकझोर दिया।