
गंगनहर में कूदने से पहले सौरभ ने पत्नी के साथ ली अंतिम फोटो
पत्नी के साथ गंगनहर में कूदकर आत्महत्या ( Suicide ) करने वाले सहारनपुर के सर्राफ सौरफ बब्बर की पत्नी मोना की लाश तीन दिन बाद भी नहीं मिली। हरिद्वार ( Haridwar ) से रुड़की तक गंगनहर में मोना की तलाश की जा रही है लेकिन कोई सुराग नहीं मिल रहा। परिवार ने सौरभ की तेहरवी कर दी है। अब ये बात सामने आ रही है कि सौरभ पर 100 से अधिक लोगों का करीब दस करोड़ रुपये का कर्ज हो गया था। इसने 11 अगस्त को कई लोगों को पैसा वापस करने का वादा किया था और जब पैसों का इंतजाम नहीं कर पाया तो 12 अगस्त को पत्नी के साथ गंगनहर में कूदकर आत्महत्या कर ली।
11 अगस्त को सौरभ नई बाइक पर पत्नी के साथ ( Saharanpur ) सहारनपुर से हरिद्वार पहुंचा और गंगानहर के किनारे खड़े होकर सेल्फी लेने के बाद एक वॉयस नोट बनाया। इसमें उसने कहा कि हम दोनों गंगनहर में छलांग लगाकर आत्महत्या करने जा रहे हैं। इसके बाद गंगनहर से सौरभ की लाश मिली लेकिन पत्नी का अभी तक पता नहीं चल सका। अब इस पूरे मामले का दुबई ( Dubai ) कनेक्शन सामने आया है। रिश्तेदारों का कहना है कि सौरभ ने अपनी एक ( Gold ) गोल्ड कमेटी में करीब 100 लोगों को जोड़ रखा था। इन सभी का पैसा उसने सहारनपुर के एक बड़े सर्राफ को इनवेस्ट किया था। इस सर्राफ से सौरभ को 6 से 7 करोड़ रुपये का सोना लेना था। धीरे-धीरे सौरभ इस कारोबारी के पास पैसा जमा करता गया। बताया जा रहा है कि, करीब 20 दिन पहले इस कारोबारी का बेटा भारत ( Bharat ) छोड़कर दुबई चला गया। इस तरह सौरभ के करीब सात करोड़ रुपये डूब गए। रिश्तेदारों का कहना है कि जब सौरभ ने पैसा वापस देने के लिए कहा तो कारोबारी ने मना कर दिया। इससे सौरभ टेंशन में आ गया और जैसे ही ये बात गोल्ड कमेटी के मेम्बर्स को पता चली तो उन्होंने सौरभ पर दबाव बढ़ा दिया। इस दबाव को सौरभ और उसकी पत्नी झेल नहीं पाए और हरिद्वार जाकर आत्महत्या कर ली।
सौरभ और उसकी पत्नी ने 11 अगस्त को ही आत्महत्या करने का मन बना लिया था। दोनों नई बाइक पर अपने दोनों बच्चों 12 वर्षीय श्रद्धा और 8 वर्षीय संयम को साथ लेकर निकले लेकिन रास्ते में दोनों बच्चों को उनकी नानी के घर छोड़ दिया। दोनों से अलग-अलग कहा कि भैया का ध्यान रखना और बहन का ख्याल रखना। फिर दोनों ने बच्चों को अंतिम बार ढेर सारा प्यार किया। दोनों के माथे चूमे और ये कहकर निकल गए किए एक दो दिन में वापस आ जाएंगे। अब बच्चों को भी समझ आ गया है कि उनके माता-पिता कभी वापस नहीं आएंगे।
सौरभ के पिता देशराज बब्बर अब रो भी नहीं पा रहे, शायद दो दिन से लगातार रोते-रोते उनके आंखों का पानी भी सूख चुका है। अब अपने मन को समझाते हुए से दिखते हैं। देशराज बब्बर का कहना है कि बेटे की अंतिम इच्छा पूरी करूंगा। सौरभ ने जो सुसाइड नोट छोड़ा है उसने लिखा है कि, 'किसी पर भरोसा नहीं रहा, हमारे मरने के बाद हमारे दोनों बच्चे नाना-नानी के पास रहेंगे, सौरभ की यही इच्छा थी कि दोनों बच्चाें का लालन-पोषण नानी करे। अब इन बच्चों के दादा रो-रोकर यही कह रहे हैं कि बेटे की आखिरी इच्छा को पूरा करेंगे। सौरभ की ससुराल ज्यादा दूर नहीं है जब बच्चों से मिलने का मन हुआ करेगा तो जाकर देख लिया करेंगे।
सौरभ और उसकी पत्नी ने जो कदम उठाया वह बेहद दुखद है लेकिन इस पूरी घटना का एक पहलू ये भी है कि सौरभ और उसकी पत्नी के साथ सहारनपुर के कई परिवारों की मेहनत और सपने भी डूब गए। सौरभ पर करीब 10 करोड़ रुपये कर्ज था। यह सारा पैसा सहारनपुर के ही परिवारों का बताया जाता है। कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने अपने जीवन की कमाई का बड़ा हिस्सा सौरभ को दे दिया था। अब इन परिवारों के सामने भी संकट खड़ा हो गया है। इन लोगों का यही कहना है कि आत्महत्या कोई हल नहीं है सौरभ अपने साथ हमें भी डूबो गया।
Published on:
15 Aug 2024 06:34 am

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