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सनातन परंपरा संग सामाजिक बदलाव: संभल के कल्कि धाम में जाति बंधन तोड़कर हुई शादी बनी मिसाल

Sambhal News: संभल के श्रीकल्कि धाम में पंजाबी युवक और बुक्सा जनजाति की युवती ने जाति बंधनों को तोड़ते हुए वैदिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह किया।

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सम्भल

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Mohd Danish

Apr 26, 2026

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सनातन परंपरा संग सामाजिक बदलाव..

Intercaste Marriage Sambhal: संभल के श्रीकल्कि धाम में एक ऐसा विवाह संपन्न हुआ जिसने न केवल दो दिलों को जोड़ा, बल्कि समाज में बदलाव का संदेश भी दिया। वैदिक मंत्रोच्चारण और रामायण की चौपाइयों के बीच आयोजित इस विवाह में उत्तराखंड के रहने वाले वर-वधू ने जाति बंधनों को तोड़ते हुए पूरे सनातन रीति-रिवाज के साथ पाणिग्रहण संस्कार किया। इस अनोखे आयोजन को सामाजिक समरसता और सनातन एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

कल्कि धाम में सादगी और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ विवाह

यह विवाह जनपद संभल के थाना ऐंचौड़ा कम्बोह क्षेत्र स्थित श्रीकल्कि धाम में आयोजित किया गया। काशीपुर निवासी संजय खन्ना के पुत्र ऋषभ खन्ना और रामनगर (नैनीताल) निवासी मंगल सिंह की पुत्री माही ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए। इस विवाह की सबसे खास बात यह रही कि वर पंजाबी समाज से संबंध रखते हैं, जबकि वधू उत्तराखंड की बुक्सा जनजाति से हैं, जिससे यह शादी सामाजिक विविधता का प्रतीक बन गई।

प्रधानमंत्री की आधारशिला स्थल बना विवाह का केंद्र

दोनों परिवारों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना आदर्श मानते हुए एक विशेष निर्णय लिया। उन्होंने 19 फरवरी 2024 को रखी गई श्रीकल्कि धाम की आधारशिला के सामने ही विवाह संपन्न कराने का संकल्प लिया। उसी पवित्र स्थान पर, जहां प्रधानमंत्री ने हवन में आहुति दी थी, रामायण की चौपाइयों के बीच विवाह संस्कार पूरे किए गए, जिससे इस आयोजन का आध्यात्मिक महत्व और बढ़ गया।

आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने नवदंपती को दिया आशीर्वाद

श्रीकल्कि पीठाधीश्वर श्रीमद् जगद्गुरु आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने नवदंपती को आशीर्वाद देते हुए इस विवाह को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि कल्कि धाम का निर्माण कार्य जारी है और इस प्रकार के विवाह रूढ़िवादी सोच को तोड़ते हुए समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं। यह आयोजन दर्शाता है कि नई पीढ़ी परंपराओं के साथ-साथ सामाजिक समरसता को भी महत्व दे रही है।

परिवार की इच्छा बनी ऐतिहासिक पल की वजह

वर पक्ष के संजय खन्ना ने बताया कि उनकी लंबे समय से इच्छा थी कि उनके पुत्र का विवाह उसी स्थान पर हो, जहां प्रधानमंत्री ने कल्कि धाम की आधारशिला रखी थी। आचार्य प्रमोद कृष्णम् के आशीर्वाद से यह इच्छा पूरी हो सकी। विवाह की सभी रस्में उसी हवन कुंड के पास सम्पन्न की गईं, जहां शिलान्यास के दौरान आहुति दी गई थी, जिससे यह आयोजन परिवार के लिए बेहद खास बन गया।

यादगार पलों के साथ संपन्न हुआ कार्यक्रम

पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक संदेश का अद्भुत संगम देखने को मिला। शनिवार देर रात विवाह समारोह के बाद सभी मेहमानों को यादगार पलों के साथ विदा किया गया। यह अनोखा विवाह न केवल परिवारों के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है।