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यूपी में न्याय की रफ्तार बनी मिसाल: 20 मिनट में तय हुआ गुनहगारों का अंजाम, गैंगरेप केस में 8 दिन में आया फैसला

BNS Law Fast Justice: यूपी के संभल में सामूहिक दुष्कर्म मामले में अदालत ने बीएनएस कानून के तहत सिर्फ 8 दिनों में ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

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सम्भल

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Mohd Danish

Jan 21, 2026

up sambhal gangrape case 8 days verdict

यूपी में न्याय की रफ्तार बनी मिसाल | Image Source - Freepik

UP Gangrape Case Verdict: यूपी के संभल जिले के चंदौसी जिला न्यायालय ने सामूहिक दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में महज आठ दिनों के भीतर ऐतिहासिक फैसला सुनाकर न्यायिक प्रक्रिया की तेज़ी का उदाहरण पेश किया है। यह फैसला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत प्रदेश में अब तक का सबसे कम समय में दिया गया निर्णय माना जा रहा है। न्यायालय ने केवल 20 मिनट में दोषियों की सजा तय कर दी, जिससे न केवल पीड़ित परिवार को राहत मिली बल्कि कानून व्यवस्था पर लोगों का भरोसा और मजबूत हुआ।

89 दिन की विवेचना और मजबूत साक्ष्यों की कहानी

इस प्रकरण की जांच उपनिरीक्षक संतोष कुमार द्वारा की गई, जिन्होंने बताया कि 16 अक्टूबर 2015 को एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले की विवेचना शुरू की गई थी। करीब 89 दिनों तक चली इस जांच में कई तकनीकी और व्यावहारिक चुनौतियां सामने आईं। आरोपित अपने मोबाइल फोन बंद रखते थे और केवल व्हाट्सएप के जरिए संपर्क में रहते थे, जिससे उनकी लोकेशन ट्रेस करना कठिन हो गया। इसके बावजूद पुलिस टीम ने लगातार प्रयास कर 20 नवंबर को दोनों आरोपितों को गिरफ्तार किया और आगे की कार्रवाई तेज़ी से आगे बढ़ाई।

50 पन्नों की चार्जशीट और 10 गवाहों की अहम भूमिका

जांच पूरी होने के बाद 12 जनवरी को न्यायालय में लगभग 50 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की गई। इस मामले में छह सार्वजनिक गवाहों सहित कुल दस लोगों की गवाही दर्ज की गई। गवाहों के बयान और तकनीकी साक्ष्यों ने केस को मजबूती दी, जिससे अदालत के सामने तथ्य स्पष्ट रूप से प्रस्तुत हो सके। विशेष लोक अभियोजक आदित्य सिंह ने इसे बीएनएस कानून के तहत प्रदेश में सबसे तेज़ और निर्णायक मामलों में से एक बताया।

20 मिनट में सुनाया गया फैसला बना मिसाल

मंगलवार को न्यायालय ने महज 20 मिनट की सुनवाई के बाद दोषियों को सजा सुनाकर इतिहास रच दिया। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अवधेश कुमार ने बीएनएस की धाराओं के तहत यह दूसरा बड़ा फैसला सुनाया। इससे पहले भी उन्होंने बहजोई थाना क्षेत्र के एक मामले में चार्जशीट दाखिल होने के सात दिन के भीतर ही आरोपी सोनू को दस साल की सजा और 23 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया था।

पीड़ित परिवार की भावुक प्रतिक्रिया

चंदौसी में खेती-किसानी कर जीवन यापन करने वाले पीड़ित परिवार के लिए यह फैसला भावनात्मक क्षण लेकर आया। बेटी के साथ हुए जघन्य अपराध के बाद उन्होंने न्याय के लिए लंबा संघर्ष किया। जैसे ही अदालत ने सजा सुनाई, परिवार के सदस्य भावुक हो गए और कहा कि अब उन्हें सही मायनों में न्याय मिला है।

पुलिस की मजबूत पैरवी

संभल के एसपी केके बिश्नोई ने कहा कि अपराधियों के खिलाफ पुलिस लगातार मजबूत पैरवी कर रही है। विवेचना के दौरान ठोस साक्ष्यों के साथ चार्जशीट दाखिल की जाती है, जिसका नतीजा है कि मामलों में तेजी से फैसले सामने आ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के निर्णय समाज को साफ संदेश देते हैं कि अपराध करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।