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Bitiya@Work: बेटियों ने ऑफिस आकर समझी वर्किंग, बोलीं- हमें हुआ जिम्मेदारी का अहसास

पत्रिका की पहल पर बेटियों को कार्यस्थल लेकर पहुंचे मां-बाप, शेयर किए एक्सपीरियंस

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bitiya at work in IG office rewa madhya pradesh

bitiya at work in IG office rewa madhya pradesh

रीवा। जरूरी नहीं कि रोशनी चिरागों से ही हो बेटियां भी घर में उजाला करती हैं। यह सौ फीसदी सच है। बेटियां घर और परिवार के साथ समाज का भी गहना हैं। देश व समाज में इनका महत्व न कभी कम रहा है और न ही रहेगा। बदलते समय के साथ बेटियां और तेजी के साथ आगे बढ़ी हैं। वे हर क्षेत्र में अपने झंडे बुलंद कर रही हैं। राजनीति से लेकर सेना तक अपना परचम लहराने वाली बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि वह सब कुछ करने की क्षमता रखती हैं। फाइटर प्लेन उड़ाने वाली पहली महिला पायलट बनी रीवा की अवनि.. बेटियों के बढ़ते कदम की ही बानगी हैं।

आज स्कूल और कॉलेज में पढ़ रहीं बेटियां भी इसी तरह आगे चलकर देश व समाज में नई रोशनी बिखेरेंगी। बेटियों के हौसले को सलाम करते हुए डॉटर्स -डे के उपलक्ष्य में पत्रिका समूह की ओर से बिटिया@वर्क अभियान चलाया गया है। इसके तहत सोमवार को माता-पिता बेटियों को अपने कार्य स्थल पर लेकर पहुंचे और कार्य से परिचित कराया।

1. पापा के काम पर गर्व, उनकी तरह बनूंगी अफसर
- ऑफिस : पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय, रीवा
- बिटिया का नाम : जयंतिका जोगा
- पिता का नाम : उमेश जोगा, आईजी रीवा

मुझे गर्व है कि पापा समाज से अपराध मिटाने का कार्य करते हैं। यहां आकर अच्छे से जाना कि वे कैसे कार्य करते हैं। मैं उनकी तरह ही बड़ी अफसर बनूंगी। पापा मुझे सदैव प्रेरित करते हंै।
जयंतिका जोगा

2. कार्य के साथ सभी को समझाना पड़ता है
- ऑफिस : कलेक्टर कार्यालय, रीवा
- बिटिया का नाम : धॢमष्ठा नायक
- माता का नाम : प्रीति मैथिल, कलेक्टर, रीवा

मैं आज मम्मी के आफिस आई तो पता चला कि कितना कार्य करती हैं। कार्य करने के साथ ही सभी को अच्छे से समझाना पड़ता है।
धॢमष्ठा नायक

3. आसान नहीं दूसरों को समझाना, यह आई यह बात समझ
- ऑफिस : टीआरएस कॉलेज, रीवा
- बिटिया का नाम : दिशा सिंह
- पिता का नाम : डॉ. भूपेन्द्र सिंह, प्रोफेसर

अच्छा टीचर बनना आसान नहीं है। यह बात आज समझ में आई। अच्छा टीचर तभी क्लास में छात्रों को अच्छी तरह पढ़ा सकेगा, जब वह खुद पढ़कर जाएगा। पढ़ाने के लिए टीचर्स को कंटीन्यू डीप स्टडी करना पड़ता है, आज यह मालूम हुआ।
दिशा सिंह

4. पीडि़तों को न्याय मिले
- ऑफिस : सहायक अभियोजन
- बिटिया का नाम : ऋषिता चौबे
- माता का नाम : अंजू पांडेय, (स. अभियोजन अधिकारी)

मैंने यह जाना कि मां कैसे पुलिस के साथ मिलकर न्यायालय में दोषियों को सजा दिलाती हैं। पीडि़तों को न्याय दिलाने मेहनत करनी पड़ती है।
ऋषिता चौबे