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जेल मैनुअल के अनुसार खाना न देने पर अनशन, भड़के जेलर ने पीट-पीटकर किया अधमरा

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केन्द्रीय जेल सतना में 22 बंदी कर रहे अनशन,  बाहर का खाना बंद होने के बाद बिगड़ी बात।

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Suresh Kumar Mishra

Dec 16, 2016

Central jail Satna

Central jail Satna


सतना।
सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन एक कैदी को उस समय भारी पड़ गई। जब केन्द्रीय जेल सतना में बाहर का खाना प्रतिबंधित करने के बाद कैदियों ने जेल मैनुअल के अनुसार खाना देने की मांग की। इसी बात को लेकर जेल में कुछ कैदी अनशन पर बैठ गए। बंदियों के अनशन पर जाने की बात जेल प्रबंधन को नागबार गुजरी।


प्रबंधन ने लंबरदारों के साथ मिलकर बंदी की बेरहमी पूर्वक पिटाई कर दी। जब कैदी खून की उल्टियां करने लगा तो जेल में ही प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया जहां से संजय गांधी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया है। हालांकि जेल अधीक्षका ने गंभीर कैदी को सीढिय़ों से गिरने की बात बता रही है।



सजायाक्ता आरोपी था राजेश

राजेश पटेल पिता रामनिवास 37 वर्ष निवासी चोरमारी थाना रामपुर बाघेलान 16 मई 2009 को धारा 394/376 के आरोप सिद्ध होने पर माननीय न्यायालय ने 10-10 वर्ष की सजा सुनाई थी। राजेश ने पत्रिका को बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जेलों में बाहर का खाना प्रतिबंधित करने के बाद ज्यादातर कैदी जेल मैनुअल के अनुसार खाना की मांग कर रहे थे।


ऐसे बिगड़ी बात

इसी बात को लेकर 10 दिसंबर को 9 कैदी अनशन पर बैठ गए। दूसरे दिन 23 लोग अनशनकारियों का साथ दिए। तीसरे दिन सभी कैदियों को साथ मिला और पूरे जेल के कैदी अनशन पर बैठ गए। बंदियों के अनशन पर जाने की बात जेल प्रबंधन को नागबार गुजरी। 14 दिसंबर को अन्य कैदी मान गए लेकिन 22 कैदी अनशन पर डटे थे।


नेत्रत्व करना पड़ा महंगा

अनशन का नेत्रत्व कर रहे राजेश पटेल को कई बार जेल प्रबंधन समझाने की कोशिश की। लेकिन राजेश मानने को तैयार नहीं था। फिर 15 दिसंबर की रात जुना खाना ले जाकर जेलर योगेन्द्र तिवारी, चक्कर अधिकारी मंजू हुजूर, जेल प्रहरी मोतीलाल और लंबरदार वीरू व लाखन सिंह ने बेदम पीटा। जिससे मुंह और शरीर के अन्य अंगों में चोंट आई।


मेडिकल कॉलेज रेफर

बेरहमी पूर्वक पिटाई से कैदी खून की उल्टियां करने लगा तो जेल में ही प्राथमिक उपचार कराया गया। जेल डॉक्टर कोई खतरा न मोड़ लेते हुए आनन-फानन में जिला अस्पताल भेज दिया। जहां वरिष्ट चिकित्सकों ने भर्ती कर उपचार शुरू किया लेकिन कोई सुधार नहीं हो रहा था। बाद में संजय गांधी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया है।

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