
colleges run without building in satna
कमलेंद्र शुक्ला @ सतना। जिले में 15 शासकीय महाविद्यालय संचालित हैं। जिसमें लगभग आधा दर्जन से ज्यादा महाविद्यालय भवन के अभाव में या तो शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल के दो कमरों में संचालित हो रहें हैं या फिर उधार और किराए के स्थानों में। जी हां, शासन द्वारा जिले में जगह-जगह छात्रों की सुविधा के लिए कॉलेज तो खोल दिए गए, लेकिन उच्च शिक्षा के मानक अनुरूप विद्यार्थियों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही। वहीं भवन विहीन कॉलेजों में न तो बैठने के लिए पर्याप्त कक्ष, शौचालय, लाइब्रेरी, खेल मैदान और प्रोफेसरों की कमी बनी है। संसाधनों के अभाव के कारण प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी धीरे-धीरे इन कॉलेजों को छोड़ कर मुख्यालय के लीड कॉलेज की तरफ रुख कर रहे हैं।
इन कॉलेजों में नहीं हैं संसाधन
शासकीय महाविद्यालय अमदरा, शासकीय महाविद्यालय बदेरा, शासकीय महाविद्यालय ताला, शासकीय महाविद्यालय नादन, शासकीय महाविद्यालय उचेहरा, शासकीय महाविद्यालय मझगवां, शासकीय महाविद्यालय जैतवारा एवं शासकीय महाविद्यालय बिरसिंहपुर सहित कई अन्य महाविद्यालयों का स्तर स्कूलों जैसा भी नहीं है। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के अधीन यह सभी कॉलेज जिले में चल रहे हैं।
5 से 6 वर्ष से चल रहे हायर सेकंडरी स्कूल में
उचेहरा व मझगवां क्षेत्र में कॉलेज वर्ष 2013 में शुरू हुआ था। 5 से 6 वर्ष बाद भी कॉलेज का अपना भवन नहीं हो सका। शासकीय उचेहरा कॉलेज के लिए उचेहरा से नागौद बायपास में लगभग डेढ़ से दो साल पहले कॉलेज भवन के लिए 11 एकड़ जगह आवंटित हो चुकी है। जिसके लिए साढ़े 6 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार हुआ है। यहां जिस ठेका एजेंसी को कॉलेज भवन बनाने का कार्य सौंपा गया है, वह कार्य शुरू नहीं कर पा रहा है, क्योंकि कॉलेज के लिए आवंटित जगह पर अवैध रूप से कब्जा है और वह कोर्ट से स्टे ऑर्डर ले रखा है। जिसके लिए महाविद्यालय प्रबंधन द्वारा कलेक्टर व एसडीएम से कई बार लिखित रूप से आवेदन भी दिया गया, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
22 पदों में से 3 सहा. प्राध्यपक के पद ही भरे
जानकारी अनुसार उचेहरा कॉलेज हायर सेकंडरी स्कूल के कमरों में लग रहा है। यहां 350 विद्यार्थी गत वर्ष थे। बैठने की समस्या मुख्य रूप से विद्यार्थियों को हो रही है। कला एवं वाणिज्य समूह के पाठयक्रम ही यहां चल रहे हैं। नया सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यहां कुल 22 पदों में से 3 सहा. प्राध्यपक के पद ही भरे हैं। इसी तरह यहां न तो कम्प्यूटर लैब है और न ही लाइब्रेरी की व्यवस्था, खेल मैदान भी नहीं है।
10 एकड़ जमीन कॉलेज के लिए दो साल पहले आवंटित
कुछ एेसा ही हाल मझगवां के शासकीय महाविद्यालय का भी है, जहां पर बायपास में 10 एकड़ जमीन कॉलेज के लिए दो साल पहले आवंटित तो हो चुकी है। साथ ही भवन निर्माण के लिए साढ़े 6 करोड़ राशि भी स्वीकृत है और ठेका भी हो चुका है। लेकिन अभी भी भवन निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो सका है। महाविद्यालय मझगवां के शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल के तीन कमरों में संचालित है और 300 छात्र अध्ययनरत हैं। कुल 19 पदों में से केवल एक सहायक प्राध्यापक का पद भरा है।
कॉलेज की बिल्डिंग तो है प्राचार्य का पद नहीं
अमरपाटन विधानसभा अंतर्गत रामनगर में शासकीय महाविद्यालय के लिए स्वयं का भवन तो है, लेकिन उच्च शिक्षा विभाग द्वारा यहां पर कोई पद ही नहीं स्वीकृत किया गया। रामनगर महाविद्यालय में न तो प्राचार्य का पद है, न मुख्य लिपिक का और तो और यहां पर चपरासी का पद तक नहीं है।
Published on:
04 Jul 2018 12:31 pm
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