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Diwali puja vidhi: दिवाली के दिन इस विधि से करें पूजा, तो महालक्ष्मी कर देगी मालामाल

Diwali puja vidhi: दिवाली के दिन इस विधि से करें पूजा, तो महालक्ष्मी कर देगी मालामाल

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सतना

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Suresh Mishra

Nov 07, 2018

diwali puja vidhi muhurat 2018 diwali puja date time

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सतना। हिन्दू धर्म में दिवाली का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष दिवाली ७ नवंबर को यानी की आज है। कहते है कि अगर दिवाली पर शुभ मुहूर्त पर सही पद्धति से पूजा की जाए तो मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर भक्तों को मालामाल कर देती है। पुराणों के मुताबिक उस दिन से यह त्यौहार मनाया जा रहा है जब श्रीराम लंकापति रावण को पराजित कर और अपना वनवास समाप्त कर अयोध्या वापस लौटे थे।

उस दिन अयोध्यावासियों ने कार्तिक अमावस्या की रात अपने-अपने घरों में घी के दीप प्रज्वलित कर खुशियां मनाई थी। वहीं दूसरी ओर दीपावली पर विशेष रूप से लक्ष्मी पूजन करने की परंपरा है। मां लक्ष्मी के साथ-साथ गणेश पूजन, कुबेर पूजन और बही-खाता पूजन भी किया जाता है। दिवाली पर उपासक को अपने सामथ्र्य के अनुसार व्रत करना चाहिए। उपासक या तो निर्जला रहकर या फलाहार व्रत कर सकता है।

दिवाली के दिन ये करें उपाय
1. दिवाली पर मां लक्ष्मी का कृपा पाने के लिए माता लक्ष्मी के चरणों में कौडियां रखें। ऐसा करने से धन और धान्य की प्राप्ति होगी।
2. तिजोरी के दरवाजे पर महालक्ष्मी का चित्र बनाएं। चित्र ऐसा हो जिसमे मां लक्ष्मी बैठी हो। इसके साथ ही दो हाथी सूड़ उठाए नजर आए।
३. ध्यान रखें चित्र सुंदर और पौराणिक हो। ऐसा करने पर हमेशा घर में लक्ष्मी का वास रहेगा। घर में सुख-शांति मौजूद रहेगी।
४. ज्योतिष के अनुसार धन के देवता कुबेर का स्थान उत्तर दिशा की ओर बनाया गया है। इसलिए तिजोरी में नकदी रुपए उत्तर दिशा में रखें।
५. खासतौर पर धनतेरस और दिवाली पर महालक्ष्मी यंत्र का विधिवत पूजन कर स्थापना करें। धन वृद्धि के लिए यह यंत्र सबसे उपयोगी होता है।


पूजा की विधि
1. सबसे पहले श्री गणेश का पूजन करें। भगवान गणेश को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। गंध, पुष, अक्षत अर्पित करें।
2. अब देवी लक्ष्मी का पूजन शुरू करें।
3. माता लक्ष्मी की चांदी, पारद या स्फटिक की प्रतिमा का पूजन से भी उत्तम फल की प्राप्ति होती है। जिस मूर्ति में माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। उसे अपने पूजा घर में स्थान दें। मूर्ति में माता लक्ष्मी आवाहन करें।माता लक्ष्मी को अपने घर बुलाएं। माता लक्ष्मी को अपने-अपने घर में सम्मान सहित स्थान दें।
4. अब माता लक्ष्मी की मूर्ति को स्नान कराएं। स्नान से पहले जल से फिर पंचामृत से और दोबारा जल से स्नान कराएं।
5. इसके बाद माता लक्ष्मी को वस्त्र अर्पित करें। वस्त्रों के बाद आभूषण पहनाएं। अब पुष्पमाला पहनाएं। सुगंधित इत्र अर्पित करें।
6. अब कुमकुम तिलक करें। अब धूप व दीप अर्पित करें। माता लक्ष्मी को गुलाब के फूल विशेष प्रिय है।
7. 11 या 21 चावल अर्पित करें। श्रद्धानुसार घी या तेल का दीपक लगाएं। देवी लक्ष्मी की पूजा के लिए दीपक की बाती का रंग लाल होना चाहिए। दीपक को दाईं ओर रखें। दीपक बाईं ओर नहीं रखना चाहिए।
8. फिर आरती करें। आरती के पश्चात परिक्रमा करें।
9. फिर नेवैद्य अर्पित करें। महालक्ष्मी पूजन के दौरन 'ऊँ महालक्ष्मयै नम:Ó इस मंत्र का जप करते रहें।

दीपावली 2018 पूजन मुहूर्त
दिवाली का पूरा दिन ही शुभ होता है। इसलिए आप किसी भी समय पूजा कर सकते हैं। खासतौर से ऐसे लोग जो सिर्फ लक्ष्मी गणेश की पूजा करते हैं, उन्हें राहुकाल के बारे में सोचने की या चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अमावस्या कि दिन राहुकाल का दोष नहीं लगता है।

दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा के चार मुहूर्त
1. सुबह 8 बजे से 9:30 बजे तक
2. सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक
3. दोपहर 1:30 बजे से शाम को 6 बजे तक
4. शाम को 7:30 बजे से रात के 12:15 बजे तक

- आप इन चारों मुहूर्त में से किसी भी मुहूर्त में पूजन कर सकते हैं।
- अमावस्या तिथि शुरू कब से हो रही है: 6 नवंबर को रात 10:03 बजे से।
- अमावस्या तिथि समाप्त कब होगी: 7 नवंबर को रात 9:32 बजे।
- आयुष्मान योग: 7 नवंबर को शाम 05:57 बजे तक रहेगा। इसके बाद सौभाग्य योग प्रारंभ हो जाएगा।

स्थिर लग्न:
स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन को सबसे अच्छा माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस लग्न में लक्ष्मी पूजन से मां जल्दी प्रसन्न होती हैं और घर में निवास कर जाती हैं। जानिये स्थिर लग्न कब से कब तक है।
- वृश्चिक प्रात: 8:10 से 9:45 तक। इस लग्न से ग्रहों की स्थिति विशेष प्रभावी नहीं है।
- कुम्भ दोपहर 01:30 से 03:05 तक
- वृष सायंकाल 6:15 से रात्रि 8:05 तक
- सिंह रात्रि 12:45 से 02:50 तक

आरती श्री लक्ष्मी जी

ऊॅ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ऊॅ जय लक्ष्मी माता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ऊॅ जय लक्ष्मी माता॥

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ऊॅजय लक्ष्मी माता॥

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ऊॅ जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में तुम रहतीं, सब सदगुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ऊॅ जय लक्ष्मी माता॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ऊॅ जय लक्ष्मी माता॥

शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ऊॅ जय लक्ष्मी माता॥

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ऊॅ जय लक्ष्मी माता॥