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इंदिरा गांधी ने परिवारवाद को बढ़ाया

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सहस्त्रबुद्धे ने कांग्रेस पर साधा निशाना

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Suresh Kumar Mishra

Jan 22, 2016


सतना।
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ विनय सहस्त्रबुद्धे ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। विचार चेतना मंच के तत्वावधान में आयोजित विचार प्रबोधन में उन्होंने कहा कि जनसंघ न होता तो देश की राजनीति राजघरानों की होती। इंदिरा गांधी को भी संगठन पर भरोसा नहीं था, इसलिये घर के सदस्य को आगे बढ़ाया। उन्होंने परिवारवाद को बढ़ाया। वे टाउनहाल में एकात्म मानव दर्शन की प्रासंगिता पर बोल रहे थे।


विनय सहस्त्रबुद्वे ने कहा कि पंडित दीनदयाल का एकात्म मानव दर्शन हमे जीवन जीने की दृष्टि देता है। दीनदयाल जी कहते थे कि राजनीति में जनसहभागिता को आगे लाकर समाज के वंचित वर्ग की सेवा करनी होगी। आज राजनीति में दर्शन सिंद्वातं और चिंतन समाप्त दिखायी दे रहे है। भारत में 24 जनवरी 1966 से घरानों से राजनीति का युग प्रारंभ हुआ। कुछ समय के लिए देश के प्रिय सपूत लालबहादुर शास्त्री ने सत्ता की बागडोर जरुर सम्हाली।


गुलजारीलाल नंदा कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे लेकिन श्रीमती इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली काग्रेंस घराने की कांग्रेस बन कर रह गयी। उन्हें संगठन पर भरोसा नहीं था। इसलिये अपने घर से राजनीति चलायी, संजय गांधी को राजनीति में लाने की चेष्टा हुयी। संजय गांधी की मृत्यु के बाद इंदिरा गांधी के दुर्भाग्यपूर्ण निधन के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने। लेकिन दीनदयाल की विचारधारा पर केद्रित दल जनसंघ ने इस देश को घरानेशाही की राजनीति से बचा लिया। पंडित दीनदयाल जी कहा करते थे सत्ता का उपयोग समाज के शोषित वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा मे लाना है।


कार्यक्रम की अध्यक्षता सांसद गणेश सिंह की। विशिष्ट अतिथि प्रदेश संगठन महामंत्री अरविंद मेनन, म.प्र. नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष डा. हितेष वाजपेयी, जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह बघेल, विधायक शंकरलाल तिवारी, महापौर ममता पाण्डेय, जिपं अध्यक्ष सुधा सिंह, उपाध्यक्ष डा. रश्मिी पटेल रहीं। संयोजक जिला उपाध्यक्ष सतीश शर्मा रहे।


नजर आई गुटबाजी

टाउनहाल के इस कार्यक्रम में गुटबाजी भी देखने को मिली। इस कार्यक्रम में ज्यादातर भाजपा पदाधिकारी नजर नहीं आए। हालात यह रहे कि जिला भाजपा के उपाध्यक्ष, महामंत्री तो नदारद रहे ही साथ ही नगर के अध्यक्ष जैसे पदाधिकारी नजर नहीं आए। इस अनुपस्थिति को संघ और संगठन में गंभीरता से लिया गया है और इस गुटबाजी पर तल्खी भी कार्यक्रम की दर्शकदीर्घा में देखने को मिली


हैदराबाद मसले पर हुए मुखर

सहस्त्रबुद्वे ने हैदराबाद में छात्र की आत्महत्या पर कहा कि इस मु²े पर राजनीति नहीं करनी चाहिए, लेकिन जिन लोगो ने दलित समाज के लिए कुछ नही किया। आज वही लोग दलितो को लेकर राजनीति कर रहे है। कहा कि जाति के नाम पर वोट मागना ठीक नही है। आज अनेक राजनैतिक दल समाज को विभाजित कर लोगों से वोट मागते है, वे जाति, धर्म के नाम पर राजनीति कर समाज को विखंडित कर रहे हैं।

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