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MP के इस जिले में 5 माह से अपडेट नहीं हो रहा कम्प्यूटरीकृत खसरा, यहां पढ़ें तहसीलों की स्थिति

रीवा संभाग में सबसे खराब स्थिति सतना की, आयुक्त भू अभिलेख ने कलेक्टर को दिए निर्देश

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Landrecords Madhya Pradesh, khasra khatauni mp

Landrecords Madhya Pradesh, khasra khatauni mp

सतना। भू-अभिलेख विभाग को कम्प्यूटरीकृत करने के साथ ही सरकार ने खसरा, खतौनी की नकल ऑनलाइन देने की सुविधा प्रदान कर दी है। इस स्थिति में अब जरूरी हो गया है कि मैदानी अमले द्वारा खसरा-खतौनी का रेकार्ड नियमित तौर पर अपडेट किया जाए। शासन का दावा है कि यह रेकार्ड हर एक सप्ताह में अपडेट किया जा रहा है पर सतना जिले की स्थिति यह है कि 5-5 माह से खसरा अपडेट नहीं किया जा रहा है।

अनदेखी से कई भूमि विवादों का भी जन्म हो रहा है। इस तरह के मामलों की शिकायत आयुक्त भू-अभिलेख तक पहुंचने पर उन्होंने प्रदेश भर की तहसीलों की समीक्षा की तो पाया कि 1 से 6 माह पुराना डाटा भू-अभिलेख की वेबसाइट पर होस्ट है। मामले को गंभीरता से लेते हुए अब आयुक्त भू-अभिलेख ने कलेक्टर को तत्काल प्रभाव से वर्तमान डाटा अपलोड करने के निर्देश दिए हैं।

जिले की 9 तहसीलों का डाटा अपडेट नहीं
रीवा संभाग में सबसे खराब स्थिति सतना जिले की है। संभाग की कुल 21 तहसीलों का डाटा समय पर अपडेट नहीं हो रहा है। इसमें से सर्वाधिक संख्या सतना जिले की तहसीलों की है। रीवा जिले की सभी तहसीलों का डाटा नियमित अपडेट हो रहा है। सतना जिले की रघुराजनगर तहसील का खसरा 2 माह से अपलोड नहीं हुआ तो नागौद का 4 माह, अमरपाटन 2 माह, उचेहरा 2 माह, रामपुर बाघेलान 4 माह, रामनगर 4 माह, मैहर 2 माह, बिरसिंहपुर 2 माह और कोटर का खसरा 5 माह से वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया है।

यह है संभाग की स्थिति
सिंगरौली जिले की जिन तहसीलों में डाटा अपडेट नहीं है उनमें चितरंगी, सिंगरौली, देवसर, सरई और माड़ा शामिल है। सीधी जिले में बहरी, चुरहट, गोपद बनास, कुसमी, मझौली, रामपुर नैकिन और सिहावल तहसील शामिल है।

यह है प्रक्रिया
जैसे ही जमीन का स्वत्व बदलता है पटवारियों द्वारा तहसील स्तर पर खसरा खतौनी अपडेट कराई जाती है। इसके बाद इसकी सीडी हर माह तहसील स्तर से एसएलआर कार्यालय को वेबसाइट पर डाटा होस्ट करने के लिये भेजी जाती है। हालांकि सीएलआर आफिस का दावा है कि अपडेशन के लिये एक सप्ताह की प्रक्रिया तय की गई है।

यह है नुकसान
अब खसरा ऑनलाइन व्यवस्था के तहत मिलना शुरू हो चुका है। ऐसे में पुराना डाटा वेबसाइट पर होस्ट होने पर खसरे की गलत नकल भी मिल सकती है। साथ ही समय पर डाटा अपडेट न करने से गलत जानकारी भी मिल सकती है। कोई बिचौलिया इसका गलत लाभ भी ले सकता है। मसलन जमीन विक्री होने के बाद भी वेबसाइट में भू-स्वामी पुराना दिखाने पर दोबारा सौदेबाजी की ठगी की जा सकती है।