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मध्य प्रदेशः गांवों में अब साइकिल और बैलगाड़ी पर भी लगेगा टैक्स

पंचायत राज संचालनालय ने गांव वासियों के लिए निर्धारित किये कर चारागाह आदि को टैक्स के दायरे में लाने पर खड़े हो रहे हैं सवाल

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मध्य प्रदेशः गांवों में अब साइकिल और बैलगाड़ी पर भी लगेगा टैक्स

Madhya Pradesh: Tax will be imposed on cycles and bullock carts in villages

सतना. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायतों की वित्तीय व्यवस्था की मजबूती के लिये स्वयं की आय तैयार करने स्व निधि से समृद्धि अभियान प्रारंभ किया है। लेकिन इसके लिये जो टैक्स की व्यवस्था तैयार की है वह सवालों में आ गई है। यह कर प्रणाली ग्राम्य जीवन की व्यवस्था पर न केवल प्रभाव डालेगी बल्कि ग्रामीण जीविकोपार्जन के कारोबार भी महंगे हो जाएंगे। इस कर प्रणाली में गांव में बैलगाड़ी किराए पर देने वाले से भी कर वसूलने की व्यवस्था दी गई है तो गरीबों का किराए पर साइकिल लेना भी अब महंगा हो जाएगा क्योंकि इसे भी टैक्स के दायरे में ले आया गया है। इससे भी बड़ा मामला गरीबों के पीएम आवास को लेकर सामने आया है। अनिवार्य करों में शामिल संपत्ति कर का जो निर्धारण किया गया है उसमें प्रधानमंत्री आवास भी कर के दायरे में आ जाएंगे। पूंजी मूल्य के अनुसार इनके मालिकों को 500 रुपये टैक्स सालाना जमा करना होगा। इसको लेकर अभी से विरोध के स्वर उठने लगे हैं। हालांकि संबंधित टैक्स का निर्धारण वैकल्पिक है, लेकिन टैक्स प्रणाली में इसे शामिल करना ही शासन की सोच पर सवाल खड़ा कर रहा है।

आत्म निर्भरता का फार्मूला

पंचायतों की आर्थिक आत्मनिर्भरता को लेकर म.प्र. पंचायत राज संचालनालय ने पंचायतों के लिये स्वयं की आय के जो प्रावधान किये हैं वे विवाद में घिरते नजर आ रहे हैं। ग्राम पंचायतों के लिये वैकल्पिक कर की जो व्यवस्था दी गई है उसमें ग्राम पंचायत क्षेत्र की सीमाओं के भीतर किराए पर चलाए जाने के उपयोग में आने वाली बैलगाडि़यों, साइकिलों एवं रिक्शों पर प्रति यान प्रतिवर्ष 10 रुपये का कर लगाया जाएगा। इस कर को अब जजिया कर के रूप में बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि आज भी कई ग्रामीण क्षेत्र ऐसे हैं जहां लोग काफी गरीबी में जीते हैं। उन्हें अपनी दिनचर्या के लिये बैलगाड़ी और साइकिलें किराए पर लेनी पड़ती है। ऐसे में इन पर अगर टैक्स लगता है तो इनकी दरों में भी इजाफा होगा जिसका असर गरीबों पर होगा।

ये होंगे अनिवार्य कर

इसी तरह पंचायतों में अनिवार्य कर की व्यवस्था तय की गई है। इसमें भूमि तथा भवन पर संपत्ति कर, निजी शौचालयों पर कर, प्रकाश कर तथा वृत्ति कर शामिल हैं। ये कर एक अप्रैल से आगामी 31 मार्च तक के वर्ष के लिये अधिरोपित होंगे।

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चारागाह में पशु चराने पर देना होगा टैक्स

वैकल्पिक करों की जो व्यवस्था है वह ग्राम सभा पर निर्भर होगी कि वे इसे लागू करती है या नहीं। इसमें सवारी करने, चलाने, खींचने या बोझा ढोने के लिये उपयोग में लाए जाने वाले पशुओं पर भी कर की व्यवस्था दी गई है। चारागाहों में पशुओं को चराने के लिये भी कर की व्यवस्था तय की गई है। मोटरयानों से भिन्न यानों के स्वामियों से पंचायत क्षेत्र में प्रवेश पर 5 रुपये प्रतिदिन लगाया जा सकेगा।

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गरीबों का पीएम आवास भी टैक्स के दायरे में

ग्राम सभा अनिवार्य कर (शर्ते तथा अपवाद) नियम 2001 के तहत संपत्तिकर की जो दर तय की गई है उसके अनुसार जिस संपत्ति का पूंजी मूल्य 6 से 12 हजार के बीच है उसे न्युनतम 100 रुपये संपत्ति कर देय होगा। इसी तरह से 12 हजार रुपये से अधिक पूंजी मूल्य के भवनों पर न्युनतम 500 रुपए संपत्तिकर देय होगा। अब इसके अनुसार गांवों में बने प्रधानमंत्री आवास 12 हजार रुपये से अधिक पूंजी मूल्य के दायरे में आ रहे हैं लिहाजा इन पर भी 500 रुपये सालाना टैक्स देय होगा। अभी तक पंचायत राज संचालनालय ने पीएम आवास को टैक्स मुक्त करने संबंधी कोई आदेश भी नहीं दिया है।

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पशु रजिस्ट्रीकरण पर 3 रुपये

मध्यप्रदेश ग्राम पंचायत अनिवार्य कर तथा फीस (शर्ते तथा अपवाद) नियम 1996 के अनुसार पशुओं के रजिस्ट्रीकरण पर जो फीस तय की गई है उसमें सुआर, बकरा, बकरी, ***** व बछड़ा पर न्युनतम 3 व अधिकतम 20 रुपये, भैंसा, बैल, गाय, घोड़ा व घोड़ी पर न्युनतम 5 व अधिकतम 25 रुपये और भैंस, ऊंट के लिये न्युनतम 10 व अधिकतम 30 रुपये पंजीयन फीस लगेगी।

यह होगी बाजार फीस

प्रति एक वर्ग मीटर के लिए न्युनतम 30 पैसे प्रतिदिन व अधिकतम 50 पैसे प्रतिदिन लगेगा। इसी तरह बाजार विक्रय के लिये लाए गये माल के लिये 25 पैसे प्रति टोकरी या सिर भार पर 50 पैसे लगेगा।

'' जिस तरीके से ग्रामीण जीविकोपार्जन की अनिवार्य व्यवस्था को कर प्रणाली के दायरे में लाया गया है यह तुगलकी व्यवस्था है। इसे जजिया कर ही कहा जाएगा और कांग्रेस इसका विरोध करेगी।''- दिलीप मिश्रा, जिलाध्यक्ष कांग्रेस

'' ग्रामीणों के जीवन यापन की अनिवार्य व्यवस्था को कर मुक्त करने पर शासन को पुनर्विचार करना चाहिए। हालांकि ये सभी वैकल्पिक हैं न कि अनिवार्य। '' - नारेन्द्र त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष भाजपा

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