मेजर ध्यानचंद की जयंती पर विशेष: फुटबाल के बहाने हॉकी की सीख दे गए थे मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक ध्यानचंद
सतना/ जिले में विलुप्त हो रहे भारत के राष्ट्रीय खेल हॉकी की जादूगरी को नागौद के त्रिदेवों ने बचाए रखा है। बताया गया कि नागौद रियासत में 1982 तक हॉकी की देश-प्रदेश में धाक चलती थी। लेकिन, समय के साथ सबकुछ बदलता गया। 90 के दशक में नागौद रियासत हॉकी विहीन हो गई। वर्ष 2009 में नागौद स्थित खेल मैदान पर अखिल भारतीय इंडिपेंडट फुटबाल का मैच आयोजित किया गया।
इसके समापन के मौके पर मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक ध्यानचंद को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया गया। यही हॉकी के लिए टर्निंग प्वॉइंट था। बतौर मुख्य अतिथि अशोक ध्यानचंद ने आयोजन कमेटी के सदस्य जितेन्द्र सिंह जित्तू, डॉ. पुष्पराज सिंह और अमर सिंह से अपील की। कहा कि आप लोगों के अंतर खेल के प्रति अच्छी श्रद्धा है क्यों नहीं आप लोग हॉकी के खेल को बढ़ावा देते हैं। यहीं से तीनों दोस्तों ने कसम खाई की अब हॉकी के खेल को उचाई तक ले जाएंगे।
हाल ही में इन खिलाडिय़ों का हुआ स्टेट टीम में चयन
जितेन्द्र सिंह जित्तू ने बताया कि अभी हाल ही में जिन खिलाडिय़ों का स्टेट टीम में चयन हुआ है। उनमे सीनियर टीम के देवांशू वर्मा, अंकुश वर्मा, कर्ण वर्मन, अंजनी दंत्वाय शामिल है। इसी तरह मिनी हॉकी टीम में अनिकेत बारी, निखिल चौटहेल, सौर्य गुप्ता, अनुरूद्व सिंह, कार्तिक चुटहेल चयनित हुए है। जबकि जूनियर टीम में अंसुल बिरहा, हर्ष चुटहेल, आयूष सोंधिया, वरूणा दीप्त सिंह, निखिल सिंह परिहार, शिवम चुटहेल, देवरत्न सिंह परिहार ने चयन के बाद नागौद का सीना और चौड़ा कर दिया है।
कौन हैं जितेन्द्र सिंह जित्तू
नागौद से महज 10 किमी. दूर बरकछी गांव निवासी 52 वर्षीय जितेन्द्र सिंह जित्तू पिता स्व. सूर्यभान सिंह फुटबाल के नेशलन प्लेयर रह चुके हैं। लेकिन अशोक ध्यानचंद के मार्गदर्शन के बाद दोस्तों के साथ मिलकर हॉकी को संवारने का बीड़ा उठा लिया है। जितेन्द्र सिंह जित्तू ने पत्रिका को बताया कि अशोक ध्यानचंद खेल और युवा कल्याण विभाग मध्यप्रदेश के हॉकी के कोच और मेंटर रह चुके है। उन्होंने वर्ष 2010 में खेल और युवा कल्याण विभाग से खिलाडिय़ों के लिए स्पोट्स सामग्री उपलब्ध करा दी। अब वर्तमान समय में उनके नेतृत्व में 20 लड़के और 12 लड़कियां प्रशिक्षण ले रही है।
3 बच्चे नेशनल में गए
नागौद हॉकी के मेंटर जितेन्द्र सिंह के नेतृत्व में हीमांशू वर्मा, देवाशूं वर्मा और मयंक त्रिपाठी नेशनल खेल कर जिले को गौरांवित कर चुके है। दोनों सगे भाई हीमांशू वर्मा, देवाशूं वर्मा होल्कर विश्वविद्यालय इंदौर में स्पोट्स कोटे में एडमीशन लेकर राष्ट्रीय टीम में तैयारी कर रहे है। इसी तरह जिला शालेय क्रीडा प्रतियोगिता और संभागीय शालेय क्रीडा प्रतियोगिताओं में हर वर्ष नागौद के छात्रों का योगदान रहता है।