एक ओर प्रदेश सरकार खेती को लाभ का धंधा बनाने कई योजनाएं चला रही है, वहीं जिन अधिकारियों के कंधे पर खेती की जिम्मेदारी है वे किसानों के लिए समय नहीं निकल पा रहे हैं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि मानसून सिर पर है, किसान खाद-बीज की तैयारी में जुटे हैं और कृषि विभाग को खरीफ 2016 की एपीसी बैठक का इंतजार है। इस बैठक में ही खरीफ की बोवनी का लक्ष्य निर्धारित होना है।
कृषि उत्पादन आयुक्त संभागीय बैठक जून के प्रथम सप्ताह हो जानी चाहिए। आयुक्त द्वारा बैठक के लिए समय न दे पाने से इस वर्ष विंध्य के सात जिलों के रबी 2015-16 की समीक्षा एवं खरीफ 2016 की तैयारी को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। कृषि अधिकारियों ने खरीफ की बोवनी का लक्ष्य तैयार कर लिया है, जिसे अंतिम स्वीकृति एपीसी समीक्षा के बाद प्रदान करेंगे। इसके बाद ही कृषि अधिकारी लक्ष्य पूर्ति के लिए खाद-बीज एवं दवाइयों की व्यवस्था करेंगे।
किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा 27 मई को जारी निर्देश के अनुसार, रीवा संभाग की एपीसी बैठक 16 जून को संभागीय कार्यालय रीवा में होनी थी, जिसे निरस्त कर बैठक के नए निर्देश जारी किए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि अब रीवा एवं शहडोल संभाग की संयुक्त बैठक 15 जून को शहडोल में होगी। इसमें विंध्य प्रदेश के सात जिले सतना, रीवा, सीधी सिंगरौली, शहडोल, उमरिया तथा अनूपपुर के 9 विभागों के अधिकारी शामिल होंगे।
3.9 लाख हे. में होगी खरीफ की बोवनी
उप संचालक कृषि सतना एपी सुमन ने बताया, खरीफ 2016 में जिले में बोवनी के लक्ष्य तय कर लिए गए हैं। जिसे एपीसी की बैठक में स्वीकृति के लिए रखा जाएगा। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त बोवनी के लक्ष्य की समीक्षा करते हुए इसे घटा एवं बढ़ा सकते हैं। इस वर्ष मानसून सामान्य रहने के अनुमानों को देखते हुए कृषि विभाग ने 3.9 लाख हेक्टेयर में खरीफ की बोवनी का लक्ष्य रखा है। इसकी पूर्ति के लिए खाद एवं बीज की व्यवस्था की जा रही है।