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सड़क ने रोका सतना का विकास: हाइवे और गलियों में धूल फांक रहे मतदाता, बन सकता है सबसे बड़ा मुद्दा

सच पूछो तो विधानसभा चुनाव में सड़क से बड़ा कोई मुद्दा है ही नहीं,

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सतना

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Suresh Mishra

Oct 13, 2018

MP election 2018: Electoral issue of jarjar sadak in Development Satna

MP election 2018: Electoral issue of jarjar sadak in Development Satna

सतना। सड़क देखकर ही उस स्थान के विकास की दशा-दिशा तय होती है। पर सतना जिले को जोडऩे वाली सड़कें और शहर के अंदर की सड़के ऐसी हैं कि लोग चुनाव का मुद्दा पूछते ही सड़क दिखा देते हैं। नेशनल हाइवे पर कई साल से निर्माण जारी पर काम आज भी आधा-अधूरा है। इस दशा को लेकर जनता में रोष है। चुनाव में सड़क ही सबसे बड़ा जमीनी मुद्दा है। खराब सड़कों ने औद्योगिक जिले का विकास रोक दिया है। निर्माणाधीन हाइवे पूरा होने का नाम नहीं ले रहा है।

सरकार दावा करती है कि प्रतिदिन 25 किमी. से ज्यादा हाइवे का निर्माण हो रहा है, पर जिले में आलम यह है कि 8 साल में 200 किमी के हाइवे का निर्माण नहीं हो सका है। हाइवे के गड्ढों में जनता हिचकोले खा रही है। सड़क पर चलने वाला भी मजबूर है और आस-पास रहने वाला भी। इसके बाजवूद जनप्रतिनिधि विकास का दावा करते हैं। जिले में सतना-रीवा, सतना-बमीठा, सतना-चित्रकूट, एनएच 7 चौड़ीकरण के लिए करीब 1200 करोड़ रुपए का निवेश हो चुका है। उसके बाद यह स्थिति है।

मोटरेबल करने में 50 करोड़ खर्च
सतना-बेला व सतना-बमीठा मार्ग बरसात के समय चलने योग्य नहीं रह जाते। इन्हें मोटरेबल बनाने में भारी भरकम राशि खर्च होती है। एमपीआरडीसी से जुड़े अधिकारियों की मानें तो सतना-बेला मार्ग पर औसतन 5 करोड़ रुपए खर्च होता है। इसी तरह सतना-बमीठा मार्ग पर 6 करोड़ खर्च होता है। पांच साल में 50 करोड़ से ज्यादा खर्च हो चुके हैं और सड़क आज भी जर्जर है।

सतना-बेला
वर्ष 2012 में 367.90 करोड़ का टेंडर हुआ था। एमपी टॉपवर्थ को काम करना था। कंपनी पांच साल तक मिट्टी-गिट्टी डालने का काम करती रही। समय-सीमा से दो साल अतिरिक्त गुजरने के बाद कंपनी को ब्लैक लिस्टेड किया गया। पुन: 318 करोड़ रुपए में टेंडर हुआ। अब भी 50 फीसदी काम अधर में है।

सतना-बमीठा
सतना-बमीठा मार्ग का टेंडर भी वर्ष 2011-12 में हुआ। 275 करोड़ में पाथ इंफ्रा को काम मिला। 18 माह में पूरा करना था, पांच साल में अधूरा है। पुल-पुलिया का निर्माण जारी है। कंपनी ब्लैक लिस्टेड है।

सतना- चित्रकूट
मार्ग का 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। यह सड़क निर्धारित समय-सीमा में पूरी नहीं हुई। पहले दो भाग में सड़क बनने का टेंडर एमपी टॉपवर्थ को मिला था। कंपनी ने सतना-मझगवां तक काम किया, मझगवां-चित्रकूट काम नहीं कर सकी। बाद में 121.78 करोड़ में त्रिरूपति बिल्डाकाून को काम मिला।

जनता के 3 सवाल.. जवाब बताइये
गड्ढों से निजात क्यों नहीं
शहर सहित जिले की सड़कें खराब है। करोड़ों खर्च किया, समय भी काफी लिया पर जनता को राहत नहीं मिली, पांच साल से सड़क के गड्ढों से जनता परेशान है।
विजय ओझा, जीवनज्योति कॉलोनी

हम धूल क्यों खाएं
पांच साल से सड़क बनाने का काम चल रहा है। क ब तक सड़क बनेगी पता नहीं, जनप्रतिनिधि व अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। विकास के नाम पर सड़क बन रही और जनता धूल खा रही।
श्वेता अग्रवाल, बिड़ला रोड

हमारा पैसे क्यों कर रहे हो बर्बाद
सतना में विकास की कोई योजना नहीं है। पहले निर्माण में राशि खर्च होती है, फिर उसे तोड़ते हैं। इससे समय व अर्थ दोनों का नुकसान होता है।
राजेश अग्रवाल, भरहुत नगर

तीनों बड़ी पार्टियों ने क्या दी सफाई
जिले की खराब सड़कों को लेकर पार्टी की बैठकों में कई बार चर्चा हुई है। विगत दो पंचवर्षीय से सड़कें समस्या बनी हुई हैं। बसपा अपनी बैठकों में चर्चा कर चुकी है। इस बार बड़ा मुद्दा होगा।
रमेश चौधरी, जिला अध्यक्ष, बसपा

सतना की बदहाल सड़कों को लेकर कांग्रेस ने कई बार प्रदर्शन किया। हाल ही में माधवगढ़ में प्रदर्शन हुआ। इससे पहले रामपुर में। इस मुद्दे पर आंदोलन किया गया है। सरकार को जनता से ज्यादा ठेकेदारों की ङ्क्षचता है।
राजेंद्र मिश्रा, जिला अध्यक्ष, कांग्रेस

जिलेभर में सड़कों का जाल तेजी से फैल रहा है। थोड़ा-बहुत काम शेष रह गया है। ये भी जल्द पूरे हो जाएंगे, इससे जनता को समस्याओं से राहत मिलेगी। उसके बाद दूरगामी लाभ जिलेवासियों के लिए होगा।
नरेंद्र त्रिपाठी, जिला अध्यक्ष, भाजपा

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