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सतना. सीएमएचओ कार्यालय की ओर से 25 स्वास्थ्य केंद्रों के 30 से अधिक पैरामेडिकल स्टाफ को जिला मुख्यालय पर आयोजित प्रशिक्षण में भेजा है। लेकिन, इनके स्थान पर दूसरे कर्मचारियों की तैनाती स्वास्थ्य केंद्रों में नहीं की है। इससे दो दर्जन से अधिक केंद्रों की चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। डॉक्टर विहीन प्रसव केंद्रों की चिकित्सा व्यवस्था बेपटरी हो गई है। पीडि़तों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कौशल प्रशिक्षण पर गया स्टॉफ
दरअसल, स्तनपान को बढ़ावा देने स्वास्थ्य महकमे द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत पैरामेडिकल स्टाफ को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सीएमएचओ कार्यालय की ओर से 6 अक्टूबर 18 को आदेश क्रमांक/एनएचएम/2018/1287 जारी कर जिले के पैरामेडिकल स्टाफ को चार दिवसीय जिलास्तरीय प्रशिक्षण में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। बिना सूचना अनुपस्थिति पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
इन केंद्रों में सबसे ज्यादा परेशानी
जिले के जसो, बरौंधा, बिरसिंहपुर, जैतवारा, परसमनिया, बूढ़ाबाउर, सोहावल, कुआं, मुकुंदपुर, कोटर सहित अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रसव केंद्र होने से 24 घंटे गर्भवती और प्रसूताएं दाखिल रहती हैं। स्टाफ की कमी के चलते दाखिल पीडि़तों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा।
नर्स के भरोसे चल रहे थे प्रसव केंद्र
कोटर, बूढ़ाबाउर सहित कुछ प्रसव केंद्र एेसे भी हैं जिनमें चिकित्सक नहीं हैं। इन प्रसव केंद्रों का संचालन स्टाफ नर्स द्वारा किया जा रहा है पर स्टाफ नर्स के प्रशिक्षण में चले जाने के बाद इन प्रसव केंद्रों की चिकित्सा व्यवस्था बेपटरी हो गई है। मामले की जानकारी संबंधित क्षेत्र के चिकित्सा अधिकारियों को भी है, इसके बाद भी दूसरे स्टाफ को केंद्रों में नहीं भेजा जा रहा है।
बच्चों के स्वास्थ्य-पोषण मानकों पर स्थिति गंभीर
जिला बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण के मानकों पर गंभीर स्थिति में है। गर्भावस्था से ही चुनौतियों की शुरुआत हो रही है। विकास संवाद की ओर से नवजात शिशु, शिशु जीवन और पोषण पर आधारित मीडिया फोरम के दौरान शोधकर्ता राकेश कुमार मालवीय ने एनएफएचएस रिपोर्ट अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर बताया कि सुरक्षित मातृत्व और नवजात शिशु मृत्यु को कम करने के लिए जरूरी है कि गर्भवती को पूर्ण प्रसव पूर्व जांचों का लाभ (एएनएम द्वारा चार भ्रमण, टिटनेस के टीके, 100 आयरन फोलिक एसिड गोलियां, वजन, रक्तचाप की जांच) मिलना ही चाहिए। लेकिन सभी गर्भवती को प्रसव पूर्व सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
Published on:
13 Oct 2018 02:48 am

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