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जनसुनवाई: कलेक्टर ने पकड़ा भू-माफिया का खेल, एसडीएम को जांच के दिए निर्देश

जमीन का फर्जी विक्रेता बन हॉकर से ठग लिए दो लाख रुपए जनसुनवाई से अनुपस्थित रहे अधिकारियों की सूची की तलब

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सतना। कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस ने अपनी पहली जनसुनवाई में लोक शिकायत निवारण तंत्र को लेकर अपनी गंभीरता दिखा दी है। जनसुनवाई में आते ही उन्होंने अनुपस्थित अधिकारियों की सूची तलब की। इसके बाद एक-एक आवेदक को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर निराकरण के निर्देश दिए। निराकृत न हो सकने वाले मामले में आवेदकों को बकायदे समझाइश भी दी। पहले ही दिन कलेक्टर ने भू-माफिया का बड़ा मामला पकड़ा। इसमें दूसरे की जमीन को अपना बता कर बेचने वाले फर्जी विक्रेता के मामले की विस्तृत जांच के निर्देश एसडीएम सिटी राहुल सिलाडिया को दिए। स्पष्ट कहा कि इस मामले की जांच भू-माफिया के एंगल से की जाए। इसके पहले आवेदक तमाम जगह चक्कर लगाकर थक चुका था। जनसुनवाई में अपर कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े, डिप्टी कलेक्टर एलआर जांगड़े सहित विभिन्न विभागों के विभाग प्रमुख मौजूद रहे। इस दौरान कुल 67 आवेदकों को सुना गया।

इस तरह बेच दी दूसरे की जमीन

कलेक्टर के पास पहुंचे व्यक्ति ने अपना नाम विष्णु सोनी बताते हुए कहा कि वह पेशे से हाकर है। इसी दौरान उसकी पहचान जीतेन्द्र राय से हो गई। वे जमीन का कारोबार करते हैं। लिहाजा उनसे अपने लिए एक प्लाट दिलाने की बात कही। जीतेन्द्र ने अपने साथी दिलीप बुनकर को पतौरा चौकी के पहले रोड के किनारे वीरपुर में एक जमीन दिखाई। इस जमीन को साफ सुथरा बताते हुए इसकी रजिस्ट्री कराने की बात कही। 2 लाख में सौदा होने पर 17 जुलाई 2023 को कलेक्ट्रेट के पंजीयन कार्यालय में 2 लाख रुपए लेने के बाद विक्रेता विजय गुप्ता से यह जमीन मेरे नाम रजिस्ट्री करवा दी। इसमें गवाह आलोक श्रीवास्तव और दिलीप बुनकर बने। इस दौरान विष्णु सोनी से 23 हजार रुपए रजिस्ट्री और स्टांप ड्यूटी आदि के लिए गए। 3 हजार रुपए पटवारी से दाखिल खारिज के लिए गए। रजिस्ट्री होने के बाद जब नामांतरण नहीं हुआ तो विष्णु इनसे रजिस्ट्री लेकर पटवारी से मिला तो बताया गया कि यहां विक्रेता की कोई जमीन ही नहीं है। पटवारी प्रतिवेदन भी इसी तरह से आ गया। तब से लेकर अभी तक विष्णु तमाम दफ्तरों में चक्कर लगा रहा है। कलेक्टर डॉ सतीश ने मामले को पूरी तरह समझने के बाद एसडीएम सिटी को निर्देशित किया है कि इस मामले की गंभीरता से जांच की जाए और भू-माफिया के एंगल पर जांच करते हुए आवश्यक ठोस कार्रवाई की जाए।

पेंशन और राशन तो मिल रहा है न अम्मा

सतना गढि़या टोला से आई वृद्धा राजूबाई केवट ने आवेदन देते हुए कहा कि अंत्योदय योजना का कार्ड बनाकर 35 किलो राशन दिलवाया जाए साहब। जिस पर कलेक्टर ने बताया कि अम्मा, अब अंत्योदय कार्ड नहीं बनते हैं। बाकी आपको पेंशन और राशन तो मिल रहा है। जवाब हां में मिलने पर कलेक्टर ने अधिकारियों को अम्मा का आयुष्मान कार्ड बनाने के निर्देश दिए। शेरगंज से जयपाल अहिरवार जनसुनवाई में पहुंचे। बताया कि राशन, पेंशन सब मिल रही है। मोटराइज्ड ट्राइसिकिल दिलाई जाए। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारी से इस संबंध में जानकारी ली। फिर जयपाल से कहा कि दादा आपकी उम्र ज्यादा हो गी है। आपको शारीरिक अक्षमता के कारण मोटराइज्ड ट्राइसिकिल की पात्रता नहीं है। उन्हें संतुष्ट करके रवाना किया।

धान विक्रय में कटौती की जांच के निर्देश

नागौद के मझियारी खुर्द निवासी विद्या प्रकाश द्विवेदी ने कलेक्टर को बताया कि पूर्व में उनके पिता के नाम जमीन थी। सरकार ने उनका कर्जा माफ कर दिया था। इसके दस्तावेज भी वे लेकर आए थे। बताया कि अब पिता ने जमीन का बंटवारा कर दिया है। लेकिन समिति प्रबंधक ने फर्जीवाड़ा करते हुए मेरे नाम का ऋण बताकर फर्जी इंट्री करवा दी। मेरे द्वारा श्रीराम वेयर हाउस में 159 क्विंटल धान बेची गई थी। इसकी राशि काट ली गई है। जबकि मेरे द्वारा कोई ऋण कभी नहीं लिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने महाप्रबंधक केन्द्रीय बैंक और उप पंजीयक सहकारिता को मामले की जांच कर नियमानुसार कार्यवाही करने के निर्देश दिये।

संबल फर्जीवाड़े की वसूली के निर्देश

जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक के पूर्व संचालक प्रकाश चंद्र गुप्ता ने बताया कि नगर निगम में संलब योजना के तहत बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है। अपात्रों को नियम विरुद्ध राशि का भुगतान कर दिया गया है। मामले की जांच भी हो चुकी है। कलेक्टर द्वारा संबंधितों को नोटिस भी जारी किया जा चुका है। लेकिन अभी तक वसूली की कार्यवाही नहीं हो पा रही है। नगर निगम आयुक्त इस मामले में अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर की बात कर रहे हैं। मामले में दोषियों को दंडित करने सहित राशि वसूली की मांग की गई। जिस पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारी को त्वरित कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।

ऐसे मामले मेरे पास आए तो कर दूंगा निलंबित

कलेक्टर के पास एक किसान खाद की समस्या लेकर पहुंचा। उसने बताया कि का खाद नहीं दी जा रही है और जो दी गई है उसकी बोरी फटी हुई है। जिम्मेदार अधिकारी ने सफाई दी तो किसान ने कहा कि इन्होंने जो खाद देने को कहा था वह 35 किलोमीटर दूर समिति से लेने कहा था। वहां जाने में हजार रुपए का खर्चा हो जाता। कलेक्टर ने यह सब सुनने के बाद अधिकारी से कहा कि इस तरह के मामले मेरे पास नहीं आने चाहिए वरना निलंबित कर दूंगा।

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