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स्वामी विवेकानंद के इन 15 प्रेरणादायी विचारों को जीवन में करें अमल, कभी नहीं होंगे असफल

युवाओं के स्वामी विवेकानंद, मानव सेवा और राष्ट्र निर्माण का ध्येय रखकर सिर्फ 39 वर्ष की आयु में ही वे पूरे विश्व पर छा गए

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सतना

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Suresh Mishra

Jan 12, 2019

swami Vivekananda Jayanti: swami vivekanand ke 15 anmol vachan

swami Vivekananda Jayanti: swami vivekanand ke 15 anmol vachan

सतना। विवेकानंदजी युवाओं के प्रेरणास्रोत हैं। मानव सेवा और राष्ट्र निर्माण का ध्येय रखकर सिर्फ 39 वर्ष की आयु में ही वे पूरे विश्व पर छा गए। विदेशों में दिए इनके भाषण से अभिभूत अमेरिकी, लंदनवासी आज भी इनका लोहा मानते हैं। भारत ही नहीं पूरा विश्व इन्हें आध्यात्मिक और प्रबंधन गुरु मानता है। भारत में इनकी जयंती युवा दिवस के रूप में मनाई जाती है, क्योंकि इनका ओजस्वी व्यक्तित्व ही देश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।

युवा भी इनके बताए पथ और गुरु मंत्रों पर अमल करके आगे बढ़ रहे हैं। रामकृष्ण परमहंस इनके गुरु थे। गुरु की सेवा कैसे की जाती है यह कोई स्वामीजी से सीखे। दृढ़ निश्चय की झलक इनके इरादों से ही मिल जाती थी। ये युवाओं से आह्वान करते थे कि डरो मत, बहादुरी से आगे बढ़ो, लक्ष्य निर्धारित करो और तब तक चैन से मत बैठो जब तक वह लक्ष्य तुम्हारी मंजिल में तब्दील न हो जाए।

स्वामी विवेकानंद के 15 प्रेरणादायी विचार
1- उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाये।
2- सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा।
3- दिल और दिमाग के टकराव के बीच हमेशा दिल की सुनो।
4- सबसे बड़ा धर्म है अपने स्वभाव के प्रति सच्चे होना। स्वयं पर विश्वास करो।
5- विश्व एक व्यायामशाला है जहां हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं।
6- बाहर की दुनिया बिलकुल वैसी है, जैसा कि हम अंदर से सोचते हैं। हमारे विचार ही चीजों को सुंदर और बदसूरत बनाते हैं।
7- तुम गीता पढ़ने के मुकाबले फुटबॉल खेलने से स्वर्ग के ज्यादा करीब होगे।
8- किसी दिन, जब आपके सामने कोई समस्या ना आये – आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं।
9- जो अग्नि हमें गर्मी देती है, हमें नष्ट भी कर सकती है, यह अग्नि का दोष नहीं है।
10- एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।
11- कभी भी यह मत सोचो कि तुम्हारे लिए, तुम्हारी आत्मा के लिए कुछ भी नामुमकिन है।
12- तुम्हें अंदर से सीखना है सबकुछ। तुम्हें कोई नहीं पढ़ा सकता, कोई आध्यात्मिक नहीं बना सकता। अगर यह सब कोई सिखा सकता है तो यह केवल आपकी आत्मा है।
13- सच्चाई के लिए कुछ भी छोड़ देना चाहिए, पर किसी के लिए भी सच्चाई नहीं छोड़ना चाहिए।
14- सबसे पहले यह अच्छे से जान-समझ लो कि हर बात के पीछे एक मतलब होता है।
15- अगर तुम्हें खुद पर भरोसा नहीं है तो तुम सबसे बड़े नास्तिक हो।

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