
The most mapless village in the state is in Satna
सतना. जिले के राजस्व महकमे की सबसे बड़ी समस्या गांवों के गायब नक्शे और जीर्णशीर्ण नक्शों के कारण आए दिन होने वाले विवाद हैं। हालात यह हैं कि नक्शा न होने से संबंधित सर्वाधिक शिकायतें और विधानसभाएं सतना जिले से ही सामने आती हैं। इसको गंभीरता से लेते हुए सीएलआर ने क्षेत्रीय उपायुक्त भू-अभिलेख रीवा के नेतृत्व में तीन जिलों के अधिकारियों कर्मचारियों की एक कमेटी गठित की है। लेकिन यह कमेटी मामले को हमेशा की तरह लालफीताशाही में उलझाने में जुट गई है। एक दिन खानापूर्ति के लिये कमेटी अध्यक्ष सतना पहुंच कर बैठक लेने के बाद चुप्पी साध कर बैठ गए हैं। इसके बाद पत्र-पत्र खेला जा रहा है। जबकि सत्यापन के लिये संबंधितों को सतना में रहकर भौतिक सत्यापन के निर्देश दिए गए हैं। स्थिति यह है कि अन्य जिलों के सीएलआर यहां अभी तक उपस्थित ही नहीं हुए हैं तो यही हाल आरआई का भी है। गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अभी तक कमेटी के किसी भी सदस्य ने कलेक्टर तक से मिलने की जहमत नहीं उठाई है।
भौतिक सत्यापन नहीं
किसी भी गांव के तीन नक्शे होते हैं जिसमें एक प्रति मिसिल बंदोबस्त के साथ रखी जाती है। दूसरी प्रति जिला रिकार्ड रूम में होती है और तीसरी प्रति पटवारी के पास होती है। लेकिन जिले के डेढ़ सौ गांव ऐसे हैं जिसके सभी नक्शे गायब है। सीएलआर ने इसे गंभीर साजिश मानते हुए कमेटी सदस्यों से इसका भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं। कहा गया है कि ये दल गायब नक्शों सहित जीर्ण शीर्ण नक्शों का सत्यापन जिला अभिलेखागार करेगा। लेकिन कमेटी का कोई भी सदस्य इसके सत्यापन में रुचि नहीं ले रहा है। सारा काम अभिलेखागार के स्टाफ पर या स्थानीय कर्मचारियों पर छोड़ दिया है। स्पष्ट है कि सारा काम उन्ही लोगों पर सत्यापन का छोड़ा गया है जो पहले से ही विवादित है। इसी को देखते हुए सीएलआर ने बाहर के अधिकारियों को यहां मौजूद रह कर सत्यापन के निर्देश दिए थे।
सत्यापन न कर चेक लिस्ट का सहारा
सत्यापन की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कमेटी के अध्यक्ष ने भौतिक सत्यापन के लिये अभिलेखागार में नक्शों की उपलब्धता न देखते हुए उन्हें चेक लिस्ट थमा दी है कि जो भी नक्शे मौजूद है उसे चेकलिस्ट में निशान लगा दें। जबकि निर्देशानुसार उन नक्शों को निकाल कर उनका भौतिक सत्यापन करना है और वे किस स्थिति में हैं इसका उल्लेख करना है। जिला अभिलेखागार का अमला और यहां काम कर चुके कर्मचारी पहले से ही विवादों के घेरे में है।
बिना सत्यापन ही बैठक की जानकारी को माना अंतिम सत्य
सीएलआर द्वारा गठित कमेटी के अध्यक्ष ने एक दिन समीक्षा बैठक ली। जिसमें सभी आरआई से जो आंकड़े बता दिये गए उसे ही अंतिम सत्य मान लिया गया। और इसी आधार पर तहसीलदारों को पत्र लिख कर निर्देशित कर दिया गया कि जहां भी प्रभार के दौरान जिसके कार्यकाल में नक्शा गायब हुआ है उन पर सख्त विभागीय और दण्डात्मक कार्रवाई करें। जिले में यह स्थिति गत 10 सालों से बनी हुई है ऐसे में इस निर्देश का असर क्या होगा सहज अंदाजा लगाा जा सकता है।
आरआई और पटवारी पहले से घेरे में
नक्शा गायब करने के मामले में जिले के कई आरआई और पटवारी पहले से गंभीर आरोपों के घेरे में है। कई बार इन पर भू-माफिया का साथ देने के गंभीर आरोप भी लगे हैं। लिहाजा दल ने बिना इन नक्शों के सत्यापन के आरआई की जानकारी को जिस तरीके सही मान लिया है उससे माना जा रहा है कि जानबूझ कर गड़बड़ी को छुपाने की तैयारी है। जानकारों का कहना है कि अभी भी जितने नक्शे गायब बताये जा रहे हैं हकीकत में उसके दोगुने नक्शे गायब है। अगर भौतिक सत्यापन नक्शों (सत्यापित नक्शे) की उपलब्धता से हो तो बड़ा खुलासा होगा।
400 राबूत भी नक्शा विहीन जैसे
बताया गया है कि जिले में नक्शा विहीन से इतर 400 गांव ऐसे हैं जिनके नक्शे राबूत श्रेणी में है। लेकिन भू-अभिलेख का अमला और मैदानी राजस्व अमला भी यह स्वीकार करता है कि राबूत श्रेणी के नक्शे भी नक्शा विहीन जैसे ही है। इनसे कोई काम होने की स्थिति नहीं बनती है। इन्हें भी तत्काल सही कराने की आवश्यकता है।
अभी यह स्थिति सामने आई है
तहसील - आंशिक नक्शा विहीन गांव - नक्शा विहीन गांव
रघुराजनगर - 1 - 8
रामपुर बाघेलान - 5 - 19
रामनगर - 6 - 1
अमरपाटन - 1 - 9
मैहर - 13 - 2
उचेहरा - 0 - 11
नागौद - 11 - 27
कोठी - 0 - 11
मझगवां - 1 - 12
बिरसिंहपुर - 2 - 15
कोटर - 4 - 6
Published on:
14 Mar 2020 01:26 am
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