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युवा दिवस: विंध्य में युवाओं के लिए संभावनाएं अपार, सिर्फ सही नीति का इंतजार

युवाओं का शिक्षा से लेकर रोजगार तक के लिए साल दर साल बढ़ता जा रहा पलायान, जिम्मेदार खामोश

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सतना

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Suresh Mishra

Jan 12, 2020

youth Day 2020: Migration of youth from education to employment

youth Day 2020: Migration of youth from education to employment

सतना/ आज युवा दिवस है। युवा यानी देश का भविष्य। विंध्य में देश का भविष्य बेरोजगारी जैसी समस्या से जूझ रहा। यह समस्या कई वर्षों से चली आ रही। बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, मुम्बई, सूरत समेत अन्य बड़े महानगरों की ओर रुख कर रहा है। हालांकि इस समस्या का जन्म स्कूली शिक्षा के दौरान ही हो जाता है।

यहां शिक्षा नीति सही नहीं होने के कारण छात्र बड़े शहरों को जाते हैं और वहीं के रहकर हो जाते हैं। जबकि, विंध्य में कई बड़ी कम्पनियां हैं, रोजगार के साधन हैं। ऐसे में अगर रोजगार परख शिक्षा को तवज्जो दी जाए तो रोजगार मिलेगा और युवाओं का पलायन रुकेगा। प्रस्तुत है विंध्य का परिदृश्य:-

सतना: हर साल पलायन कर रही जिले की प्रतिभा
जिले में हर साल करीब २५ हजार विद्यार्थी इंटर पास करते हैं, लेकिन उच्च शिक्षा के लिए बेहतर शैक्षणिक संस्थान न होने के कारण इनमें से ज्यादातर विद्यार्थियों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। खासकर, व्यवसाय परक शिक्षा उपलब्ध कराने वाले संस्थान न होने के कारण जिले की प्रतिभा यहां से पलायान करने को मजबूर है। पढ़ाई करते-करते ज्यादातर युवा महानगरों में ही जॉब शुरू कर देते हैं और बाद में परिवार भी शिफ्ट कर लेते हैं। यह स्थिति एका-एक पैदा नहीं हुई है। बल्कि, दशकों से जिले का यही हाल है। जिले में पर्यटन, माइनिंग व उद्योग-धंधों की भरपूर संभावनाएं हैं, इसके बावजूद रोजगार परख शिक्षा उपलब्ध कराने वाले शिक्षण संस्थान न होना ङ्क्षचता का विषय है। मेडिकल, इंजीनियरिंग, कृषि, व्यवसाय व प्रबंधन सहित अन्य पाठ्यक्रमों का अध्ययन की रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को भी हर साल निराशा झेलनी पड़ रही है।

रीवा: युवानीति नहीं होने से दूसरे शहरों की ओर रुख कर रहा युवा
प्रदेश के बड़े शहर इंदौर, भोपाल, जबलुपर सहित आसपास के राज्य कोटा, प्रयागराज, दिल्ली में रहने वाला रीवा का युवा जिले की राजनीति, नशा, झूठ के मुकदमों, भ्रष्टाचार, सरकारी पैसों का दुरुपयोग, खनिज माफिया, भू-माफिया से नफरत करता है। उसका मानना है कि यहां का पानी, हवा प्रदूषित हो चुकी है। बदले की राजनीति ने रीवा का माहौल ही बदल दिया है। माहौल नहीं होने और युवा नीति नहीं होने से युवाओं का पलायन बढ़ा है। रीवा के बोदाबाग अजगरहा निवासी विनीत शर्मा दिल्ली में रहने लगे हैं। शर्मा कहते हैं कि रीवा में स्किल डेवलपमेंट की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। अगर जल्द सरकारी सियासतदानों और बुद्धिजीवियों ने युवा वर्ग के भविष्य की कोई नीति नहीं बनाई तो आने वाले 10 साल में परिवार और बुजुर्ग माता-पिता अपने बच्चों के पास शिफ्ट हो जाएंगे।

सिंगरौली: तकनीकी कॉलेज नहीं, रोजगार की बात तो दूर
ऊर्जाधानी के नाम से मशहूर सिंगरौली जिले में वैसे तो कई राष्ट्रीय स्तर की कंपनियां हैं। इसके बावजूद युवा रोजगार के लिए दूसरे शहरों की राह पकड़ रहे हैं। हर रोज बैढऩ के अम्बेडकर चौक पर काम की तलाश में आने वाले सैकड़ों युवाओं की भीड़ और कलेक्टर की जनसुनवाई में नौकरी दिलाने की अपील के साथ पहुंचने वाले दर्जनों आवेदन जिले में बेरोजगारी की भयावहता को बयां करने के लिए पर्याप्त साबित होते हैं। हालांकि बेरोजगारी को देखते हुए कलेक्टर केवीएस चौधरी ने एक सिक्योरिटी कंपनी के साथ अनुबंध कर एक हजार युवाओं को सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी दिलाने और युवतियों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिलाने की व्यवस्था की है, लेकिन संरचनात्मक विकास के अभाव में कलेक्टर की यह कवायद ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है। कोयला सहित अन्य खनिजों के खनन का हब बने इस जिले में लंबे समय से एक माइनिंग कॉलेज की जरूरत महसूस की जा रही है। मंत्री-विधायक के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान मुख्यमंत्री ने जिले में माइनिंग कॉलेज खुलवाने का आश्वासन दिया, लेकिन अभी तक सारी कवायद केवल जमीन चिह्नित करने तक सीमित है। जिले के इकलौते पॉलीटेक्निक कॉलेज को छोड़ दिया जाए तो यहां कोई तकनीकी कॉलेज नहीं है। इंजीनियरिंग व मेडिकल की पढ़ाई के साथ नौकरी के लिए युवा दूसरे जिलों की राह पकड़ते हैं। वजह यहां जिले में न ही इंजीनियरिंग कॉलेज है और न ही मेडिकल कॉलेज। दोनों कॉलेजों की कवायद केवल वादों तक सीमित है।

सीधी: ठंड के मौसम में रोजगार के लिए यूपी जाते हैं युवा
जिले के युवाओं को व्यावसायिक शिक्षा की सुविधा नहीं नसीब हो पा रही। यहां व्यावसायिक पाठ्यक्रम के लिए महाविद्यालयों का अभाव है। तमाम कोशिश के बाद आईटीआई व पॉलीटेक्निक कॉलेज का संचालन तो किया गया किंतु भवन का अभाव होने के कारण बहुत कम ट्रेडों का संचालन हो पाया। इसके कारण युवाओं को अच्छी शिक्षा प्राप्त करने के लिए बड़े शहरों की शरण लेनी पड़ती है, किंतु गरीब होनहारों का सपना दफन हो रहा है। उनकी आर्थिक स्थिति बड़े शहरों में रहकर शिक्षा अर्जित करने की नहीं है। जिले में कृषि, मेडिकल कॉलेज की दरकार लंबे समय से बनी हुई है। जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण यह सौगात नहीं मिल पा रही है। इससे युवाओं को निराशा हाथ लग रही है। बेरोजगारी का आलम क्या है? इस बात से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि ठंड के मौसम में सीधी जिले के युवा अपने पूरे परिवार के साथ पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में धान की कटाई के लिए प्रतिवर्ष जाते हैं। वहां महीने तक रुककर धान काटते हैं। इसके बदले उन्हें धान ही दिया जाता है। इस धान से वे वर्षभर पेट पालने को मजबूर रहते हैं। बहुत से युवा रोजगार के लिए महानगर सूरत, गुजरात सहित मुंबई की शरण लेने को मजबूर हैं।

पन्ना: हीरा उत्पादक जिले में पॉलिसिंग यूनिट नहीं
पन्ना हीरे का बड़ा उत्पादक जिला है। फर्शी पत्थर और रेत के खनन का बड़ा कारोबार भी यहां होता है। उथली हीरा खदानों से हर साल कई हजार कैरेट हीरा निकाला जाता है। इसकी नीलामी भी पन्ना में ही होती है। इसके बाद भी जिले में हीरा खनन आधारित तकनीकी शिक्षा की व्यवस्था नहीं। एक भी हीरा कटिंग-पॉलिसिंग की इकाई नहीं, न ही खनन से जुड़ी तकनीकी शिक्षा की व्यवस्था है। ऐसे में बेरोजगार युवा कमाने-खाने के लिए मुम्बई, दिल्ली और सूरत की ओर जा रहा है। आंकड़ों की बाजीगरी के बल पर भले ही पन्ना को मनरेगा में बेहतर काम का राष्ट्रीय स्तर का अवॉर्ड मिला हो पर जमीनी सच्चई अलग ही है। जिले में मनरेगा व्यापक भ्रष्टाचार की शिकार है। यही कारण है कि यहां रोजगार का सृजन नहीं हो पाता और प्रतिदिन 50 से अधिक लोग रोजगार के लिए पलायन करते हैं। तकनीकी शिक्षण संस्थानों का जिले में अभावा है। एक इंजीनियरिंग कॉलेज तक नहीं। पॉलीटेक्निक कॉलेजों में दशकों पुराने पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कराई जाती है। एग्रीकल्चर कॉलेज भी नहीं खुल सका है। जिले के सबसे बड़े छत्रसाल कॉलेज में भी सदियों पुराने पाठ्यक्रमों की ही पढ़ाई की जा रही है। ऐसे में शिक्षा के लिए भी युवाओं को दूसरे शहरों की ओर पलायन करना पड़ता है।

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