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सवाई माधोपुर

चंबल में हुआ नन्हें घडिय़ालों का जन्म

पालीघाट पर अण्डों से बाहर आए बच्चे

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सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर के बाद अब राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य से खुशखबर सामने आई है। यहां राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य के पालीघाट में गुरुवार को 60 नन्हें घडिय़ालों का जन्म हुआ है। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पालीघाट पर तीन नेटस से 60 नन्हें घडिय़ाल अण्डों से बाहर आए है। गौरतलब है कि वन विभाग की ओर से घडिय़ालों के प्रजनन के लिए नेस्टिंग पद्धति अपनाई जाती है।
मई माह होता है प्रजनन काल
वन अधिकारियों ने बताया कि आम तौर पर मई का माह घडिय़ालों का प्रजनन और नए घडिय़ालों के बच्चों के जन्म का समय होता है। पालीघाट पर अण्डो से 60 बच्चों का जन्म हुआ है। ये सभी अब करीब 15 से 20 दिनों तक पानी में बिना खाए पीए ही जीवन यापन करेंगे और इसके बाद प्राकृतिक रूप से शिकार के गुर सीखेंगे। हालांकि आम तौर पर घडिय़ालों के बच्चों की सरवाइवल रेट काफी कम होती है और जुलाई में बारिश आने की वजह से अधिकतर बच्चों की मौत हो जाती है।
एसीएस ने किया ट्वीट
वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल ने गुरुवार को ट्वीट कर चंबल के पालीघाट पर घडिय़ालों का जन्म होने के बारे में जानकारी दी है। साथ ही उनकी ओर से घडिय़ाल संरक्षण की दिशा में वन विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यो की प्रशंसा भी की गई है।
चंबल में नौ सौ से अधिक घडिय़ाल
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य के पालीघाट व उसके आसपास के क्षेत्र में वर्तमान में 900 से अधिक घडिय़ालों का विचरण है। इनकी संख्या 940 के आसपास बताई जा रही है। ऐसे में अब नन्हें घडिय़ालों के जन्म के साथ ही चंबल में एक बार फिर घडिय़ालों के कुनबे में इजाफा होने के आसार जताए जा रहे हैं।
इनका कहना है…
पालीघाट पर तीन नेट में से 60 घडिय़ाल अण्डो से बाहर आए हैं। अब से करीब 15 से बीस दिनों तक बिना खाए पीए रहेंगे और इसके बाद प्राकृतिक रूप से शिकार के गुर सीखेंगे। हालांकि बारिश का समय जल्द ही शुरू होने वाला है। ऐसे में इनकी सरवाइवल दर काफी कम रहती है।
– अनिल यादव, उपवन संरक्षक, राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य, सवाईमाधोपुर।