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सवाई माधोपुर

रणथम्भौर में लगातार हो रही मौत, लापता भी हो रहे बाघ फिर भी अधिकारियों पर मेहरबानी

बाघ संरक्षण पर लगातार उठ रहे सवाल फिर भी अब तक सीसीएफ पर नहीं कार्रवाई

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सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर में पिछले कुछ दिनों से बाघ बाघिन व शावकों की मौत के साथ ही रणथम्भौर से बाघ बाघिनों व शावकों के लापता होने का सिलसिला लगातार जारी है। साथ ही शिकार के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में एक ओर तो वन्यजीव प्रेमियों में रोष है और दूसरी ओर विभाग व सरकार की ओर से रणथम्भौर के उच्च अधिकारियों पर अब भी मेहरबानी ही की जा रही है। बाघिन टी-114 व उसके शावक की मौत के बाद हालांकि सरकार की ओर से कार्रवाई करते हुए रणथम्भौर बाघ परियोजना के उपवन संरक्षक संग्राम सिंह को एपीओ किया गया है लेकिन रणथम्भौर में बाघ संरक्षण की कमान संभालने वाले मुखिया सीसीएफ पर अब भी सरकार व विभाग के उच्च अधिकारियों की नजरे इनायत का दौर जारी है। लगातार बाघों की मौत, लापता होने और वन्यजीवों का शिकार होने के बाद भी अब तक सरकार व विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इससे वन्यजीव प्रेमियों में रोष है।
मामले एक जैसे तो कार्रवाई अलग-अलग क्योंं
पूर्व में कोटा के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में भी रणथम्भौर की बाघिन टी-114 व शावक की मौत जैसा ही एक मामला सामने आया था। दरअसल पूर्व में 19 दिसम्बर 2018 को बाघिन टी-106 को रणथम्भौर से मुकुंदरा में शिफ्ट किया गया था। वहां पर बाघिन ने जून 2020 में बाघिन दो शावकों को जन्म दिया था। लेकिन बाद में 3 अगस्त को बाघिन की मौत हो गई थी। इससे पहले कई दिनों तक वन विभाग को बाघिन के शावक अकेले नजर आए थे लेकिन फिर भी वन विभाग ने बाघिन की तलाश नहीं की थी बाद में शावकों की भी मौत हो गई थी। इस मामले में सरकार की ओर से कड़ा रुख अपनाया गया था और मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए मुकुंदरा के तात्कालीन उपवन संरक्षक टी मोहनराज, तात्कालीन सीसीएफ आनंद मोहन और एक सहायक वन संरक्षक राजेश कुमार शर्मा को निलंबित किया गया था लेकिन रणथम्भौर के मामले में अब तक सरकार की ओर से केवल उपवन संरक्षक संग्राम सिंह पर ही कार्रवाई की गई है। ऐसे में रणथम्भौर के वन्यजीव प्रेमियों में रोष है।
एक्सपर्ट व्यू…
रणथम्भौर में बाघिन टी-114 व उसके शावक की मौत का मामला मुकुंदरा में बाघिन एमटी-2 व उसके शावकों की मौत के मामले से मिलता जुलता है। पूर्व में मुकुंदरा के मामले में सरकार की ओर से कड़ा रुख अपनाते हुए मुकुंदरा के तात्कालीन सीसीएफ, उपवन संरक्षक का ताबदला किया गया था साथ ही एक एसीएफ को निलंबित भी किया गया था लेकिन रणथम्भौर में बाघिन व शावक की मौत के मामले में केवल उपवन संरक्षक के ही खिलाफ कार्रवाई की गई है।
– तपेश्वर सिंह भाटी, अध्क्षक्ष मुकुंदरा हिल्स पर्यावरण संरक्षण समिति।