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बरसात की कामना करते हुए निकाली घासभैरू की सवारी

बरसात की कामना करते हुए निकाली घासभैरू की सवारी

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शिवाड़. कस्बे में रविवार को ग्रामीणों ने बरसात की कामना करते हुए घासभैरू की सवारी निकाली। ग्रामीणों ने बताया कि इस अवसर पर शिवाड़ कस्बे के सब्जी मंडी से शुरू हो कर कस्बे के सभी रास्तों से गुजरती हुई वापस सब्जीमंडी के पास पहुंची।

न्यू पेंशन स्कीम का विरोध
सवाईमाधोपुर. वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ के संभागीय संयुक्त सचिव अमित भटनागर, अब्दुल खालिक एवं मंडल अध्यक्ष जीपी यादव रविवार को सवाईमाधोपुर पहुंचे। इस अवसर पर रेलकर्मियों से संवाद करते हुए युवा रेल कर्मचारियों को गुमराह होने से बचने का आह्वान किया। जिन लोगों ने न्यू पेंशन स्कीम को लागू कराने का कार्य किया।

अब वही लोग इसे बंद कराने के लिए युवा रेलकर्मी को गुमराह कर रहे हैं। वेस्ट सेंट्रल रेलवे शुरू से इस स्कीम का विरोध करता आया है। प्रवक्ता पुष्पेन्द्र शर्मा ने बताया कि इससे पूर्व उनके आगनम पर कर्मचारियों ने माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस दौरान शाखा अध्यक्ष तेजेन्द्र सिंह, सचिव एसपी शर्मा, रामसहाय, जीपी मंगल व महावीर सिंह आदि मौजूद थे।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जनता से हुए रुबरू
बालेर. अटलसेवा केन्द्र बालेर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लक्ष्मण दास ने जन सुनवाई की। उन्होंने लोगों को मोबाइल का सदुपयोग करने के लिए कहा। वहीं छोटे मोटे झगड़ों को आपसी समझाइश से हल करने के लिए कहा। इसके अलावा यातायात नियमों की पालना करने के निर्देश भी दिए। जन संवाद कार्यक्रम में थानाधिकारी हेमेन्द्र चौधरी, हैडकांस्टेबल दौलत सिंह, चतरूराम, खुशीराम, सरपंच प्रतिनिधि राधेश्याम बैरवा, मानवेन्दर सिंह आदि मौजूद थे।

लोककथा : दो मिनट

ए क युवक ने विवाह के दो साल बाद परदेस जाकर व्यापार करने की इच्छा पिता से कही। पिता ने स्वीकृति दी तो वह अपनी गर्भवती पत्नी को मां-बाप के जिम्मे छोड़कर व्यापार करने चला गया। परदेस में मेहनत से बहुत धन कमाकर वह जहाज से वापस घर लौट रहा था। जहाज में उसे एक विद्वान व्यक्ति से कई ज्ञानसूत्र मिले। पहले ज्ञानसूत्र को उसने किताब में लिख लिया कि कोई भी कार्य करने से पहले दो मिनट रुककर सोच लेना। कई दिनों की यात्रा के बाद रात्रि के समय सेठ अपने नगर को पहुंचा।

उसने सोचा इतने सालों बाद घर लौटा हूं तो क्यों न चुपके से बिना खबर दिए सीधे पत्नी के पास पहुंच कर उसे आश्चर्य उपहार दूं। घर के द्वारपालों को मौन रहने का इशारा करके सीधे अपने पत्नी के कक्ष में गया तो वहां का नजारा देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। पलंग पर उसकी पत्नी के पास एक युवक सोया हुआ था। वह अत्यन्त क्रोध में सोचने लगा कि मैं परदेस में भी इसकी चिंता करता रहा और ये यहां अन्य पुरुष के साथ है। दोनों को जिन्दा नहीं छोड़ंूगा। क्रोध में तलवार निकाल ली। वार करने ही जा रहा था कि उतने में ही उसे किताब में लिखा ज्ञानसूत्र याद आया कि कोई भी कार्य करने से पहले दो मिनट सोच लेना।

सोचने के लिए रुका। तलवार पीछे खींची तो एक बर्तन से टकरा गई। बर्तन गिरा तो पत्नी की नींद खुल गई। जैसे ही उसकी नजर अपने पति पर पड़ी, वह खुश हो गई और बोली- 'आपके बिना जीवन सूना-सूना था। इन्तजार में इतने वर्ष कैसे निकाले यह मैं ही जानती हूं।Ó सेठ तो पलंग पर सोए पुरुष को देखकर कुपित था। पत्नी ने युवक को उठाने के लिए कहा- 'बेटा जाग। तेरे पिता आए हैं।

युवक उठकर जैसे ही पिता को प्रणाम करने झुका, माथे की पगड़ी गिर गयी। उसके लम्बे बाल बिखर गए। सेठ की पत्नी ने कहा- 'स्वामी, ये आपकी बेटी है। पिता के बिना इसके मान को कोई आंच न आए, इसलिए मैंने इसे बचपन से ही पुत्र के समान पालन-पोषण और संस्कार दिए हैं।Ó यह सुनकर सेठ की आंखों से अश्रुधारा बह निकली। उसने पत्नी और बेटी को गले से लगा लिया।

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