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…आखिर कैसे तैयार होंगे कल्पना व डॉ. कलाम

गंगापुरसिटी. विज्ञान की पढ़ाई में प्रयोगों की महती जरूरत होती है। इसके बिना विद्यार्थी विज्ञान की बारीकियों को नही समझ सकते। साथ ही यह उनके डॉक्टर, इंजीनियर व वैज्ञानिक बनने के सपनों को पंख लग सके। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकारी स्कूलों मेें विज्ञान प्रयोगशालाएं स्थापित की गई थी, लेकिन इन प्रयोगशालाओं की वर्तमान स्थिति को देखते हुए बच्च्चों के डॉक्टर कलाम व कल्पना चावला बनने के सपनों की तस्वीर धुंधली होती नजर आ रही है।

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...आखिर कैसे तैयार होंगे कल्पना व डॉ. कलाम

...आखिर कैसे तैयार होंगे कल्पना व डॉ. कलाम

गंगापुरसिटी. विज्ञान की पढ़ाई में प्रयोगों की महती जरूरत होती है। इसके बिना विद्यार्थी विज्ञान की बारीकियों को नही समझ सकते। साथ ही यह उनके डॉक्टर, इंजीनियर व वैज्ञानिक बनने के सपनों को पंख लग सके। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकारी स्कूलों मेें विज्ञान प्रयोगशालाएं स्थापित की गई थी, लेकिन इन प्रयोगशालाओं की वर्तमान स्थिति को देखते हुए बच्च्चों के डॉक्टर कलाम व कल्पना चावला बनने के सपनों की तस्वीर धुंधली होती नजर आ रही है।

यहां स्कूलों में संचालित प्रयोगशालाएं कबाड़ घर जैसी प्रतीत होती है। वहीं लैब में बिखरे व धूल धूसरित होते उपकरण व छत से झर झर गिरता प्लास्टर व बारिश से दीवारों पर आई सीलन इनकी बदहाली को बयां करने के लिए काफी है। साथ ही यहां बाल वैज्ञानिकों की सुरक्षा के लिए किसी प्रकार के वंदोबस्त भी नही किए गए है।


बदतर हालात में प्रयोगशालाएं


शहर के राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में संचालित विज्ञान प्रयोगशाला में सार-संभाल के अभाव में उपकरण धूल-धूसरित होकर कबाड़ के रूप में तब्दील होते नजर आ रहे है। लैब कक्ष की भौतिक स्थिति भी बिगड़ी हुई है। यहां संचालित तीन लैबों की साफ सफाई के लिए लैब बॉय नही है। ऐसे में समय पर साफ-सफाई नही हो पाती है। साथ ही रसायनों में बारिश का पानी पडऩे से हमेशा हादसे का अंदेशा बना रहता है।

प्रयोगशाला में मौजूद छात्राओं से इस बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि यहां लैब में समय-समय पर प्रयोग कराए जाते है, लेकिन उपकरणों की साफ-सफाई उन्हें स्वयं करनी पड़ती है। यहां राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में भी हालात सही नही मिले। यहां बायोलॉजी प्रयोगशाला कक्ष क्षतिग्रस्त होने से प्रयोग में काम आने वाले उपकरणों को दूसरे कक्ष में ले जाकर प्रयोग सम्पन्न कराए जाते है। यहां भी साफ सफाई के अभाव में प्रयोगशाला उजड़ी हुई नजर आ रही थी।


इन सुविधाओंं की दरकार


स्कूलों में प्रयोगशाला संचालन के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं जिनके तहत इन प्रयोग शालाओं का संचालन किया जाता है। इसमें प्रयोगशाला कक्ष में दो दरवाजे, अग्निशमन यंत्र, गैस निकलने के लिए एक्जास्ट फैन, प्राथमिक उपचार किट एवं प्रयोग कार्य संपादित करते समय निकलने वाली जहरीली गैसों आदि से बचाव के लिए मास्क, एप्रिन, दास्ताने एवं चश्मे आदि होने चाहिए, लेकिन यहां संचालित लैब अनिवार्य अधिकांश नियमों से किनारे किए हुए है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही बड़े हादसे का सबब बन सकती है।


प्रयोगशाला के लिए जरूरी उपकरण


फ्लास्क, वूल्फ बोतल, बीकर्स, परखनली, बर्नर, स्लाइड, प्लास्टिक की बोतल, थर्मामीटर, बानसेन वर्नर, गैल्वानोमीटर, मोर्टार, पिनर, माइक्रो स्कोप, पेट्री डिश प्रयोगशाला स्टैण्ड एवं सल्फर डाई ऑक्साइड, क्लोरीन, ब्रोमीन, सोडियम, हेलाइट्स, पोटेशियम नाइटे्रट व अमोनियम नाइटे्रट जैसे रसायन होते है। साथ ही पानी की उपलब्धता एवं अपशिष्ट पदार्थों की निकासी व उपकरणों की सफाई आदि के लिए सिंक की व्यवस्था होना जरूरी है।


प्रयोगशाला की साफ-सफाई के लिए यहां लैब बॉय की सुविधा नही है। इसके चलते परेशानी होती है।
-वर्णिका पचौरी, छात्रा


यहां प्रयोगशाला में कई आवश्यक सामग्री का अभाव हैं ऐसे में कई प्रयोग नही हो पाते है। समय पर प्रयोग सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए।
-अन्नू सैनी, छात्रा


समय पर सार-संभाल नही होने से प्रयोगशाला के उपकरण नाकारा साबित हो रहे है। प्रयोग के समय इनसे सही परिणाम नही मिल पाते है।
-संजना मीना, छात्रा


लैब में पानी की कोई व्यवस्था नही है। हमे इसके लिए परेशान होना पड़ता है। साथ साथ ही हादसे के समय सुरक्षा के लिए इंतजामात नाकाफी है।
-भावना शर्मा, छात्रा


प्रयोगशाला कक्ष क्षतिग्रस्त होने से परेशानी बनी हुई है। हालांकि दूसरे कक्ष में प्रयोग कार्य कराए जाता है। इस संदर्भ में विभाग को सूचित कर दिया गया है।
-देवीलाल मीना, प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय


प्रयोगशाला सामग्री आलमारियों में रहती है। लैब बॉय की कमी बनी हुई है। हालांकि समय-समय पर सफाई कराई जाती है। इस बारे में विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।
-गायत्री वरमेन्दु, प्रधानाचार्या राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय

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