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रणथम्भौर में धड़ल्ले से हो रही अवैध चराई

बाहरी जोनों में मवेश कर रहे विचरण वन अधिकारी नहीं गंभीर
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सवाई माधोपुर

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Abhishek Ojha

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Updated: 21 Oct 2018, 12:04 PM IST

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सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में यूं तो पालतू मवेशियों की चराई पर रोक है लेकिन इन दिनों वन अधिकारियों की उदासीनता व लचर रवैए के चलते रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में अवैध चराई धड़ल्ले से हो रही है लेकिन अधिकारी इस ओर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान के आस पास बसे गांवों के ग्रामीण पालतू मवेशियों को अभयारण्य की सीमा में ले जाकर चराई करा रहे हैं। ऐसे में वन संपदा को नुकसान हो रहा है।
बहारी जोनों में आसानी से हो रही चराई
रणथम्भौर के बाहरी जोनों(6 से 10) में अवैध चराई परवान पर है। फलौदी, खण्डार आदि कई इलाकों में ग्रामीण जंगल की सीमा में मवेशियों को चरा रहे हैं। ऐसे में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है।
जान का भी रहता है खतरा
अभयारण्य की सीमा में मवेशियों को चराने पर वन्य जीवों के विचलित होने व मवेशियों के शिकार के लिए हमला करने की आशंका रहती है। ऐसे में हादसे की संभावना भी बनी रहती है। पूर्व में भी कई बार वन्य जीव चराई कराने वाले ग्रामीणों पर हमला कर चुके हैं।
ये है नियम
नियमानुसार रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान के क्षेत्र में मवेशियो की चराई पर प्रतिबंध है। वन क्षेत्र मेंं अवैध प्रवेश वन संपदा को नुकसान पहुंचान आदि कई प्रावधानों में दो से तीन साल तक की सजा व जुर्माने का प्रावधान है।
निगरानी के दावे खोखले
हालांकि वन विभाग जंगल में चराई पेड़ो की कटाई आदि अवैध गतिविधियों को रोकने के दावे करता है। इसके लिए विभाग की ओर से अभयारण्य में वन चौकियां बनाई गई है और वनकर्मियों द्वारा जंगल में वन्य जीवों की ट्रैकिंग व गशत भी की जाती है। लेकिन इसके बाद भी रणथम्भौर में अवैध गतिविधियां हो रही है। वहीं अवैध चराई के कारण रणथम्भौर के बाहरी जोनों में अवैध चराई होने से पार्क भ्रमण पर गए पर्यटकों को भी नरेशानी होती है।
इनका कहना है....
रणथम्भौर में अवैध चराई पर प्रतिबंध है इसके लगातार गशत कराई जाती है। अभी चराई के संबंध में शिकायत नहीं मिली है। फिर भी बाहरी जोनों में गशत बढ़ाई जाएगी।
- मुकेश सैनी, उपवन संरक्षक, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।

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