राजगुरु का निवास स्थान था जोगी महल
सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर की प्राचीन धरोहर जोगी महल का रणथम्भौर के इतिहास में विशेष धार्मिक महत्व है। योगी नाथ समाज की जागा की पोथियों में वर्णित उल्लेख व काला-गोरा भैरव मंदिर के पुजारी रामविलास योगी के अनुसार जोगी महल में हम्मीर के राजगुरु सत्यनाथ तपस्या करते थे। इनकी समाधि जोगी महल में बताई जाती है।
सुरक्षा की दृष्टि से महत्व
वहीं इतिहास कारों की माने तो जोगी महल का धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ सामरिक दृष्टि से भी विशेष महत्व है। इतिहासकार जोगी महल को सैनिकों का विश्राम स्थल भी मानते हैं। उनका कहना कि सामरिक सुरक्षा के लिए जोगी महल से सैनिक किले व आस-पास के क्षेत्रों की सीमाओं पर निगरानी रखते थे।
36 खंभों की छतरी
रणथम्भौर के 32 खंभों की छतरी के बारे में तो हर कोई जानता है, रणथम्भौर में दुर्ग के पास गुप्त गंगा की ओर घोड़ों के अस्तबल के पास 36 खंभों की छतरी है। इस छतरी का निर्माण राव हम्मीर देव ने गुरु सत्यनाथ के सम्मान में करवाया था। इस छतरी में शिवलिंग को ऊपर की ओर स्थापित किया गया है।