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क्यो बन गई जुर्म की फैक्ट्री…एशिया की सबसे बड़ी सीमेंट फैक्ट्री में शुमार द जयपुर उद्योगए सीमेंट उत्पादन के लिए दूर-दूर तक मशहूर थी

शुमार 'द जयपुर उद्योगएÓ सीमेंट उत्पादन के लिए दूर-दूर तक मशहूर थी  

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सवाईमाधोपुर. किसी जमाने में एशिया की सबसे बड़ी सीमेंट फैक्ट्री में शुमार 'द जयपुर उद्योगÓ सीमेंट उत्पादन के लिए दूर-दूर तक मशहूर थी, लेकिन अब बंद होने के बाद वीरान फैक्ट्री में अपराधियों के जुर्म का जन्म होने लगा, जो अब तक जारी है। लोग की नजर में अब ये जुर्म की फैक्ट्री बनती जा रही है। हिस्ट्रीशीटर संजय बिहारी के कई आपराधिक मामले भी सीमेंट फैक्ट्री से जुड़े हुए थे। वहीं अपराध की राह भी उसने सीमेंट फैक्ट्री से ही पकड़ी थी। संजय जैसे यहां से कई ऐसे हार्डकोर अपराधी भी पैदा हुए जिन्होंने जिले ही नहीं बल्कि राज्य के कई क्षेत्रों में अपनी धाक जमाई।



आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो मानटाउन थाने के रिकॉर्ड में दर्ज हिस्ट्रीशीटरों में कुछ को छोड़कर ज्यादातर सीमेंट फैक्ट्री क्षेत्र से ही निकले। पुलिस की माने तो सीमेंट फैक्ट्री के बंद होने के बाद बेरोजगारी और आर्थिक तंगी झेल रहे कुछ लोगों ने अन्य जगह पर नौकरी करना शुरू कर दिया, लेकिन कुछ लोगों ने अपराध को चुना और इसमें आगे बढ़ते चले गए। वहीं इसका अंजाम भी गाहे-बगाहे बुरा ही रहा।



पुलिस की मिलीभगत भी आई सामने
सीमेंट फैक्ट्री में अपराध पर अंकुश लगाने के लिए सीमेंट फैक्ट्री में अस्थाई चौकी भी बनाई गई थी, लेकिन खुद सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों के भी चोरों के साथ लिप्त की फैक्ट्री के लोग शिकायतें करने लगे थे। कई पुलिसकर्मी वहां से हटाए, कुछ के खिलाफ कार्रवाई भी हुई। बाद में वहां से अस्थाई पुलिस चौकी ही हटा दी गई। वर्तमान में वहां कोई चौकी नहीं है। सीमेंट फैक्ट्री प्रबंधन के निजी सुरक्षाकर्मी लगे हैं।



जिले में 166 एचएस
पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में वर्तमान में 166 हिस्ट्रीशीटर है। इनमें बामनवास थाने में 8, बाटोदा में एक, गंगापुरसिटी में 38, गंगापुरसिटी सदर में 16, वजीरपुर में 3, सवाईमाधोपुर कोतवाली में 20, मानटाउन में 13, रवांजना में 7, सूरवाल में 6, बहरावण्डा कलां में 3, बौंली में 7, चौथ का बरवाड़ा में 6, खण्डार में 15 तथा मलारना डूंगर थाने में 14 हिस्ट्रीशीटर शामिल हैं।



अब तक 4 की मौत
पुलिस के अनुसार मानटाउन थाना क्षेत्र में 18 हिस्ट्रीशीटर थे। इनमें चार एचएस की मौत हो गई। जबकि एक की न्यायालय के आदेश पर फाइल बंद कर दी गई है। पुलिस ने बताया कि गुड्डू उर्फ चित्रांगन, सत्तार खान खैरदा, तथा मंजूर अली की मौत होने के बाद उनकी फाइलें बंद कर दी गई। संजय बिहारी की मौत के बाद उसकी फाइल बंद करने की कार्रवाई चल रही है। इनमें से गुड्डू, सत्तार व संजय का फैक्ट्री में हुई चोरी की वारदातों में संबंध थे।



बंद फैक्ट्री के लोहे ने सिखाई चोरी
पुलिस ने बताया कि सीमेंट फैक्ट्री 1987 में बंद हो गई थी। सीमेंट फैक्ट्री बंद होने के बाद उसके पुर्जे कबाड़ होते गए। सुरक्षा भी पूरी तरह नहीं हो पाई। ऐसे में कुछ लोगों ने फैक्ट्री के लोहे पर आपराधिक नजरें डालना शुरू किया। शुरुआत में चोरी की एक-दो वारदात होती थी, लेकिन बाद में ये बड़े पैमाने पर होने लगी। हद तो तब हो गई जब फैक्ट्री के अंदर ही चोर गैस कटर से लोहा काटने लगे। वाहनों में भरकर रातों रात लोहा दूसरे जिलों में बेच दिया जाता था।



डेढ़ दशक में हो गई खोखली
लगातार चोरी की वारदातों से वर्ष 2000 के बाद बीते डेढ़ दशक में तो फैक्ट्री की करोड़ों की मशीनें व कलपुर्जे गायब हो गए। धीरे-धीरे फैक्ट्री खोखली होती चली गई। आज भी फैक्ट्री के अंदर ज्यादातर कलपुर्जे गायब ही मिलेंगे। एचएच सत्तार कबाड़ी के खिलाफ तो फैक्ट्री का लोहा बेचने के कई मामले दर्ज हुए थे।



सीमेंट फैक्ट्री बंद होने के बाद बेरोजगारी बढ़ गई। लोग लोहा चोरी करने में लिप्त हो गए। चोरी की प्रतिस्पर्धा के चलते अपराध बढ़ता गया। एचएस पर नियमित निगरानी रखी जा रही है। उनकी गतिविधियों के बारे में एचएस पत्रावली में लिखा जाता है। अपराध में लिप्त पाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
सुभाषचंद्र मिश्रा, पुलिस उपाधीक्षक शहर सवाईमाधोपुर


लोग बोले...
संजय सिकरवार ने बताया कि उद्योग धंधे के नाम पर सवाईमाधोपुर जिले में कुछ भी नहीं है। ऐसे में जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधि, सांसद व विधायक को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
पण्डित प्रमोद



शर्मा का कहना है कि फैक्ट्री बंद होने से यहां के लोग बेरोजगारी का दंश झेल रहे है।
रामजीलाल ने बताया कि बेरोजगारी के चलते लोग पहले छोटे मोटे अपराधों में लिप्त होते हंै। यहां पर रोजगार के साधन मुहैया कराने की जरूरत है।

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