
बजरिया में संचालित बीएसएनएल कार्यालय।
सवाईमाधोपुर. कभी घरों की शान मानी जाने वाली ट्रिन-ट्रिन की आवाज अब घरों से गायब हो रही है। लैंडलाइन या बेसिक टेलीफोन घरों से गायब होकर सरकारी दफ्तरों तक ही सिमट कर रह गए हैं। खासकर स्मार्टफोन के आने से गत दशक में बेसिक फोन में करीब तीन गुना गिरावट आई है।
ये हैं प्रमुख कारण
तकनीकी क्रांति में बेसिक फोन काफी पिछड़ गया और इसकी जगह मोबाइल ने ली है। यही कारण है कि बेसिक फोन की संख्या लगातार कम होती जा रही है। निजी कंपनियों के मोबाइल का प्रयोग बढऩे और विभिन्न स्कीम आने से बेसिक का महत्व घट गया है। अब पहले की तुलना में बेसिक फोन आधे से भी कम रह गए हैं।
महज छह हजार कनेक्शन
बीएसएनएल के बेसिक फोन का पहले व्यावसायिक व घरेलू क्षेत्रों में काफी महत्व था। इन बेसिक फोन की संख्या बढऩा व एसटीडी पीसीओ का उपयोग बढऩा संचार क्रांति माना गया। जिले में दस साल पहले बेसिक फोन की संख्या लगभग 20 हजार थी जो अब घटकर लगभग केवल 6 हजार 384 ही रह गई है। जिले में अब केवल सरकारी व निजी कार्यालयों व सरकारी विभागों व कुछ बड़ी जनरल स्टोर दुकानों पर ही बेसिक फोन देखे जा सकते हैं। बेसिक फोन पर सर्विस टैक्स और स्थायी किराया भी लगता है। इस कारण लोग पैसे बचाने के लिए भी इस फोन को हटा रहे हैं। मोबाइल प्रीपेड सेवा का उपयोग आसान होने के कारण भी बेसिक कनेक्शन की ओर रूझान घटा है।
विकास कार्यों की मार
शहरी क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों की मार भी बीएसएनएल के बेसिक फोन कनेक्शनों पर पड़ी है। केबले कटने से बेसिक फोन उपभोक्ता प्रभावित हुए। इससे परेशान होकर उपभोक्ताओं ने कनेक्शन ही कटवा लिए।
इनका कहना है...
बीएसएनल ने बेसिक फोन की संख्या कम होने से बचाने के लिए विभिन्न स्कीम और ब्राडबैंड का भी सहारा लिया जा रहा है। हालांकि फिर भी बीएसएनएल ने अपने नेटवर्क में सुधार किया है। फ्री मोबाइल सेवाओं का दौर और थ्रीजी व फोरजी सेवा शुरू होने से बेसिक फोन कनेक्शन का महत्व कम हो गया और कनेक्शन घटते चले गए।
पुष्कर श्रीवास्तव, जिला प्रबंधक, बीएसएनएल, सवाईमाधोपुर
पिछले तीन साल के आंकड़े
वर्ष बेसिक फोन
2016-17 8 हजार 678
2017-18 7 हजार 435
2018-19 6 हजार 384
तीन साल में गिरावट प्रतिशत में
-2017 में 12 प्रतिशत -
2018 में 14 प्रतिशत-
2019 में 15 प्रतिशत
Published on:
24 Nov 2019 10:11 pm

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