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सवाईमाधोपुर. विश्व बाघ दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान की सबसे प्रसिद्ध बाघिन मछली (टी-16) को याद किया। उन्होंने दिल्ली में बाघ दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहा कि मैंने कहीं पढ़ा था कि सिर्फ रणथम्भौर की मशहूर बाघिन मछली को देखने के लिए लाखों देशी-विदेशी पर्यटक वहां डेरा जमाते थे। इसलिए बाघों की संरक्षण के लिए पर्यटन एवं पर्यावरण को बढ़ावा देना बहुत जरूरी है।
रोजगार एवं पर्यटन से बढ़े बाघ
उन्होंने ये भी कहा कि रोजगार के संसाधन विकसित होने एवं पर्यटन को बढ़ावा मिलने के कारण भी बाघों की संख्या में इजाफ हुआ है। बाघ भारत ही अन्य देशों में बाघ अस्था का प्रतीक है। मलेशिया एवं बांग्लादेश में भी बाघ राष्ट्रीय प्रतीक है। टाइगर से जुड़ी पहल कई देशों को प्रभावित करती है।
कौन है मछली
रणथम्भौर में मछली का जन्म 1996 में बकोला में हुआ।12 बाघ-बाघिनों को जन्म दिया। रणथम्भौर क्वीन, लेडी ऑफ द लेक, क्रॉकोडाइल किलर, मछली आदि चर्चित नाम से जानी जाती थी। 18 अगस्त 2016 को सुबह अंतिम सांस ली बाघिन ने। इसे देखने को पर्यटकों को तांता लगता था।
उपलब्धियां
इंटरनेट पर सबसे ज्यादा सर्च की जाने वाली बाघिन थी।भारतीय डाक विभाग ने मछली पर डाक टिकट भी जारी किया था।ट्रेवल ऑपरेटर्स फॉर टाइगर के अनुसार 1998 में व्यस्क मादा होने के बाद उसने भारतीय अर्थव्यवस्था में करीब दस वर्षों तक 100 मिलियन डॉलर यानि 650 करोड़ रुपए भी कमाए। बीबीसी ने इस बाघिन के नाम पर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी दिया।
ये बड़ी खुशी की बात है कि देश के प्रधानमंत्री के जहन में रणथम्भौर का नाम है। सवाईमाधोपुर के लोगों के लिए ये गर्व की बात है, लेकिन इसके साथ ही हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि हम बाघों के संरक्षण में और ज्यादा मेहनत व दिल से काम करें।
धर्मेन्द खांडल, फील्ड बायोलॉजिस्ट, टाइगर वॉच संस्था
रणथम्भौर की बाघिन मछली को याद करने पर प्रधानमंत्री का आभार है। उनकी ओर से मछली को लेकर दिया संबोधन भी वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक प्रेरणास्रोत है। वहीं बाघ संरक्षण की दिशा में जुटे स्थानीय लोगों के लिए हौसला बढ़ाने वाला है।
अक्षय शर्मा, रणथम्भौर बचाओ आंदोलन, सवाईमाधोपुर
मछली भले ही दिवंगत हो गई, लेकिन प्रधानमंत्री की ओर से मछली को लेकर दिए संबोधन से वह फिर से आज लोगों में जिंदा हो गई। वाकई रणथम्भौर की थाथी का ही ये कमाल है।
हेमराज मीणा, नेचर गाइड, रणथम्भौर
प्रधानमंत्री द्वारा मछली का नाम लेना रणथम्भौर के लिए गर्व की बात है। मछली ने रणथम्भौर ही नहीं प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व को भी आबाद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं पर्यटन बढ़ाने में उसका योगदान काफी बड़ा है।
मनोज पाराशर, सीसीएफ, रणथम्भौर बाघ परियोजना
Published on:
30 Jul 2019 01:28 pm

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