सवाईमाधोपुर. बाघों के लिए बेहतर पर्यावास विकसित करने के लिए अब वन विभाग की ओर से रणथम्भौर के दूसरे डिवीजन व करौली के कैलादेवी अभयारण्य को भी बाघों का आशियाना बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए विभाग की ओर से कैलादेवी अभयारण्य को टाइगर हैबिटाट के रूप में विकसित करने की कार्य योजना भी तैयार कर ली गई है। इसी के तहत अब वन विभाग की ओर से कैलादेवी अभयारण्य की सीमा में बसे 123 परिवारों को विस्थापित करने की प्रकिया तेज कर दी गई है।
29 करोड़ का किया भुगतान
राज्य सरकार की ओर से कैलादेवी अभयारण्य को बाघों का आशियाना बनाने के लिए अभ्यारण्य की सीमा में बसे गांवों में रह रहे परिवारों को विस्थापित करने पर अब खासा ध्यान दिया जा रहा है। विस्थापन के लिए सरकार की ओर से हाल ही में 29 करोड़ का बजट भी जारी किया गया था। इस राशि का भुगतान विस्थापितों को किया जा चुका है। गौरतलब है कि कैलादेवी अभयारण्य के चार गांवों के 315 परिवारों को विस्थापित करने में पिछले 13 सालोंं में जितनी राशि सरकार व वन विभाग की ओर से खर्च की गई है उतनी राशि तो तीन गांवों के 327 परिवारों पर एक साल में खर्च कर दी गई है। जानकारी के अनुसार चौड़क्याकलां के 94, चौड़क्याखुर्द के 56 व मरमदा गांव के 195 परिवारों को विस्थापन पैकेज की दूसरी किस्त भी दे दी गई है।
यह थी योजना
उक्त क्षेत्र को बाघ पर्यावास के अनकूल पाए जाने पर नेशनल टाइगर कनजर्वेशन अथोरियटी (एनटीसीए) की ओर से 2007 में केन्द्र सरकार के निर्देशन में कैलादेवी में बसे 44 गांवों के करीब 3 हजार परिवारों को विस्थापन की प्रक्रिया को शुरू किया गया था। इन परिवारों को 2014 तक अन्यत्र विस्थापित करने के लिए 288 करोड़ 90 लाख रुपए खर्च करने थे लेकिन योजना की गति धीमी होने के कारण विस्थापन नहीं हो सका अब एक बार फिर से विस्थापन की प्रक्रिया में तेजी लाई गई है।
सात गांवों का सर्वे पूरा
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार विस्थापन के लिए सात गांवों का सर्वे कार्य पूरा हो चुका हैं। इनमें इनमें माचनकी गांव को पूरी तरह विस्थािपत किया जा चुका है। जबकि ऊंची गवाड़ी, डांगरा, बैरई, भीमपुरा, चौडक्याकलां, चौडक्याखुर्द व मरमदा का सर्वे का कार्य पूरा किया जा चुका है। इन गांवो में भी महज 123 परिवार ही शेष है।
35 करोड का बजट मांगा
वन विभाग की ओर से अब विस्थापन प्रक्रिया को और तेज करने के लिए सरकार से 35 करोड़ का बजट मांगा है। इसमें इस साल के 25 करोड़ और पिछले साल के बकाया 10 करोड़ शामिल है। इससे भी गांवों का विस्थापन किया जाएगा। इस साल के अंत तक करौली के कैलादेवी अभयारण्य के दो और गांवों के पूरी तरह से विस्थापित होने के कयास लगाए जा रहे हैं।
एक नजर में कैलादेवी अभयारण्य मेें विस्थापन…
गांव परिवार विस्थापित शेष
माचनकी 59 59 00
ऊंची गवाडी 143 116 27
डंगरा पठार 83 49 34
भीमपुरा 102 91 11
चौडक्याकलां 115 98 17
चौडक्याखुर्द 18 6 12
मरमदा 245 223 22
कुल 765 642 123
इनका कहना है…
कैलादेवी अभयारण्य को टाइगर हैबिटाट के रूप में विक सित करने के लिए यहां बसे गांवों को विस्थापित करने का कार्य किया जा रहा है। इस साल के अंत तक दो से तीन और गांवों के परिवारों को पूरी तरहविस्थापित कर दिया जाएगा।
– रामानंद भाकर, उपवन संरक्षक, कैलादेवी अभयारण्य, करौली।