सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर में बाघों का कुनबा बढऩे के सराथ ही बुरी खबर आने का सिलसिला भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। करीब दो सप्ताह पहले रणथम्भौर में बाघ टी-57 की मौत के बाद अब एक बाघिन व शावक की मौत की खबर सामने आ रही है। दरअसल रणथम्भौर की फलौदी रेंज में विचरण करने वाली बाघिन टी-114 व उसके एक शावक का शव वन विभाग की टीम को फलौदी रेंज के नहारी के नाले और उसके आसपास के वन क्षेत्र से बरादम हुए हैं। जानकारी के अनुसार सुबह करीब साढ़े छह बजे नहारी के नाले व एनिकट के पास एक शावक का शव मिला था। सूचना पर मौके परपहुंची वन विभाग की टीम ने शव को कब्जे में लिया। वहीं वन विभाग की ओर से बाघिन की तलाश शुरू की गई। कईघंटों की मशक्कत के बाद नहारी का नाला जहां से शावक का शव बरामद हुआ था। उससे करीब आठ सौ मीटर की दूरी पर वन क्षेत्र में बाघिन का शव भी बरामद हुआ। वन विभाग की ओर से शव को कब्जे में लिया गया। इसके बाद फलौदी रेंज परिसर मेंशावक के शव का चिकित्सकों की टीम ने पोस्टमार्टम किया और पोस्टमार्टम के बाद शवों को अंतिम संस्कार कर दिया गया। हालांकि अब तक बाघिन के शव का अंतिम संस्कार नहीं किया गया है।
बाघ के साथ संघर्ष में गई बाघिन की जान
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बाघिन के शव पर चोट के निशान है जो किसी बाघ के साथ संघर्ष में आने की आशंका जताई जा रही है। वन अधिकारियों की माने तो बाघिन का शव शावक के शव से महज आठ सौ मीटर की दूरी पर मिला है। ऐसे में शावकों को बचाने के लिए बाघिन का किसी बाघ के साथ सघर्ष होने की संभावना जताई जा रही है।
गत दिनों मिला था बाघ का मूवमेंट
वहीं इस संबंध में वन अधिकारियों का कहना है कि आम तौर पर बाघिन एक दो दिनों में फिर से शावकों के पास लौट आती है।लेकिन इस बार बाघिन शावकों के पास वापस लौट कर नहीं है। इसे वन विभाग के अधिकारी भी एक असमान्य घटना मान रहे है। वहीं वन अधिकारियों ने बताया कि जिस क्षेत्र में शावकों का विचरण था उसी क्षेत्र में 27 जनवरी को एक बाघिन की दहाड़ सुनाई थी। साथ ही 26 जनवरी को उक्त क्षेत्र में ही एक बाघ का मूवमेंट भी मिला था।
सर्दी व बरसात के कारण हुई शावक की मौत
वन अधिकारियों ने बताया कि शावक की उम्र करीब तीन माह थी और शावक अन्य शावकों की तुलना में शारिरीक रूप से कमजोर था। वहहीं पिछले दो दिनोंं से बारिश व ओलावृष्टि के कारण मौसम के मिजाज में भी अचानेक बदलाव आ गया है और सर्दी में इजाफा हो गया है। ऐसे में एक शावक सरवाइव नहीं कर सका और उसकी मौत हो गई।
इनका कहना है…
शावक व बाघिन की मौत की सूचना है, फिलहाल मौके पर पहुंचा हूं। टीम के साथ जानकारी करने और मौका मुआयना करने के बाद ही कुछ कह सकूंगा।
– संग्राम सिंह, उपवन संरक्षक, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।