सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर बाघ परियोजना में जल्द ही एक बार फिर से गांवों के विस्थापन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। वन विभाग की ओर से रणथम्भौर बाघ परियोजना के आसपास बसे गांवों के विस्थापन की तैयारी कर ली गई है। फिलहाल विभाग की ओर से तीन गांवोंं को चयन करके उनका सर्वे करके विस्थापन के लिए उच्च अधिकारियों को भेज दिया है। उच्च अधिकारियोंं से अनुमति मिलने के बाद ही विस्थापन की प्रक्रिया को शुरू किया जाएगा।
इन गांवों का किया सर्वे
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार विभाग की ओर से फिलहाल रणथम्भौर बाघ परियोजना के आसपास बसे हज्जाम खेड़ी, भैरूपुरा व तालडा खेत गांवों का सर्वे कर उनकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भिजवाई गई है। ऐसे में अब जल्द ही रणथम्भौर बाघ परियोजना में एक बार फिर से विस्थापन की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
पुराने पैकेज के अनुसार विस्थापन की अनुशंसा
वन विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में उक्त तीनों गांवों के ग्रामीणों को पूर्व में विभाग की ओर से पुराने विस्थापन पैकेज के आधार पर ही विस्थापित करने की अनुशंसा की गई है। गौरतलब है कि हाल ही में वन विभाग व सरकार की ओर से विस्थापन पैकेज में बदलाव किया गया था और विस्थापन पैकेज को दस लाख से बढ़ाकर 15 लाख करने और भूमि की एवज में डीएलसी दर के अनुसार ही भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए गए थे लेकिन इस पैकेज का ग्रामीणों की ओर से लगातार विरोध किया जा रहा है।
बाघों को मिल सकेगा बेहतर पर्यावास
रणथम्भौर में सालों से ठप पड़ी गांवों के विस्थापन की प्रक्रिया यदि एक बार फिर शुरू होती है और बाघ परियोजना के आसपास बसे गांवों को विस्थापित किया जाता है तो रणथम्भौर में बाघों व अन्य वन्यजीवों को बेहतर पर्यावास उपलब्ध हो सकेगा और बाघ मानव संघर्ष पर भी लगाम लग सकेगी।
पत्रिका ने उठाया था मुद्दा
रणथम्भौर में सालों से विस्थापन के ठप होने और नए विस्थापन पैकेज की पेचीदगियों व ग्रामीणों की ओर से किए जा रहे विरोध को ”रणथम्भौर अभयारण्य: पैकेज में बदलाव के फेर में अटका गांवों का विस्थापन कार्यÓÓ और ” 21 साल में पांच गांव ही हो सके विस्थापितÓÓ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद हरकत में आए वन विभाग की ओर से एक बार फिर से गांवों के विस्थापन की प्रक्रिया को शुरू किया गया है।
इनका कहना है…
रणथम्भौर बाघ परियोजना के आसपास बसे कई गांवों को विस्थापित किया जाना है फिलहाल तीन गांवों को विस्थापित किया जाना है। इसके लिए रिपोर्ट पुराने पैकेज के आधार पर उच्च अधिकारियों को भिजवाई गई है। उच्च अधिकारियों से अनुमति मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
– प्रमोद धाकड़, उपवन संरक्षक, विस्थापन, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।