
शिवाड़ में रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाया घुश्मेश्वर मंदिर।
भगवतगढ़. कस्बे में स्थित लाखों लोगों की आस्था के केंद्र श्रीअरनेश्वर महादेव मंदिर शिवकुण्ड धाम पर महाशिवरात्रि पर ट्रस्ट के तत्वावधान में लगने वाले चार दिवसीय मेले की तैयारियां अंतिम चरण में है। ट्रस्ट के प्रवक्ता वेद प्रकाश दुसाद ने बताया कि चार दिवसीय मेले में ट्रस्ट द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कराए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि बारह फरवरी सुबह ग्यारह बजे मेले का उद्घाटन कस्बे के पूर्व सरपंच प्रहलाद मीना ध्वज पूजन एवं ध्वजारोहण के साथ करेंगे। तेरह फरवरी शाम को शिवमंदिर में छप्पन भोग की झांकी सजाई जाएगी एवं रात्रि आठ बजे से भजन संध्या होगी। इसमें मानसिंह नरुका एण्ड पार्टी के भजन गायक राकेश शर्मा, गायिका पूजा शर्मा, रोशनी शर्मा आदि भजनों की प्रस्तुतियां देंगे।
वहीं डांसर रेखा राजस्थानी एवं हीरा नृत्य की छटा बिखेरेंगी। हास्य कलाकार मनीष छैला एवं फखरू फर्जी अपनी हास्य अदाओं से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। ट्रस्ट अध्यक्ष राधेश्याम गोहिल एवं मेला संयोजक राजेन्द्र सिंह गोहिल ने बताया कि भजन संध्या के मुख्य अतिथि बिल्डर जगदीश गंगवाल जयपुर , प्रभुदयाल मीना सेकेट्री मऊ एवं भामाशाह शिवकरण मीना नींदड़दा होंगे।
अध्यक्षता सरपंच मुकेश मीना करेंगे। विशिष्ट अतिथि के रूप में योगेंद्र कुमार लाभी, प्रोपर्टी डीलर एवं बिल्डर जयपुर, बाबूलाल सैनी, खेड़ापति रेस्टोरेंट भगवतगढ़ एवं बाबूलाल मीना एवं सिनोली के बाबूलाल मीना वार्ड पंच एवं समाज सेवी उपस्थित रहेंगे। भजन संध्या के बीच-बीच में जयपुर एवं दिल्ली के कलाकारों द्वारा आकर्षक सजीव झांकियों की प्रस्तुति भी दी जाएगी।
14 फरवरी को शिवकुण्ड में चतुर्दशी का पवित्र स्नान एवं भोलेनाथ की विशेष पूजा होगी। इसी दिन ट्रस्ट द्वारा बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नि:शुल्क भंडारे का आयोजन होगा। शिवकुण्ड में अमावस्या का शाही स्नान होगा एवं शिव चालीसा एवं रुद्री पाठ होंगे। इसी दिन शाम को मेले का समापन होगा। ट्रस्ट के मंत्री योगेश जैन ने बताया कि मेले में बाहर से आने वाले दुकानदारों के लिए ट्रस्ट द्वारा प्रबंध किए हैं।
रंग-बिरंगी रोशनी से सजने लगा घुश्मेश्वर मंदिर
शिवाड़. कस्बे में घुश्मेश्वर की धरा आगामी सोमवार से शिवमय हो जाएगी। महाशिवरात्रि को लेकर घुश्मेश्वर मंदिर में तैयारियां शुरू हो गई है। वहीं दशर्नाथियों की चहल-पहल भी शुरू हो गई है। इन दिनों शाम ढलते ही घुश्मेश्वर मंदिर रंग-बिरंगी रोशनी से नहाया नजर आने लगा है।
महाशिवरात्रि पर्व 13 फरवरी को मनाया जाएगा। घुश्मेश्वर मंदिर में दिनभर विशेष अनुष्ठान होंगे। मंदिरों में रूद्राभिषेक के साथ ही वैदिक मंत्रों की गूंज रहेगी। इस दिन चारों प्रहर में बिल्वपत्र, धतूरा आदि चढ़ाकर भगवान भोले को रिझाया जाएगा? शिवरात्रि ि के दिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ही महादेव का सहस्त्र जलधारा अभिषेक होगा। इसके लिए मंदिर में रोशनी व आकर्षक सजावट व साफ-सफाई का काम जोरों पर है।
महाशिवरात्रि पर गर्भगृह को सुगंधित पुष्पों से सजाया जाएगा। महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ की मंगला आरती, मध्याह्न आरती एवं शाम को विशेष शृंगार, पूजा-अर्चना एवं महाआरती होगी। कस्बे के इस प्राचीन व बड़े मंदिर में पांच दिवसीय महाशिवरात्रि पर्व पर मेले सा माहौल रहेगा।
ट्रस्ट की ओर से सदस्यों व कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस दौरान 11 से 16 फरवरी तक विशेष आयोजन होंगे। महाशिवरात्रि पर्व को लेकर सोमवार को मंदिर पुजारियों से वार्ता की। इस दौरान आचार्य सुरेश दुबे, पंडित सत्यनारायण शर्मा, पंडित हनुमान पाराशर, पंडित नवीन पाराशर आदि ने बताया कि घुश्मेश्वर मंदिर का इतिहास वर्षों पुराना है। देशभर के ज्योर्तिलिंगों में राजस्थान में शिवाड़ स्थित घुश्मेश्वर मंदिर को द्वादशवां ज्यातिर्लिंग माना गया है।
सज गया देवगिरि पर्वत : महाशिवरात्रि पर्व को लेकर घुश्मेश्वर मंदिर स्थित देवगिरि पर्वत पर रंग-रोगन में जुटे है। रंग-रोगन के बाद देवगिरि पर्वत निखरने लगा है। यहां 11 से 16 फरवरी तक मेला लगेगा। घुश्मेश्वर मंदिर परिसर, घुश्मेश्वर गार्डन, लक्ष्मी गार्डन, देवगिरि पर्वत पर स्थित ज्योतिर्लिंगों व प्रतिमाओं का रंग-रोगन का कार्य किया जा रहा है।
दशकों पुराना है मंदिर का इतिहास : शिवाड़ में घुश्मेश्वर मंदिर का इतिहास दशकों पुराना है। जानकारों के अनुसार देवगिरि पर्वत की उपत्यका में सुधर्मा नामक व्यक्ति की अद्र्धांगिनी घुश्मा शिवभक्त थी। वह नित्य एक सौ एक शिवलिंग स्थापित कर शिवार्चन करती थी।
एक दिन उसकी बड़ी सौत सुदेहा ने जो उसकी ***** थी, सौतिया डाह के कारण घुश्मा के पुत्र का वध कर दिया। यह समाचार सुनकर भी घुश्मा ने शिवार्चन बीच में नहीं छोड़ा। वह पूजा पूरी करके ही उठी। उसकी भक्ति देख ज्योतिस्वरूप भगवान शिव प्रकट हो गए। उसे भक्ति का वर देकर घुश्मेश्वर नाम से सदैव के लिए स्थिर हो गए, तभी से मंदिर का नाम घुश्मेश्वर रखा गया।
Published on:
06 Feb 2018 01:27 pm
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