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सवाई माधोपुर

रूपहले पर्दे पर गूंजेगी उस्ताद की दहाड़

2014-15 में रणथम्भौर में हुई थी डॉक्युमेंट्री की शूटिंग इसी माह होगी रिलीज

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सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर का मशहूर बाघ भले ही रणथम्भौर से विदा होने के बाद उदयपुर के सज्जनगढ़ बॉयोलोकिल पार्क में गुमनामी की जिंदगी बसर कर रहा हो लेकिन अब जल्द ही उस्ताद की दाहाड़ लोगों को एक बार फिर सुनाई देने वाली है। हालांकि इस बार उस्ताद की दहाड़ रणथम्भौर में नहीं बल्कि एक डॉक्युमेंट्री के माध्यम से रुपहले पर्दे पर सुनाई देगी। दरअस्ल वाइल्ड लाइफ फिल्म मेकर परेरा ने रणथम्भौर के बाघ उस्ताद पर 2014-15 के बीच एक डॉक्यूमेंट्री को शूट किया था जो अब जल्द ही विश्व के कई देशों में ऑन स्क्रीन रिलीज होने जा रही है। रणथम्भौर के इतिहास में यह तीसरा मौका होगा जब रणथम्भौर के किसी बाघ या बाघिन की फिल्म पर्दे पर आएगी।
यह है फिल्म की पटकथा
जानकारी के अनुसार फिल्म ” टी-24- दा मेकिंग ऑफ मैन इटरÓÓ में उस्ताद के रणथम्भौर के जीवन काल को दर्शाया गया है। फिल्म मेंं रणथम्भौर के बाघ उस्ताद को एक शक्तिशाली बाघ के रूप में दिखाया गया है। साथ ही रणथम्भौर में उस्ताद व बाघिन नूर की कहानी को भी फिल्माया गया है। हालांकि फिल्म में वन विभाग की ओर से उस्ताद को आनन फानन में रणथम्भौर से श्फ्टि करने पर भी सवाल खड़े गिए गए है। फिल्म निर्माता का दावा है कि उस्ताद को मानव के लिए खतरनाक घोषित करने से पूर्व उसकी किसी भी प्रकार की फोरेंसिक जांच नहीं की गई। हालांेिक यह सारी जानकारी फिल्म में विशेषज्ञों के माध्यम से दी गई है।
लंदन में मिला अवॉर्ड
इस डॉक्युमेंट्री को अक्टूबर माह में लंदन में हुए एक समारोह में भी प्रदर्शित किया गया था। वहांपर इस फिल्म को पुरस्कृत भी किया गया है। अब जल्द ही फिल्म को रिलीज करने की तैयारी की जा रही है।
तीन लोगों की ली थी जान
रणथम्भौर के बाघ उस्ताद ने 2015 में रणथम्भौर में तीनलोगों की जान ली थी। इसके बाद वन विभाग की ओर से बाघ को मानव के लिए खतरनाक मानकर उदयपुर के सज्जनगढ़ बॉयोलिकल पार्क में शिफ्ट कर दिया गया था। उस्ताद के हमले में जान गवाने वालों में एक वन कर्मी भी शामिल था।
उम्र के आखिरी पड़ाव पर है उस्ताद
रणथम्भौर के प्रसिद्ध बाघ उस्ताद को वन विभाग की ओर से मार्च 2015 में रणथम्भौर से उदयपुर के सज्जनगढ़ बॉयोलिकल पार्क में शिफ्ट कर दिया गया था। तब से लेकर आज तक उस्ताद वहीं पर है। पूर्व में कई बार वन्यजीव प्रेमियों की ओर से उस्ताद को रिहा कर जंगल में शिफ़्ट करने की मांग भी की गई थी यह मामला कोर्ट तक भी पहुंचा था लेकिन उस्ताद को अब तक रिहाई नहीं मिल सकी है। वर्तमान में उस्ताद बॉयोलिकल पार्क में उम्र के आखिरी पड़ाव पर है और बोन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है।
रणथम्भौर में उस्ताद के अलावा मछली की फैमली पर भी बनी थी डॉक्युमेंट्री
रणथम्भौर में फिल्म मेकर नल्ला मत्थु की प्रसिद्ध बाघिन मछली पर बनाई गई डॉक्युमेंट्री ‘दा मोसट फेमस टाइगर मछलीÓको खासा पसंद किया गया था। इसे कई भाषाओं में विश्व के 47 देशों में रिलीज किया गया था।इसके अलावारणथम्भौर की बाघिन सुंदरी, कृष्णा यानि टी-19, बाघिन एरोहैड यानि टी-84 पर भी डॉक्युमेंट्री बनाई जा चुकी है।
एक्सपर्ट व्यू…
उस्ताद बाघ पर परेरा ने एक अचछी डॉक्यूमेंट्री बनाई है वर्तमान में वह यूएस में है। इस फिल्म में विशेषज्ञों के माध्यम से हर पक्ष को फिल्माया और दर्शाया गया है। यह फिल्म आम वन्यजीव प्रेमियों को उस्ताद के बारे में सोचने पर मजबूर करती है। इस फिल्म में विशेषज्ञों के माध्यम से ही उस्ताद को बॉयोलोजिकल पार्क में शिफ्ट करने का विरोध भी दर्शाया गया है। लेकिन साथ हीवन विभाग के तथ्यों का भी समावेश किया गया है।
– नल्ला मुत्थु, वाइल्ड लाइफ फिल्म मेकर।

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