सवाईमाधोपुर. सवाईमाधोपुरण् रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के टाइगर टी.57 की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। वनाधिकारियों की मानें तो बाघ की मौत कैंसर से हुई थी। टाइगर टी.57 के लीवर व स्पलीन में कैंसर था। राजस्थान पशु विश्वविद्यालय लैब बीकानेर की रिपोर्ट में ये बात सामने आई है। कैंसर कैसे हुआ, इस सवाल का जवाब फिलहाल नहीं मिला है।संभवतया कैंसर से बाघ की मौत का रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में पहला मामला है। इससे पहले ऐसा मामला कभी सामने नहीं आया है। बाघ टी.57 बाघिन शर्मिली टी.26 का बेटा था। जो अपनी मौत के समय रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान के जोन नम्बर दो में रह रहा था।गौरतलब है कि रणथम्भौर का बाघ टी.57 पिछले 19 दिसम्बर 2022 को पेट की बीमारी से ग्रस्त था। इसके बाद वन विभाग ने 21 दिसम्बर 2022 को बाघ टी.57 ट्रेंकुलाइज किया था। 23 दिसम्बर को बाघ की तबीयत फिर से खराब गई। बाघ टी.57 की 29 दिसम्बर को बाघ टी.123 से टेरोटोरियल फाइट में हुई थी। जिसमें बाघ टी.57 घायल हो गया था।वन विभाग ने इसके बाद बाघ को फिर से ट्रेंकुलाइज नहीं किया था। वहीं पहले ट्रेंकुलाइज के बाद पिंजरे रखकर मॉनिटरिंग नहीं करने पर भी वन विभाग पर सवाल भी उठे थे। इसके बाद 10 जनवरी 2023 को बाघ टी.57 की मौत हो गई थी। मौत के बाद वन विभाग ने नाका राजबाग पर मेडिकल बोर्ड से बाघ का पोस्टमार्टम करवाया था। सैंपल वेटरनरी विश्वविद्यालय बीकानेर और फोरेंसिक लैब में जांच के लिए भेजे गए थे। जांच रिपोर्ट आने के बाद अब बाघ की मौत के कारणों का खुलासा हुआ है।