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20 वर्ष से चल रही ट्रोमा सेन्टर की मांग सीमा ज्ञान के फेर में अटकी

20 वर्ष से चल रही ट्रोमा सेन्टर की मांग सीमा ज्ञान के फेर में अटकीढाई वर्ष पहले की थी सीएम ने बजट घोषणा6 महीने पहले जारी किए स्वीकृति आदेश , सवा साल पहले हो चुका है भूमि आवंटन सवाईमाधोपुर जिले में मलारना डूंगर उपखण्ड अन्तर्गत कोटा-लालसोट मेगा हाइवे के बीच मलारना चौड़ में 20 वर्ष से की जा रही ट्रोमा सेन्टर निर्माण की मांग पर अमल फिलहाल आवंटित भूमि के सीमाज्ञान के कारण अटका हुआ है। इस देरी से मेगा हाइवे पर सडक़ हादसों में जख्मी सदस्यों को तत्काल उपचार की राहत नहीं मिल पा रही है।

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20 वर्ष से चल रही ट्रोमा सेन्टर की मांग सीमा ज्ञान के फेर में अटकी

20 वर्ष से चल रही ट्रोमा सेन्टर की मांग सीमा ज्ञान के फेर में अटकी

20 वर्ष से चल रही ट्रोमा सेन्टर की मांग सीमा ज्ञान के फेर में अटकी
ढाई वर्ष पहले की थी सीएम ने बजट घोषणा
6 महीने पहले जारी किए स्वीकृति आदेश , सवा साल पहले हो चुका है भूमि आवंटन

सवाईमाधोपुर जिले में मलारना डूंगर उपखण्ड अन्तर्गत कोटा-लालसोट मेगा हाइवे के बीच मलारना चौड़ में 20 वर्ष से की जा रही ट्रोमा सेन्टर निर्माण की मांग पर अमल फिलहाल आवंटित भूमि के सीमाज्ञान के कारण अटका हुआ है। इस देरी से मेगा हाइवे पर सडक़ हादसों में जख्मी सदस्यों को तत्काल उपचार की राहत नहीं मिल पा रही है।
ट्रोमा सेन्टर की मलारना चौड़ में स्वीकृति और फिर इसके भवन निर्माण के लिए भूमि आवंटन होने के बाद भी महज आवंटित भूमि के सीमाज्ञान के अभाव में ये कार्य शुरू नहीं हो सका है। चिकित्सा अधिकारियों का कहना है राजस्व विभाग के कार्मिक कभी पुलिस जाप्ता नहीं मिलने की तो कभी किसी और बहाने से सीमाज्ञान को टालते आ रहे हैं। हालांकि सरकार ने ट्रोमा सेन्टर के लिए 6 माह पहले चिकित्सक सहित नर्सेज स्टाफ के पद स्वीकृति के साथ ही ट्रॉमा सेंटर भवन निर्माण की स्वीकृति भी दे दी है। बिना भवन और उपचार सुविधाओं के इन सृजित पदों का कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है। बल्कि अभी ये ट्रोमा सेन्टर संचालित भी नहीं हुआ है।


घायलों को करते हैं रैफर

मलारना डूंगर थाना क्षेत्र अन्तर्गत कोटा- लालसोट मेगा हाइवे पर आए दिन सडक़ हादसे होते रहते हैं वर्तमान में हाइवे पर 6 किलोमीटर की दूरी पर भाड़ौती व मलारना चौड़ कस्बों में दो अलग अलग सरकारी अस्पताल हैं। लेकिन यहां गम्भीर घायलों के उपचार की सुविधा नहीं है। इस कारण ज्यादातर घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल के लिए रैफर कर दिया जाता है। यहां से जिला चिकित्यालय की दूरी 30 से 40 किलोमीटर है। वहां तक के सफर के कारण उपचार में देरी होने से हादसों में घायलों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता है और अनेक घायल तो राह में ही दम तोड़ देते हैं।
मलारना चौड़ सरपंच रुकमणि मीना बताती है कि मलारना चौड़ में ट्रोमा सेंटर बनने से अनेक जख्मी लोगों को समय पर उपचार मिलने से जान बच सकेगी, लेकिन सरकारी सिस्टम की लापरवाही से इसके निर्माण में देरी हो रही है।


1.33 हेक्टेयर भूमि आवंटित, 2 करोड़ की स्वीकृति

घायलों को समय पर उपचार न मिलने की समस्या के कारण लगभग 20 वर्षो से क्षेत्र के लोग मलारना चौड़ में ट्रोमा सेंटर खोलने की मांग कर रहे थे, लेकिन किसी ने इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया। क्षेत्र के लोगों ने तीन वर्ष पहले विधायक दानिश अबरार को समस्या बताई। इस पर उन्होंने राज्य सरकार स्तर पर प्रयास करके ढाई वर्ष पहले सीएम से ट्रोमा सेंटर की बजट घोषणा करवाई। 6 महीने पूर्व प्रशासनिक स्वीकृति जारी कराई। इसके निर्माण के लिए दो करोड़ रुपए की स्वीकृति और सवा साल पहले भूमि का आवंटन कर दिया गया। मलारना चौड़ बायपास पर राज्य सरकार ने खसरा नम्बर 3906, 3907, 3920 में 1.33 हेक्टेयर भूमि का आवंटन ट्रोमा सेन्टर के लिए किया हुआ है। लेकिन भूमि का सीमाज्ञान नहीं किए जाने से ट्रॉमा का निर्माण शुरू न हो सका है।

इनका कहना है
&ट्रोमा सेंटर के लिए लगभग दो करोड़ राशि स्वीकृत हुई है। सीमाज्ञान नही होने से निर्माण में देरी हो रही है। राजस्व अधिकारी कभी पुलिस जाप्ता नही मिलने तो कभी किसी अन्य बहाने से एक महीने से सीमाज्ञान नही कर रहा है।
डॉ. धर्मङ्क्षसह मीना, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सवाईमाधोपुर
&हमने पहले 3 नवम्बर तारीख फिक्स की थी। पुलिस जाप्ता नहीं मिला। अब 11 नवम्बर को सीमाज्ञान कराएंगे। पुलिस जाप्ता के लिए उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया है।
सत्यप्रकाश गुप्ता, कार्यवाहक तहसीलदार मलारना डूंगर

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