
'वोटर वेरीफाएबल ऑडिट ट्रेल यानि वीवीपैट मशीन
सवाईमाधोपुर. इस बार विधानसभा चुनाव में पहली बार 'वोटर वेरीफाएबल ऑडिट ट्रेल यानि वीवीपैट मशीन का भी उपयोग किया जाएगा, लेकिन मतदान के दौरान किसी मतदाता ने मशीन में गड़बड़ी को लेकर झूठी शिकायत की तो उसे महंगा पड़ सकता है।
वीवीपैट मशीन की प्रक्रिया के तहत मतदाता अपनी पसंद के मतदाता को वोट डाला गया या नहीं, इसको मशीन के जरिए देख सकेंगे, लेकिन अगर मतदाता शिकायत करता है कि उसने जिस प्रत्याशी को वोट डाला है। उसे वोट नहीं डाला गया है। मतदान केन्द्र पर उपस्थित पीठासीन अधिकारी उसके शिकायत को दर्ज करेगा। साथ ही उसका अलग से टेस्ट वोट लिया जाएगा। टेस्ट वोट में शिकायत सही पाई गई तो मतदान केन्द्र पर मतदान की प्रक्रिया को रोक दिया जाएगा। मशीनों की जांच की जाएगी।
झूठी शिकायत पर जाएंगे जेल
वीवीपेट मशीन में गड़बड़ी को लेकर मतदाता की ओर से की गई शिकायत टेस्ट वोटिंग के दौरान गलत पाई गई तो उसे मौके पर ही गिरफ्तार किया जाएगा। चुनाव आयोग के नियमों के तहत उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। नियमों के तहत उसे सजा का प्रावधान भी है।
चुनाव में व्यवधान डालने का बनेगा केस
झूठी शिकायत करने पर पुलिस की ओर से चुनाव में व्यवधान डालने का केस बनाया जाएगा। क्योंकि उसकी एक झूठी शिकायत से चुनाव प्रक्रिया बाधित हो सकती है। शिकायत के दौरान ही शिकायकर्ता से ये लिखवाकर भी लिया जाएगा कि अगर शिकायत झूठी पाई गई तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
वीवीपैट मशीन यूं करती है काम
वोटर द्वारा वोट डालने के तुरंत बाद कागज की एक पर्ची बनती है। इस पर जिस उम्मीदवार को वोट दिया गया है, उसका नाम और चुनाव चिह्न छिपा होता है। यह व्यवस्था इसलिए है कि किसी तरह के विवाद होने पर ईवीएम में पड़े वोट के साथ पर्ची का मिलान किया जा सके। कागज पर्ची ईवीएम में लगे शीशे के एक स्क्रीन पर सात सैकण्ड तक दिखती है। सबसे पहले इसका इस्तेमाल नागालैण्ड चुनाव में 2013 में हुआ था।
मतदान केन्द्र पर वीवीपेट मशीन में पसंद के प्रत्याशी को वोट नहीं डालने संबंधी शिकायत मिलती है तो मतदाता टेस्ट वोट दे सकता है। लेकिन अगर टेस्ट वोट में शिकायत झूठी मिलती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
पीसी पवन, जिला कलक्टर, सवाईमाधोपुर
Published on:
03 Nov 2018 03:21 pm
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