पर्वतारोही और वैज्ञानिकों की सूझबूझ से एवरेस्ट पर बनाए गए मौसम केंद्र, मिलेगी सटीक जानकारी

पर्वतारोही और वैज्ञानिकों की सूझबूझ से एवरेस्ट पर बनाए गए मौसम केंद्र, मिलेगी सटीक जानकारी

Deepika Sharma | Publish: Jun, 16 2019 12:32:24 PM (IST) विज्ञान और तकनीक

  • एवरेस्ट के बालकनी क्षेत्र पर बना दुनिया का सबसे ऊंचा मौसम केंद्र
  • ऑटोमेटेड तरीके से काम करेगा मौसम केंद्र
  • मौसम वैज्ञानिकों ने इसे बताया सबसे बड़ा कदम

नई दिल्ली। नेपाल nepal सहित आठ अंतरराष्ट्रीय International वैज्ञानिकों की टीम ने एवरेस्ट mount everest पर पांच मौसम केंद्र स्थापित करने में सफलता हासिल की है। खबरों से मिली जानकारी के मुताबिक यह मौसम केंद्र दुनिया के सबसे ऊंचे मौसम केंद्र माने जा रहें हैं। इनसे पता चलेगा कि कैसे जलवायु परिवर्तन से माउंट एवरेस्ट प्रभावित हो रहा है। वैज्ञानिकों को इस जानकारी से दक्षिण-पश्चिम मानसून monsoon के दीर्घकालिक प्रभाव की जांच करने में भी मदद मिलेगी।

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नेशनल जियॉग्रफिक सोसाइटी (एनजीएस) के वैज्ञानिकों की टीम ने एक केंद्र एवरेस्ट के बालकोनी क्षेत्र में 8,430 मीटर की ऊंचाई और दूसरा साउथ कोल में 7,945 मीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया है। ये दोनों ही स्वचालित मौसम केंद्र हैं। यह पूरी तरह से ऑटोमेटेड ( Automatic )हैं। ऐसा करने का मकसद पर्वतारोहियों, आम जनता और शोध करने वालों को मौसम की सटीक जानकारी और वहां की परिस्थितियों के बारे में बताना है।

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इन जगहों पर बने ये मौसम स्टेशन
इसके साथ ही टीम द्वारा 4 और मौसम स्टेशन बनाए जा रहे हैं। साउथ कोल (7,945 m), फोरतसी (3,810 m), एवरेस्ट बेस कैंप (5,315 m) और एक कैंप I (6,464 m) की ऊंचाई पर बनाया गया है। सभी मौसम स्टेशन अपने क्षेत्र के तापमान ( temprature ), आर्द्रता, हवा का दबाव, हवा की गति, और हवा की दिशा आदि की जानकारी देंगे।

 

 

कैसे हैं ये केंद्र
एनजीएस की तरफ से जारी बयान में कहा गया, 'बालकनी मौसम स्टेशन अपनी तरह का पहला ऐसा स्टेशन है जिसे 8,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया गया। इसके साथ ही यह पहला मौसम स्टेशन होगा जो प्रकृति में होने वाले शुरुआती परिवर्तनों को भी महसूस कर सकने में सक्षम होगा और वक्त के साथ मौसम परिस्थितियों के बदलावों को सूक्ष्मता से देखा जा सकेगा।'

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इस तरह से काम करेंगे मौसम केंद्र

दरअसल, माउंट एवरेस्ट पर कठिन हालात होने के कारण हर साल कई मौतें होती हैं और लोग बेरोजगार हो जाते थे। मौसम स्टेशनों के होने से अब माउंट एवरेस्ट के मौसम से जुड़ी पल-पल की जानकारी मिलने में मदद मिलेगी। जिससे लोगों को फायदा होगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि वैज्ञानिकों की टीम ने मौसम स्टेशन शिखर के पास लगाया है। ऐसा इसलिए क्योंकि टीम के सदस्यों के लिए पर्वतारोहियों के पीछे लाइन में लगकर ऊपर तक जाना किसी जोखिम से कम नहीं था।

ऐसे मिलेगी जानकारियां

वैज्ञानिक पॉल मायेवस्की के अनुसार- स्थानीय लोगों को यह जलवायु में परिवर्तन कैसे प्रभावित कर रहा है। उन्होंने बताया कि सैंपल के विश्लेषण से समुद्र तल से 6,500 मीटर ऊपर किसी भी क्षेत्र से दुनिया को पहली बार जलवायु की जानकारी मिलेगी। साथ ही ये भी कहा कि "बेहद कम समय में ही एवरेस्ट के आस-पास के गल्शियर काफी छोटे हो गए हैं। अगर आप जलवायु के आंकड़े देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि बीते 20 सालों में यहां ऊंचाई के आधार पर तापमान में एक डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई है।"

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वैज्ञानिकों के अनुसार- इनकी मदद से सही समय पर मौसम की जानकारी मिल सकेगी। इसके लिए ग्लेशियर से वैज्ञानिकों ने सैंपल भी लिए हैं, जिनपर अगले 6 महीने तक अध्ययन किया जाएगा। साथ ही उनका यह भी कहना है कि ये विश्लेषण आने वाले समय में जलवायु संकट से निपटने के लिए वैश्विक निर्णय लेने को प्रभावित कर सकता है।

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