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DISCOVERY : नेपच्यून के वायुमंडल में मिला रहस्यमय काला धब्बा?

Mysterious Neptune पहली बार नहीं है, जब नेपच्यून पर इस तरह की आकृति नजर आई है। इससे पहले नासा के वॉयजर2 ने 1989 में नेपच्यून पर काला धब्बा देखा था, लेकिन कुछ सालों बाद यह गायब हो गया।

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DISCOVERY : नेपच्यून के वायुमंडल में मिला रहस्यमय काला धब्बा?

DISCOVERY : नेपच्यून के वायुमंडल में मिला रहस्यमय काला धब्बा?

लंदन. यूरोपीय ऑब्जर्वेटरी के वेरी लार्ज टेलीस्कोप की मदद से खगोलविदों ने पहली बार पृथ्वी से नेपच्यून ग्रह के वायुमंडल में एक काले धब्बे की खोज की है। हालांकि यह पहली बार नहीं है, जब नेपच्यून पर इस तरह की आकृति नजर आई है। इससे पहले नासा के वॉयजर2 ने 1989 में नेपच्यून पर काला धब्बा देखा था, लेकिन कुछ सालों बाद यह गायब हो गया। वैज्ञानिकों को लगता है कि इस खोज से नेपच्यून की उत्पत्ति और वायुमंडल में बनने वाली विसंगतियों के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाश अध्ययन के प्रमुख अन्वेषणकर्ता और यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के प्रोफेसर पैट्रिक इर्विन बताते है कि काले धब्बे की पहली पहली खोज से ही वे यह जानना चाहते थे कि कम समय तक रहने वाली ये रहस्यमयी काली चीजें क्या हैं? इस खोज में शोधकर्ताओं ने वेरीलार्ज टेलीस्कोप के आंकड़ों की मदद ली थी।
आंकड़ों का अध्ययन करने के बाद शोधकर्ताओं ने बताया कि ये धब्बे हवा में मौजूद कणों के होने से नेप्च्यून के दिखाई देने वाली मूल वायुमंडलीय परत के नीचे गहरे रंग के होते जा रहे हैं। इन धब्बों का बदलता हुआ स्वरूप उन्हें समझने के लिए चुनौतियां पेश कर रहा है।


खास है ‘म्यूज’ उपकरण का उपयोग
इस अवसर को मिलते ही प्रोफेसर इर्विन और उनकी टीम ने वीएलटी के मल्टीयूनिट स्पेक्ट्रोस्कोपिक एक्सप्लोरर यानि म्यूज के जरिए विस्तृत विश्लेषण किया। इस उपकरण से शोधकर्ताओं ने नेप्च्यून से प्रतिबिम्बित होने वाली सूर्य की रोशनी को कई हिस्सों में बांटकर अपने रंगों या तरंगों में अलग कर एक 3डी स्पैक्ट्रम बनाया। इस तरह पहली बार सूर्य की रोशनी के प्रतिबिम्बित स्पैक्ट्रम का अध्ययन किया गया।

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